'मैं अपनी सरकार ही 48 घंटे में गिरा दूंगा...', पद्म भूषण हरीश साल्वे ने बताया क्यों नहीं बनना चाहते हैं मंत्री
रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के लीजेंड्स 'सीरीज' में भारत के पूर्व सॉलिसिटर जनरल और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील पद्म भूषण हरीश साल्वे ने शिरकत की।
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रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के लीजेंड्स 'सीरीज' में भारत के पूर्व सॉलिसिटर जनरल और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील पद्म भूषण हरीश साल्वे ने शिरकत की। एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी के साथ बातचीत के दौरान उन्होंने अपने अंदाज में हर सवाल का बेबाकी से जवाब दिया। उन्होंने मजाकिया अंदाज में बताया कि वो क्यों नहीं मंत्री और जज बनना पसंद करते। उन्होंने कहा कि मैं गैर-जिम्मेदार होने का जोखिम उठा सकता हूं, इसलिए मुझे मंत्री या जज बनना पसंद नहीं है।
अर्नब गोस्वामी ने जब हरीश साल्वे से कहा कि वो एक 'बेहतरीन मंत्री' हो सकते हैं तो इसपर उन्होंने मुस्कुराते हुए जवाब दिया मैं नहीं बन सकता। इसके पीछे की वजह बताते हुए पूर्व सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि 'मैं जो कहूंगा, वो गैर जिम्मेदारी वाली बात होगी।' अपने ही जवाब पर हंसते हुए हरीश साल्वे ने कहा कि “मैं अपनी ही सरकार को 48 घंटे में गिरा दूंगा।” साल्वे के इस सादगी और इमानदारी भरे जवाब से पूरा ऑडिटोरियम ठहाकों से गूंज उठा।
युवा और उभरते वकीलों को हरीश साल्वे ने दिया वकालत का मूल मंत्र
कार्यक्रम के अंत में हरीश साल्वे ने युवा और उभरते वकीलों को प्रेरक सलाह दी। अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा कि किसी वकील को अपने मुकदमे के नतीजे से खुद का मूल्यांकन नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि, “अगर आप केस जीतते हैं, तो यह जरूरी नहीं कि आप ही बेहतर थे। विरोधी कमजोर हो सकता है, या शायद जज ने आपकी बात को पूरी तरह समझा नहीं। कई बार आप इसलिए हारते हैं क्योंकि न्यायाधीश की बौद्धिक समझ आपसे मेल नहीं खाती।”
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कार्यक्रम के आखिरी में साल्वे ने जीवन में आत्मावलोकन के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “अगर आप जीवन में आगे बढ़ना चाहते हैं तो हमेशा अपने सबसे प्रभावी आलोचक बनें। यह अहंकार को नीचे रखता है।”