अपडेटेड 17 November 2025 at 22:05 IST

'तुम्हारा नाम आतंकवादी गतिविधियों में आया है...', WhatsApp कॉल के जरिए दिल्ली ब्लास्ट की आड़ में डिजिटल अरेस्ट कर ठगी

दिल्ली धमाके की आड़ में बड़ी ठगी हो रही है। ठग नकली ATS/NIA अधिकारी बनकर फोन पर ही लोगों के लाखों रुपये उड़ा रहे हैं। कहीं आप भी तो नहीं अगला शिकार ? ये है ठगी का नया तरीका। रहे सावधान!

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Digital Arrest Scam: दिल्ली में हुए कार बम ब्लास्ट के बाद पूरे देश में आतंक‑संबंधी अफवाहों का माहौल बना हुआ है। इसी बीच, साइबर ठगों ने इस स्थिति का फायदा उठाते हुए कई लोगों को डिजिटल अरेस्ट करना शुरू कर दिया। ठग खुद को ATS, NIA और बाकी जांच एजेंसियों के अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं और लाखों रुपये की वसूली करते हैं।

ठगी का नया तरीका

फोन/WhatsApp कॉल: पीड़ित को अनजान नंबर से कॉल आती है, जिसमें कॉलर ID पर ‘NIA’ या ‘ATS’ लिखा दिखता है। 
डिजिटल अरेस्ट की धमकी: कॉलर कहता है कि उनका नाम आतंकवादी गतिविधियों में आया है और तुरंत ‘डिजिटल अरेस्ट वारंट’ जारी किया जाएगा।
वित्तीय मांग: डर का माहौल बनाकर, ठग ‘सुरक्षित खाते’ में फंड ट्रांसफर करने की बात कहते हैं, पैसे RTGS (Real-Time Gross Settlement) के माध्यम से लिए जा रहे हैं।

कानपुर में 45 साल की सुनीता गौड़ को धमाके के अगले दिन इसी तरह कॉल आया। ठग ने खुद को NIA अधिकारी बताकर 6 लाख रुपये RTGS करवा लिये। इसी तरह, गोविंदनगर के पंकज चड्ढा और विजयनगर के रिटायर्ड बैंकर सी. के. तिवारी भी इस घोटाले का शिकार होने से बच गए, क्योंकि उन्होंने कॉल शक होने पर काट दिया था

मुझे लगा असली जांच, मैंने पैसे भेज दिए- पीड़िता 

सुनीता गौड़ ने कहा- 'मैंने सोचा कि यह असली जांच है, इसलिए तुरंत पैसे भेज दिए। बाद में पता चला कि यह पूरी तरह फर्जी था।' वहीं, पंकज चड्ढा ने कहा-  कॉलर ने ATS अधिकारी बनकर वीडियो कॉल की मांग की, लेकिन मैंने तुरंत फोन काट दिया। 

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पुलिस की चेतावनी

कानपुर पुलिस के प्रवक्ता अंजलि विष्कर्मा (एडिशन डी सी पी, क्राइम) ने इस मामले में ज्यादा जानकारी देते हुए कहा कि, 'कोई भी सरकारी एजेंसी ‘डिजिटल अरेस्ट’ नहीं करती। अगर आपको ऐसी कॉल आती है तो घबराएं नहीं, तुरंत 1930 पर शिकायत दर्ज करें। 2 घंटे के भीतर की गई शिकायत को ‘गोल्डन ऑवर’ माना जाता है, जिससे फंड वापस मिलने की संभावना बढ़ती है।' पुलिस ने बताया कि ज्यादातर कॉल पश्चिम बंगाल से किए जा रहे हैं और वे अक्सर दिल्ली विस्फोट और फरीदाबाद में बरामद विस्फोटक सामग्री की खबरों को आधार बनाकर डर फैलाते हैं।

साइबर हेल्पलाइन 1930 से तुरंत लेनी चाहिए मदद 

साइबर अपराध की बढ़ती घटनाओं के मद्देनजर, राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 को सक्रिय किया गया है। इस लाइन पर शिकायत करने से फंड ट्रेस, बैंक खाता फ्रीज और ठगों की पहचान में मदद मिलती है। दिल्ली धमाके की छाया में चल रहे इस डिजिटल अरेस्ट स्कैम ने कई लोगों को आर्थिक और मानसिक रूप से प्रभावित किया है। सतर्क रहना, अनजान नंबरों से सावधान रहना और तुरंत 1930 पर रिपोर्ट करना ही इस तरह के घोटालों से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।

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Published By : Sujeet Kumar

पब्लिश्ड 17 November 2025 at 22:04 IST