Kusha Missile: DRDO ने कुशा मिसाइल का किया सफल परीक्षण, दुश्मनों के हमले को हवा में कर देगी नाकाम, चीन-पाकिस्तान सीमा पर बनेगी मजबूत सुरक्षा कवच

DRDO ने ओडिशा तट पर स्थित एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से सतह से हवा में मार करने वाली कुशा मिसाइल का पहला सफल उड़ान परीक्षण किया है। आईए जानतें हैं सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल की क्या-क्या है खासियत

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DRDO conducts successful flight-test of Kusha’ Long-Range Surface-to-Air Missile
DRDO ने कुशा मिसाइल का किया सफल परीक्षण | Image: X

भारतीय सेना की ताकत में आज कई गुना का इजाफा हो गया। भारत ने अपनी स्वदेशी वायु रक्षा क्षमता को और मजबूत बनाने की दिशा में गुरुवार को एक बड़ी कामयाबी हासिल की। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने 23 जुलाई को ‘कुशा’ लॉन्ग-रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल (Kusha Missile) का पहला सफल परीक्षण किया है। DRDO की इस सफलता पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बधाई दी है।

ओडिशा तट पर स्थित एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से सतह से हवा में मार करने वाली कुशा मिसाइल का पहला सफल उड़ान परीक्षण किया। यह परीक्षण भारत के स्वदेशी लंबी दूरी के एयर डिफेंस कार्यक्रम 'प्रोजेक्ट कुशा' के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य देश के लिए ऐसी स्वदेशी वायु रक्षा प्रणाली विकसित करना है, जो लंबी दूरी से आने वाले हवाई खतरों को प्रभावी ढंग से रोक सके।

रक्षा मंत्री ने DRDO को दी बधाई 

इस सफलता के लिए DRDO को बधाई देते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने X पोस्ट में लिखा, @DRDO_India ने आज ओडिशा के तट पर APJ अब्दुल कलाम द्वीप से लॉन्ग-रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल 'कुशा' का पहला सफल उड़ान परीक्षण किया। कुशा मिसाइल सिस्टम कई तरह के हवाई खतरों - जैसे फाइटर जेट, मिसाइल, UAV और दुश्मन के बड़े विमान की एक बड़ी रेंज को हवा में ही खत्म करने में सक्षम है।

 कुशा रक्षा क्षेत्र में एक अहम मील का पत्थर 

कुशा का आज का सफल उड़ान परीक्षण भारतीय रक्षा क्षेत्र में एक अहम मील का पत्थर है। लॉन्ग-रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल सिस्टम विकसित करने की क्षमता दुनिया के बहुत कम देशों के पास है। इससे ऐसे सिस्टम के लिए आयात पर निर्भरता खत्म होगी और यह देश की हवाई रक्षा क्षमता में एक बड़ी छलांग होगी। मैं इस उपलब्धि के लिए DRDO और अन्य संबंधित लोगों को बधाई देता हूं।

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कुशा मिसाइल की क्या-क्या है खासियत?

पहला टेस्ट इलेक्ट्रॉनिक टारगेट के खिलाफ किया गया था, जो हाई-स्पीड और हाई-एल्टीट्यूड हवाई खतरे की नकल कर रहा था, जिसे मिसाइल सिस्टम ने सफलतापूर्वक इंटरसेप्ट कर लिया। कुशा मिसाइल सिस्टम एक बड़ी रेंज और ऊंचाई वाले एनवायरनमेंट में फाइटर जेट, मिसाइल, अनमैन्ड एरियल व्हीकल और बड़े दुश्मन एयरक्राफ्ट सहित कई तरह के हवाई खतरों को नष्ट करने में सक्षम है।

मिसाइल, रडार, कमांड और कंट्रोल सेंटर सहित सभी वेपन सिस्टम एलिमेंट्स को अलग-अलग DRDO लैब्स और इंडस्ट्री पार्टनर्स द्वारा डेवलप किया गया है। परीक्षण के दौरान डिफेंस सेक्रेटरी और डिपार्टमेंट ऑफ डिफेंस R&D के सेक्रेटरी और DRDO के चेयरमैन राजेश कुमार सिंह ने सभी गतिविधियों पर नजर रखी।

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Published By:
 Rupam Kumari
पब्लिश्ड