अपडेटेड 27 February 2025 at 22:46 IST
परपंरा और आधुनिकता के बीच सेतु का काम करती हैं डिजाइन, बोलीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू
मुर्मू ने पारंपरिक समुदायों की डिजाइन सहित ज्ञान प्रणालियों का अध्ययन और दस्तावेजीकरण करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि डिजाइन परंपरा और आधुनिकता के बीच एक सेतु का काम करती हैं।
- भारत
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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पारंपरिक समुदायों की डिजाइन सहित ज्ञान प्रणालियों का अध्ययन और दस्तावेजीकरण करने की आवश्यकता पर बल देते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि डिजाइन परंपरा और आधुनिकता के बीच एक सेतु का काम करती हैं। राष्ट्रपति मुर्मू राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान के 44वें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा, ‘‘डिजाइन परंपरा और आधुनिकता के बीच एक सेतु का काम करती है। यह एक ओर तो प्राचीन ज्ञान, शिल्प और कलात्मक प्रथाओं को साथ लाता है, जो अक्सर ग्रामीण और आदिवासी समुदायों में निहित होते हैं, वहीं दूसरी ओर समकालीन प्रौद्योगिकी और डिजाइन सिद्धांतों को भी साथ लाता है। यह मिश्रण नवाचारों को बढ़ावा देता है और हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को भी संरक्षित करता है।’’
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि..
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में यह महत्वपूर्ण है, जहां पारंपरिक कौशल को बढ़ाने, अपनाने और आधुनिक आवश्यकताओं के साथ एकीकृत करने की आवश्यकता है, ताकि एक स्थायी व्यवस्था बनायी जा सके। मुर्मू ने कहा, ‘‘डिजाइन के छात्रों को पारंपरिक समुदायों की डिजाइन प्रणालियों का अध्ययन करने की आवश्यकता है। हमें पारंपरिक समुदायों की डिजाइन प्रणालियों सहित ज्ञान प्रणालियों का अध्ययन और दस्तावेजीकरण करने की आवश्यकता है। मेरा मानना है कि उनकी सांस्कृतिक प्रथा 21वीं सदी में दुनिया के सामने आने वाली कुछ चुनौतियों की कुंजी है।’’
उन्होंने कहा कि भारत की विविध संस्कृतियों से प्राप्त ऐतिहासिक समाधानों को पुनर्जीवित करना और उन्हें नवाचार के लिए उपयोग में लाना न केवल राष्ट्र के लिए लाभकारी होगा, बल्कि वैश्विक प्रगति में भी योगदान देगा। उन्होंने कहा, ‘‘हमारे देश में डिजाइन सभी समुदायों के रोजमर्रा के जीवन के ताने-बाने में समाहित है। रचनात्मक चीजें ऐसे समाधान ला सकती हैं, जो जीवन को आसान बना सकते हैं, खासकर वंचित समुदायों के लिए। दूसरे शब्दों में कहें तो डिजाइन अक्सर कम ध्यान दिया जाने वाला लेकिन हमारे देश के सामाजिक और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण कारक है।’’
उन्होंने कम ज्ञात डिजाइन परंपराओं के अध्ययन में अनुकरणीय कार्य के लिए एनआईडी की सराहना करते हुए कहा कि इस संबंध में अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। कार्यक्रम में 400 छात्रों को डिग्री प्रदान की गई। इस कार्यक्रम में गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत, मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और जितिन प्रसाद मौजूद थे।
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(Note: इस भाषा कॉपी में हेडलाइन के अलावा कोई बदलाव नहीं किया गया है)
Published By : Garima Garg
पब्लिश्ड 27 February 2025 at 22:46 IST