ऑपरेशन सिंदूर की जब भी बात होती है, मुझे सेना पर गर्व होता है, आतंक को हम घर में घुसकर मारेंगे... Forces First Conclave में बोले राजनाथ सिंह
नेशन फर्स्ट' की भावना से देश के सबसे बड़े रक्षा कार्यक्रम फोर्सेस फर्स्ट कॉन्क्लेव' (Forces First Conclave) के तीसरे संस्करण को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा, ऑपरेशन सिंदूर की जब भी बात होती है, मुझे सेना पर गर्व होता है।
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रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क द्वारा आयोजित 'फोर्सेस फर्स्ट - भारत द डिफेंस पावरहाउस कॉन्क्लेव' में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हिस्सा लिया। 'नेशन फर्स्ट' की भावना से देश के सबसे बड़े रक्षा कार्यक्रम फोर्सेस फर्स्ट कॉन्क्लेव' (Forces First Conclave) के तीसरे संस्करण को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा, ऑपरेशन सिंदूर की जब भी बात होती है, मुझे सेना पर गर्व होता है। उन्होंने कहा, आतंक को हम घर में घुसकर मारेंगे।
राजनाथ सिंह ने सबसे पहले तीनों सेनाओं को देश का गौरव बताया और कहा कि जो देश अपने सैनिकों की रक्षा नहीं करता वो सुरक्षित नहीं रह सकता। रक्षा मंत्री ने कहा कि हमारी सरकार में सैनिकों का सम्मान ऊपर रखा गया है। रक्षा मंत्री ने जोर देकर कहा कि सैनिकों का मनोबल बढ़ाने के लिए आधुनिक हथियार और तकनीक का होना जरूरी है और पीएम मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने इसके लिए विशेष काम किया।'
आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति
राजनाथ सिंह ने आगे कहा, "रक्षा क्षेत्र में भारत को मजबूत करने के लिए हमने जो सबसे बड़ा काम किया है, वह रक्षा औद्योगिक क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाना है।" रक्षा मंत्री ने सीमा पार आतंकवाद के प्रति भारत के बदले पर बोलते हुए 'ऑपरेशन सिंदूर' की सफलता का जिक्र किया। उन्होंने कहा, "आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस हमारे लिए सिर्फ एक बयान नहीं, बल्कि कार्रवाई का एक तरीका है।
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हम आतंकियों के घरों में घुसकर उन पर हमला करेंगे। पूरी दुनिया ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान यह देखा है। आतंकवाद के खिलाफ भारत की 'जीरो टॉलरेंस' की नीति सिर्फ बातों तक सीमित नहीं है, बल्कि अब यह स्पष्ट रूप से हमारे कार्यों में भी दिखती है।"
भारत की सुरक्षा के लिए क्या है जरूरी रक्षा मंत्री ने बताया
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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, ‘भारत की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सबसे अहम कदम औद्योगिक क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करना रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि असली राष्ट्रीय ताकत सिर्फ सेना के आकार से नहीं, बल्कि संकट के समय अपनी अहम जरूरतों को पूरा करने की देश की क्षमता से तय होती है। उन्होंने आगे कहा कि जब कोई देश गोला-बारूद, नेविगेशन सिस्टम, मिसाइल, रडार और ड्रोन जैसी महत्वपूर्ण सैन्य जरूरतों के लिए बाहरी स्रोतों पर निर्भर रहता है, तो उसकी समग्र रणनीतिक और सैन्य स्वायत्तता सीमित हो जाती है।’