अपडेटेड 7 January 2026 at 08:44 IST
आवारा कुत्तों पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, लास्ट टिप्पणी में कहा- 'इतनी याचिकाएं तो इंसानों के लिए भी नहीं आतीं'
सुप्रीम कोर्ट आज आवारा कुत्तों के मामले पर बड़ी सुनवाई करने जा रहा है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में 5 सुनवाई हो चुकी है। जानें अभी तक मामले में क्या कुछ हुआ, कैसे सब शुरू हुआ?
- भारत
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Supreme Court stray dogs case : आवारा कुत्तों से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट आज सुनवाई करेगा। कल मंगलवार (6 जनवरी 2026) को जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच के सामने 2 वकीलों ने इस मुद्दे को उठाया, जिसमें जस्टिस संदीप मेहता ने टिप्पणी की- 'इंसानों से जुड़े मामलों में भी आमतौर पर इतनी अधिक याचिकाएं नहीं आतीं।' इसके बाद आज (7 जनवरी) को जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन वी अंजारिया की बेंच इस मामले में सुनवाई करेगी।
रास्तों पर घूमने वाले कुत्तों का ये मामला 28 जुलाई, 2025 को स्वतः संज्ञान (Suo Motu) पर शुरू हुआ था। सुओ मोटो (Suo Motu) का मतलब 'स्वयं की पहल पर' और 'स्वतः संज्ञान लेना' है। कानूनी संदर्भ में इसका मतलब है जब कोई अदालत अनुरोध के बिना, अपनी इच्छा से किसी मामले पर कार्रवाई शुरू करती है, खासकर जनहित और न्याय के लिए। यह अदालतों (जैसे सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट) को किसी भी कानूनी मुद्दे पर स्वतः संज्ञान लेने और कार्रवाई करने की शक्ति देता है, भले ही किसी ने याचिका दायर न की हो।
सुप्रीम कोर्ट में हुई पिछली 5 सुनवाई…
सुप्रीम कोर्ट के स्वत: संज्ञान के बाद मीडिया रिपोर्ट्स में बच्चों में रेबीज के बढ़ते मामलों की चर्चा हुई। नवंबर 2025 में कोर्ट ने स्कूल, अस्पताल, रेलवे स्टेशन जैसे सार्वजनिक स्थानों से कुत्तों को नसबंदी-टीकाकरण के बाद शेल्टर में स्थानांतरित करने और हाईवे से आवारा पशुओं को हटाने के निर्देश दिए थे। कोर्ट ने संस्थागत क्षेत्रों में कुत्तों के काटने की घटनाओं को 'प्रशासनिक उदासीनता' (Administrative Apathy) और 'प्रणालीगत विफलता' (Systemic Failure) बताया था।
अभी तक आवारा कुत्तों के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में 5 सुनवाई हो चुकी है।
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- 11 अगस्त 2025 को इस मामले में पहली सुनवाई को हुई। सुप्रीम कोर्ट ने पहली बार डॉग्स को सड़कों से उठाकर शेल्टर होम में रखने का आदेश दिया था।
- 22 अगस्त 2025 को पहले के आदेश में बदलाव किया गया। जिसके बाद नसबंदी-टीकाकरण के बाद उन्हें वापस उनके इलाके में छोड़ने को कहा गया। सार्वजनिक जगहों पर फीडिंग-जोन घोषित किए गए।
- 27 अक्टूबर 2025 को राज्यों को फटकार लगाई। कहा कि आवारा कुत्तों के काटने की बढ़ती घटनाओं से देश की छवि को नुकसान पहुंचता है।
- 3 नवंबर 2025 को मुख्य सचिवों की व्यक्तिगत बुलाने के लिए कहा। जब बिहार के मुख्य सचिव ने चुनाव के कारण छूट मांगी, तो कोर्ट ने यह अनुमति नहीं दी। कहा कि चुनाव में आपकी भूमिका विशेष नहीं है, इसलिए आपको पेश होना ही होगा।
- 7 नवंबर 2025 को कोर्ट ने पढ़ाई वाले संस्थान, अस्पताल, रेलवे स्टेशनों जैसी जगह से आवारा कुत्तों को हटाने का निर्देश जारी किया। आदेश में कहा गया कि ठिकानों से हटाए गए कुत्ते फिर वहीं वापस नहीं छोड़े जाएं।
इसके बाद अब आज (7 जनवरी) फिर से सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों पर सुनवाई होने जा रही है।
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Published By : Sagar Singh
पब्लिश्ड 7 January 2026 at 08:37 IST