के सुरेश से मीरा कुमार तक... वो मौके जब दलितों को आगे कर कांग्रेस ने खेला खेल! हर बार मुंह की खाई
चाहे राष्ट्रपति चुनाव हों, उपराष्ट्रपति चुनाव हों या हालिया लोकसभा स्पीकर का चुनाव हो, कांग्रेस ने उसी पैटर्न को अपनाया, जिसका जिक्र PM नरेंद्र मोदी ने किया है।
- भारत
- 3 min read

'कांग्रेस की मानसिकता SC, ST और ओबीसी विरोधी है।' ये शब्द प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हैं, जिन्होंने बीते कल संसद के उच्च सदन में विरोधी पार्टी पर सवाल उठाए। कांग्रेस की आगे की प्लानिंग को प्रधानमंत्री मोदी बताते हैं कि जब भी कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्ष को पता चलता है कि हार सुनिश्चित है तो वो दलित कार्ड चल देते हैं। इसमें कोई दोराय नहीं है कि देश में कई बार मौके आए, खासकर बीते 10 बरस में, कांग्रेस ने बड़े चुनावों में दलितों को ही सबसे आगे रखकर राजनीति की। हालांकि चुनावों में हर बार कांग्रेस को मुंह की खानी पड़ी।
बीते कुछ बरसों में चाहे राष्ट्रपति के चुनाव हुए हों, उपराष्ट्रपति पद के चुनाव हुए हों या हालिया लोकसभा स्पीकर का चुनाव हो, कांग्रेस ने उसी पैटर्न को अपनाया, जिसका जिक्र बीजेपी और प्रधानमंत्री मोदी ने किया है। प्रधानमंत्री मोदी यहां तक कहते हैं कि दलित मरे, उनका (कांग्रेस) का कुछ जाता नहीं है। अब प्रधानमंत्री मोदी ने जिन दलितों का जिक्र किया है, उनके चुनावों की स्थिति को जरा समझते हैं।
वो चुनाव, जब कांग्रेस ने दलों को आगे किया?
शुरुआत 2002 के उपराष्ट्रपति चुनाव से कर लेते हैं, जब भारत के उपराष्ट्रपति के रूप में कृष्ण कांत का कार्यकाल 20 अगस्त 2002 को समाप्त हो गया था। उसके बाद उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनाव हुए। एक तरफ बीजेपी के भैरों सिंह शेखावत थे, जबकि कांग्रेस ने सुशील कुमार शिंदे पर दांव लगाया था। सुशील कुमार शिंदे एक दलित नेता थे। चुनाव में 149 मतों के भारी अंतर से सुशील कुमार शिंदे की हार हुई। उपराष्ट्रपति चुनाव में शेखावत को 454 और शिंदे को 305 मत मिले थे। 3 जुलाई 2024 को पीएम मोदी ने आरोप लगाए कि उनको (कांग्रेस) मालूम था कि वो पराजित होने वाले हैं, लेकिन उनको ही आगे किया। उपराष्ट्रपति पद के लिए उन्होंने सुशील कुमार शिंदे को आगे किया, उनको मरवा दिया।
उसके बाद जब 2017 में देश में राष्ट्रपति का चुनाव हुआ तो कांग्रेस ने फिर से दलित नेता को आगे करके अपना खेल खेला। कांग्रेस ने मीरा कुमार को सीधे मुकाबले में उतारा था, जिनकी हार पहले से ही तय थी। वो इसलिए कि संख्याबल और वोटों के हिसाब से एनडीए के पलड़ा पहले से ही भारी लग रहा था। एनडीए ने रामनाथ कोविंद को अपना कैंडिडेट बनाया था। परिस्थितियां प्रतिकूल होने के बावजूद कांग्रेस ने दलित चेहरे के रूप में मीरा कुमार को कैंडिडेट बनाया था। खुद प्रधानमंत्री मोदी ने 3 जुलाई को राज्यसभा में दावा किया कि कांग्रेस भी जानती थी कि वो राष्ट्रपति पद का चुनाव हार रहे हैं। बावजूद इसके कांग्रेस ने मीरा कुमार को उम्मीदवार बनाया।
Advertisement
अभी हालिया लोकसभा स्पीकर चुनाव को ही देख लिया जाए तो ये पहले से तय था कि जीत एनडीए के कैंडिडेट की होगी। कांग्रेस ने दलित नेता के सुरेश को मैदान में उतारकर लोकसभा को एक नए स्पीकर चुनाव की ओर धकेला। लोकसभा में चुनाव का दिन आया तो सदन में एनडीए के कैंडिडेट ओम बिरला की ध्वनिमत से जीत हुई। इस चुनाव को लेकर प्रधानमंत्री मोदी आरोप लगाते हैं कि लोकसभा स्पीकर चुनाव में पराजय तो तय थी, लेकिन एक दलित (के सुरेश) को बलि चढ़ाने के लिए खेल खेला गया।
मोदी ने दिए और भी उदाहरण
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन चुनावों के अलावा कांग्रेस की एससी, एसटी, ओबीसी विरोधी मानसिकता के कुछ और उदाहरण भी गिनाते हैं। 3 जुलाई 2024 को राज्यसभा में पीएम मोदी ने बताया कि कांग्रेस ने पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का अपमान किया। इसी मानसिकता के कारण देश की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति को भी उन्होंने अपमानित करना, विरोध करने में कोई कमी नहीं दी और ऐसे शब्दों का प्रयोग किया जो कोई नहीं कर सकता है।