अपडेटेड 23 December 2023 at 16:31 IST
'दूसरे बेटे को भी सेना में भेजूंगा'...J&K में शहीद हुआ कानपुर का लाल; पिता ने की सरकार से ये मांग
Jammu Kashmir में हुए आंतकी हमले में जान गंवाने वाले कानपुर के लाल के पिता ने कहा- 'हमें अपने बेटे पर गर्व है, उसने देश की रक्षा करते हुए अपनी जान गवाई है।'
- भारत
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रिपोर्ट- गौरव त्रिवेदी
Jammu Kashmir Terrorist Attack: जम्मू कश्मीर में हुए आतंकी हमले में शहीद होने वाले जवानों में कानपुर का एक लाल भी शामिल है। जब इस बात की जानकारी जवान के परिजनों को मिली, तो घर में मातम छा गया। वहीं इस बीच पिता बालक सिंह यादव का कहना है कि, 'हमें अपने बेटे पर गर्व है कि उसने देश की रक्षा करते हुए अपनी जान गवाई है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि मेरे दूसरे बेटे को भी देश की सेवा करने का मौका दें।'
शहीद की मौत पर गांव में पसरा मातम
कानपुर के चौबेपुर थाना क्षेत्र के भाऊपुर गांव में जब लोगों को पता चला कि उनके गांव का एक लाल आतंकी हमले में शहीद हो गया है, तो पूरे गांव में मातम पसर गया। इसके बाद सभी गांव वाले अचानक से करन के घर की तरफ दौड़ पड़े और जब परिजनों ने उन्हें बताया की करन के शहीद होने की खबर आई है, तो सभी गांव वाले शाहिद के परिजनों को ढांढस बधाने लगे।
बचपन का सपना था सेना में जाना
गांव वालों ने बताया कि आतंकी हमले में शहीद होने वाला जवान करन किसान बालक सिंह यादव का बेटा था। उसकी दो बहनें भी हैं, जिसमें वह मंझला भाई था। 2013 में करन देश सेवा में भर्ती हुआ था। करन हमेशा से ही अपने परिजनों से कहता था, कि वह देश की सेवा ही करना चाहता है। इसीलिए उसने करियर के रूप में देशसेवा में जाने का अहम फैसला किया था।
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'दूसरे बेटे को भी सेना में भेजूंगा'- शहीद जावन के पिता
वहीं दूसरी तरफ शहीद लाल के पिता बालक सिंह यादव का कहना है कि 'हमें अपने बेटे पर गर्व है कि उसने देश की रक्षा करते हुए अपनी जान गवाई है। उनका यह भी कहना है कि हम सरकार से मांग करते है मेरे दूसरे बेटे को भी देश की सेवा करने का मौका दें।' वहीं करन के चाचा जिन्होंने उसे बचपन से गाइड किया उनका भी यही कहना है कि इस दुख की घड़ी में भी उन्हें इस बात का गर्व है कि उनके बेटे ने भारत माता की रक्षा करने के दौरान अपने प्राणों का बलिदान दिया है।
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उन्होंने आगे कहा कि 'गांव में बहुत से ऐसे परिवार हैं जिनके बेटे देश की सेवा कर रहे हैं।' वहीं करन यादव के दोस्त से जब हमने बात की तो उसने बताया कि हम साथ में ही दौड़ने जाते थे, लेकिन मेरी आंखों में दिक्कत की वजह से सेना में चयन नहीं हो पाया और करण का हो गया था लेकिन हमें गर्व है कि करण ने देश की सेवा में अपने प्राणों का बलिदान दिया है।
Published By : Sagar Singh
पब्लिश्ड 23 December 2023 at 16:18 IST