FCRA बिल को लेकर भारत सरकार सख्त, विदेश मंत्रालय की दो टूक- ये देश का आंतरिक मामला, अमेरिका खुद...
MEA प्रवक्ता ने अमेरिकी सांसद राइली मूर की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अमेरिका खुद भी अपने देश में बाहर से आने वाले फंड पर कड़ी नजर रखता है। इसलिए भारत अगर FCRA बिल लाता है तो उस पर सवाल उठाना सही नहीं है क्योंकि ये देश का आंतरिक मामला है।
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भारत सरकार जल्द ही संसद में FCRA (Foreign Contribution Regulation Act) बिल लाने की तैयारी कर रही है। इसे लेकर सरकार और विपक्ष दोनों तैयारी में जुटे हैं। उम्मीद है कि अगले हफ्ते इस बिल को लोकसभा में लाया जाएगा और इस पर चर्चा होगी। इससे पहले विदेश मंत्रालय ने इस बिल पर टिप्पणी करने वाले अमेरिकी सांसद राइली मूर को दो टूक जवाब दिया है।
FCRA बिल को लेकर देश में सियासी पारा चढ़ गरम है। चर्चा से पहले कांग्रेस और विपक्ष जोरदार तैयारी कर रहा है। कांग्रेस पार्टी ने इसे लेकर अपने लाकसभा सांसदों को एक व्हिप जारी किया है। जिसमें सोमवार 10 अगस्त से लेकर बुधवार 12 अगस्त तक सांसदों को लोकसभा में मौजूद रहने को कहा गया है।
भारत सरकार की ओर से अमेरिकी सांसद को जवाब
इस बीच भारत के विदेश मंत्रालय की इस FCRA बिल को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया आई है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मीडिया ब्रीफिंग के दौरान कहा कि ये भारत का आंतरिक मामला, जो विदेशी फंड को रेगुलेट करता है। MEA प्रवक्ता ने अमेरिकी सांसद राइली मूर की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अमेरिका खुद भी अपने देश में बाहर से आने वाले फंड पर कड़ी नजर रखता है। इसलिए भारत अगर ऐसा करता है तो उस पर सवाल उठाना सही नहीं है क्योंकि ये देश का आंतरिक मामला है। साथ ही रणधीर जायसवाल ने ये भी कहा कि ब्रिटेन समेत और कई देश भी अपने देश में आने वाले विदेशी फंड पर नजर रखते हैं।
FCRA बिल पर अमेरिकी सांसद ने क्या कहा?
अमेरिकी सांसद राइली मूर ने भारत में पेश होने वाले FCRA संशोधन बिल 2026 को लेकर आपत्ति जताई थी। मूर ने आरोप लगाया है कि यह बिल ईसाई समुदाय पर हमला है। उन्होंने चेतावनी के लहजे में कहा कि अगर यह बिल पारित होकर कानून बनता है तो भारत-अमेरिका द्विपक्षीय संबंधों में असर डाल सकता है।
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अपनी पोस्ट में राइली मूर ने कहा कि सेंट थॉमस द अपोस्टल प्रभु यीशु मसीह के पुनरुत्थान के कुछ ही दशक बाद मालाबार तट पहुंचे गए थे और तब से ईसाई भारत में हैं. मूर ने आरोप लगाया कि प्रस्तावित एफसीआरए संशोधन से विदेशी फंड पाने वाले चर्च, धार्मिक चैरिटी, स्कूल और हेल्थकेयर संस्थानों पर भारत सरकार की पकड़ बढ़ सकती है, खासकर तब जब उनका एफसीआरए लाइसेंस रद्द हो जाए, सरेंडर कर दिया जाए या उसका नवीनीकरण न हो।