अपडेटेड 7 March 2025 at 17:00 IST

महाकुंभ में शामिल होना चाहते थे टेस्ला प्रमुख Elon Musk, स्वामी कैलाशानंद गिरि के अखाड़े में ठहरने की जताई थी इच्छा

स्टीव जॉब्स की पत्नी लॉरेन पॉवेल जॉब्स हाल ही में महाकुंभ में शामिल होने के लिए प्रयागराज आई थीं। लॉरेन ने ही एलन मस्क को महाकुंभ के बारे में बताया था।

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Elon Musk wanted to come to Prayagraj Mahakumbh 2025 swami kailashanad giri
महाकुंभ में शामिल होना चाहते थे टेस्ला प्रमुख Elon Musk | Image: X

निरंजनी अखाड़े के प्रमुख और आध्यात्मिक नेता स्वामी कैलाशानंद गिरि ने शुक्रवार को बताया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के वरिष्ठ सलाहकार तथा विश्व के प्रमुख उद्योगपतियों में शुमार एलन मस्क की महाकुंभ में शामिल होने की इच्छा थी और इसके लिए उन्होंने संदेश भी भेजा था। कैलाशानंद गिरि ने बताया,‘‘ मुझे टेस्ला के प्रमुख एलन मस्क का संदेश मिला था। एलन मस्क ने संपर्क कर महाकुंभ में शामिल होने और मेरे शिविर में ठहरने की इच्छा जतायी थी।’’

उन्होंने कहा कि स्टीव जॉब्स (एप्पल कंपनी के दिवंगत मुख्य कार्यकारी अधिकारी) की पत्नी लॉरेन ने मस्क को महाकुंभ के बारे में बताया था। स्टीव जॉब्स की पत्नी लॉरेन पॉवेल जॉब्स हाल ही में महाकुंभ में शामिल होने के लिए प्रयागराज आई थीं। हालांकि, स्वास्थ्य संबंधी कारणों से वह पहले दिन संगम में स्नान नहीं कर पाई थीं, लेकिन लॉरेन की प्रयागराज यात्रा सुर्खियों में रही थी।

सीएम योगी दिया भव्य कुंभ का श्रेय 

कैलाशानंद गिरि ने पिछले दिनों प्रयागराज में संपन्न महाकुंभ के सफल आयोजन का श्रेय उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को देते हुए कहा,‘‘ यदि योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री नहीं होते तो विशाल महाकुंभ संभव नहीं हो पाता।’’ 

महाकुंभ में 55 लाख विदेशी हुए शामिल

महाकुंभ मेले के दौरान देश के कोने-कोने से और विदेश से आए 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने गंगा और संगम में डुबकी लगाई। प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ इस साल 13 जनवरी से शुरू होकर 26 फरवरी तक चला था और इसमें 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने स्नान किया जिनमें 55 लाख विदेशी भी शामिल थे।

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लंदन के पत्रकार-लेखक मंत्रमुग्ध

महाकुंभ में 20 घंटे रुकने के बाद लंदन स्थित ट्रैवल राइटर्स और पत्रकारों का एक समूह आध्यात्मिक ऊर्जा और दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक समागम के इंतजामों की भव्यता से अचंभित नजर आया। उन्होंने कहा कि इस दौरान हर किसी ने अपने को भक्ति के सामान्य धागे से बंधा हुआ महसूस किया। इस ग्रुप के सदस्यों ने गंगा, यमुना और पौराणिक सरस्वती के संगम पर 45 दिन तक चले इस समागम को पहले से कहीं अधिक वैश्विक बताया।

(भाषा इनपुट के साथ)

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Published By : Sagar Singh

पब्लिश्ड 7 March 2025 at 17:00 IST