AI से ग्रे जोन तक, भविष्य की जंग के लिए CDS जनरल सुब्रमणि ने बताया भारत का नया सुरक्षा रोडमैप

सीडीएस ने कहा कि आज युद्ध और शांति को पूरी तरह अलग-अलग स्थितियों के रूप में देखना मुश्किल होता जा रहा है। भारत को ऐसी सुरक्षा रणनीति तैयार करनी होगी, जो तकनीक और बदलते रणनीतिक माहौल दोनों का सामना कर सके।

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 CDS Gen NS Raja Subramani
CDS Gen NS Raja Subramani | Image: Republic

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लेकर ग्रे जोन संघर्ष तक, भविष्य की सुरक्षा चुनौतियां पारंपरिक युद्ध से कहीं आगे निकल चुकी हैं। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एनएस राजा सुब्रमणि ने सोमवार को दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि भारत को ऐसी सुरक्षा रणनीति तैयार करनी होगी, जो तकनीक और बदलते रणनीतिक माहौल दोनों का सामना कर सके।

सीडीएस ने कहा कि आज युद्ध और शांति को पूरी तरह अलग-अलग स्थितियों के रूप में देखना मुश्किल होता जा रहा है। विरोधी देश या समूह कई बार खुले सैन्य टकराव के बजाय ऐसे कदम उठाते हैं, जिनसे लगातार दबाव बनाया जा सके। आर्थिक दबाव, साइबर गतिविधियां, सूचना अभियान, तकनीकी रोक, समुद्री दबाव और प्रॉक्सी ऑपरेशन इसी व्यापक प्रतिस्पर्धा का हिस्सा हैं।

ग्रे जोन की खासियत

इस ग्रे जोन की खासियत यह है कि यहां चुनौती हमेशा स्पष्ट नहीं होती। कोई घटना युद्ध जैसी दिखाई नहीं दे सकती, लेकिन उसका असर किसी देश की अर्थव्यवस्था, डिजिटल व्यवस्था, जनमत या रणनीतिक विकल्पों पर पड़ सकता है। भारत के लिए यह पहचानना महत्वपूर्ण होगा कि ऐसे कदम अलग-अलग घटनाएं हैं या किसी बड़ी रणनीति का हिस्सा।

दूसरी तरफ, एआई और दूसरी उभरती तकनीकें युद्ध की गति बदल रही हैं। जनरल सुब्रमणि ने कहा कि तकनीक तभी उपयोगी है जब उसे तेजी से वास्तविक क्षमता में बदला जा सके। केवल अत्याधुनिक प्रणाली खरीद लेने से सैन्य बढ़त सुनिश्चित नहीं होती। उन्होंने सूचना के बढ़ते प्रवाह के बीच तेज निर्णय लेने को भी अहम बताया।

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आधुनिक सैन्य प्रणाली के फायदे

आधुनिक सैन्य प्रणालियां बड़ी मात्रा में डेटा उपलब्ध कराएंगी, लेकिन कमांडरों के लिए असली चुनौती होगी कि उस जानकारी को कितनी तेजी से समझा जाए और सही कार्रवाई तय की जाए। सीडीएस ने अलग-अलग सैन्य प्रणालियों को एक-दूसरे से जोड़ने की जरूरत पर भी जोर दिया। उनका दृष्टिकोण यह है कि भविष्य में हथियार और प्लेटफॉर्म अलग-अलग साधन नहीं, बल्कि एक बड़ी साझा क्षमता के हिस्से होने चाहिए।

भारत की रणनीतिक मजबूती का दूसरा आधार आत्मनिर्भरता है। जनरल सुब्रमणि ने सशस्त्र बलों, उद्योग, स्टार्टअप, एमएसएमई और अकादमिक संस्थानों के बीच मजबूत साझेदारी की जरूरत बताई। इस तरह उनका रोडमैप केवल युद्ध के लिए तैयारी करने तक सीमित नहीं है। इसमें खतरे की शुरुआती पहचान, तकनीक का तेज इस्तेमाल, बेहतर निर्णय, संयुक्त सैन्य क्षमता और मजबूत घरेलू रक्षा तंत्र शामिल हैं। आने वाले वर्षों में भारत की सुरक्षा क्षमता इसी बात पर निर्भर करेगी कि वह इन सभी हिस्सों को कितनी मजबूती से एक साथ जोड़ पाता है।

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Published By:
 Rupam Kumari
पब्लिश्ड