'इमारत गिरने के डेढ़ घंटे बाद पहुंची रेस्क्यू टीम, स्थानीय लोग पहले पहुंचे...', सत्य निकेतन हादसे के वक्त क्या-क्या हुआ? प्रत्यक्षदर्शी ने बताया

दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत हादसे के बाद मलबे में दबी जिंदगियों को बचाने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। हादसे के वक्त मौजूद एक चश्मदीद ने खौफनाक मंजर को बयां किया है।

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Delhi Building Collapse
Delhi Building Collapse | Image: ANI

दक्षिणी दिल्ली के सत्य निकेतन में रविवार, 6 सितंबर को हुए हादसे के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मचा हुआ है। आस-पास के जर्जर इमारतों को भी जल्द से जल्द खाली करने का निर्देश दिया गया है। इधर मलबे में दबी जिंदगियों को बचाने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। सोमवार को मलबे के अंदर से एक और शव बरामद हुआ है जिससे मरने वालों की संख्या बढ़कर 7 हो गई। मौके पर मौजूद एक चश्मदीद ने इस भयावह घटना की आंखों देखी बयां किया है।

चश्मदीद सुरजीत ने न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत में बताया , "मैं आर्यभट्ट कॉलेज से हूं। मुझे लगता है कि यह घटना दोपहर 1:15 से 1:30 बजे के बीच हुई। मैं इसी इलाके में रहता हूं, घटना के बाद मैं तुरंत मौके पर पहुंचा। उस समय तक किसी की मौत की पुष्टि नहीं हुई थी, हालांकि यह साफ हो रहा था कि कौन फंसा है और कौन नहीं। जो लोग मलबे के ऊपर से दब हुए नजर आ रहे थे उन्हें हम सबने मिलकर बाहर निकाला, वो लोग सब जिंदा थे।

चश्मदीद ने बताया हादसे के बाद क्या हुआ?

सुरजीत ने बताया कि घटने के करीब एक घंटे बाद बचाव दल मौके पर पहुंचा। इसके बाद रेस्क्यू शुरू किया गया। हमें एक तरफ हटने को कहा गया। शुरुआत में जिन फंसे हुए लोगों को बचाया गया, वे जिंदा थे। हालांकि, डेढ़ या दो घंटे बाद बचाए गए लोगों के बारे में जो खबर मिली या अस्पताल में जो पता चला वो दुखद था। फिर क्रेन और JCB मशीनें आईं। जैसे ही उन्होंने मलबा हटाना शुरू किया, सभी को एक तरफ कर दिया गया। पुलिस ने मोर्चा संभाला और भीड़ को पीछे हटाया।"

मलबे में कुछ लोगों के दबे होने की आशंका

हादसे में अब भी कुछ लोगों का पता नहीं चल पाया है। बच्चों के माता-पिता, दोस्त बस भगवान के भरोसे हैं।  मयंक, जिसका दोस्त अर्पित सत्य निकेतन में गिरी बिल्डिंग के बाद से लापता है, ने बताया, "वह अभी ARSD कॉलेज में पढ़ रहा है। घटना के समय वह उस बिल्डिंग के अंदर था जो कल गिरी थी, और अब तक उसके बारे में कोई खबर नहीं है। शाम को मैंने इंस्टाग्राम पर देखा कि बिल्डिंग गिर गई है।"

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"मैंने उसे कॉल करने की कोशिश की। कॉल नहीं लगी, इसलिए मैंने उसके परिवार को फोन किया। उन्होंने मुझे बताया कि वह सच में उस बिल्डिंग में था। इस तरह मुझे पता चला, और मैं तुरंत AIIMS आ गया। वह तीसरी मंजिल पर रहता था। उसका नाम अर्पित जाज था; वह ARSD कॉलेज में B.Com प्रोग्राम का सेकंड ईयर का स्टूडेंट था।"

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Published By:
 Rupam Kumari
पब्लिश्ड