Delhi: बवाना में अपशिष्ट से ऊर्जा बनाने के संयंत्र के खिलाफ प्रदर्शन

Delhi: दिल्ली के बवाना में अपशिष्ट से ऊर्जा बनाने के संयंत्र के खिलाफ प्रदर्शन जारी है।

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Industrial plant
प्रतीकात्मक तस्वीर | Image: Unsplash

Delhi: दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले बवाना में प्रस्तावित अपशिष्ट से ऊर्जा बनाने के संयंत्र का मुद्दा चर्चा में आ गया है। स्थानीय निवासियों ने इसे लेकर पर्यावरण और स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं जताई हैं और एक वर्ग ने धमकी दी है कि अगर परियोजना आगे बढ़ी तो वे चुनाव का बहिष्कार करेंगे।

डीएसआईडीसी सेक्टर 5 में खतरनाक कचरे के शोधन, भंडारण और निपटान संयंत्र (टीएसडीएफ) के पास 15 एकड़ क्षेत्र में इस संयंत्र की स्थापना की योजना बनाई गई है।

आस पास के 15 से अधिक गांवों के निवासियों ने ‘पीटीआई-भाषा’ से बात करते हुए दावा किया कि इस परियोजना के कारण पेड़ काटे जाएंगे, वायु और जल प्रदूषण बढ़ेगा तथा श्वसन संबंधी बीमारियों के साथ-साथ तंत्रिका संबंधी विकारों सहित दीर्घकालिक स्वास्थ्य जोखिम पैदा होंगे।

ग्रामीणों ने यह भी तर्क दिया कि अपशिष्ट से ऊर्जा (डब्ल्यूटीई) संयंत्र से निकलने वाले उत्सर्जन जैसे डाइऑक्सिन, फ्यूरान, पार्टिकुलेट मैटर (पीएम 2.5 और पीएम 10) और यहां तक ​​कि पारा एवं सीसा जैसी भारी धातुएं न केवल वायु की गुणवत्ता को खराब करेंगी बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य को भी खतरे में डालेंगी।

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नरेला विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सनोथ गांव के निवासी राजपाल सैनी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘इस संयंत्र से निकलने वाला जहरीला उत्सर्जन हमारे जीवन को खतरे में डाल देगा। हम पहले से ही आस-पास की फैक्टरियों और अन्य डब्ल्यूटीई संयंत्रों से होने वाले प्रदूषण से जूझ रहे हैं। अब इस संयंत्र की स्थापना होने से यह और असहनीय बन जाएगा।’’

अधिकारियों ने सुझाव दिया है कि प्रस्तावित डब्ल्यूटीई संयंत्र में सभी आवश्यक प्रदूषण नियंत्रण प्रणालियां होंगी, जबकि स्थानीय लोगों ने नए संयंत्र के क्षेत्र में अन्य मौजूदा डब्ल्यूटीई संयंत्रों के समान होने की आशंका जताई है, जिनसे निकलने वाली राख के कुप्रबंधन और खतरनाक रूप से उच्च स्तर के प्रदूषक के कारण आस पास के समुदाय प्रभावित होते हैं।

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क्षेत्र में इसी तरह के डब्ल्यूटीई संयंत्रों के पिछले रिकॉर्ड की ओर इशारा करते हुए एक अन्य निवासी मांगे राम ने कहा, ‘‘ओखला डब्ल्यूटीई संयंत्र इसका प्रमुख उदाहरण है। खतरनाक राख और जहरीले उत्सर्जन ने आसपास के क्षेत्रों को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। हम कैसे भरोसा कर सकते हैं कि यह संयंत्र कुछ अलग होगा?’’

उन्होंने डब्ल्यूटीई संयंत्रों से अपशिष्ट और राख के कथित ‘‘अनुचित प्रबंधन’’ के कारण मिट्टी और पानी के संदूषण की आशंका को भी उजागर किया।

सनोथ के एक अन्य निवासी राकेश कुमार ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण उपायों का वादा करते हैं, लेकिन हमने पहले भी विफलताएं देखी हैं। अन्य संयंत्रों में राख के कुप्रबंधन ने आस-पास के समुदायों को नुकसान पहुंचाया है और हम यहां ऐसे जोखिम नहीं उठा सकते।’’

बवाना के निवासी भी प्रस्तावित स्थल पर मौजूदा पेड़ों के भविष्य को लेकर आशंकित और चिंतित हैं तथा उन्होंने छह जनवरी को उप वन संरक्षक को एक पत्र लिखा है।

बवाना की जेजे कॉलोनी के निवासी राम चंद्रन ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘इस 15 एकड़ भूमि पर बड़े-बड़े पेड़ हैं जो स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र के लिए महत्वपूर्ण हैं। प्रदूषण बढ़ाने वाली परियोजना के लिए इन पेड़ों को नष्ट करना अस्वीकार्य है।’’

निवासियों ने आरोप लगाया कि सनोथ गांव, जेजे कॉलोनी, सीआरपीएफ (केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल) कैंप और वायु सेना स्टेशन सहित प्रमुख आबादी वाले क्षेत्रों को पर्यावरण संवेदनशीलता रिपोर्ट से बाहर रखा गया है।

बवाना ‘रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन’ के अध्यक्ष यश ने कहा, ‘‘जानबूझकर की गई यह चूक पारदर्शिता की कमी को दर्शाती है। ऐसे निर्णयों में प्रभावित समुदायों को शामिल किया जाना चाहिए।’’

ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की नीतियों की ‘‘विफलताओं’’ पर जोर देते हुए पर्यावरणविद् भवरीन कंधारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि उचित पृथक्करण के बिना दहन के लिए भेजे गए अपशिष्ट से विषाक्त उत्सर्जन होता है और खतरनाक राख निकलती है।

बवाना के जेजे कॉलोनी की सामाजिक कार्यकर्ता निशा सिंह ने कहा, ‘‘विकास हमारे स्वास्थ्य और पर्यावरण की कीमत पर नहीं होना चाहिए।’’

प्रस्तावित डब्ल्यूटीई संयंत्र की पर्यावरणीय मंजूरी के लिए 27 दिसंबर को दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) द्वारा बवाना में प्रस्तावित संयंत्र स्थल पर सार्वजनिक सुनवाई आयोजित की गई।

भारी बारिश के कारण कीचड़ से भरे स्थल पर हजारों स्थानीय निवासी एकत्रित हुए और परियोजना के खिलाफ नारे लगाए।

डीपीसीसी की तीन जनवरी की रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘हंगामा करते हुए उत्तेजित लोगों ने परियोजना का कड़ा विरोध किया। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि यह स्थल एक और ‘खत्ता’ (डंप साइट) बन जाएगी और कहा कि वे इस स्थल पर प्रस्तावित परियोजना की अनुमति नहीं देंगे।’’

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(Note: इस भाषा कॉपी में हेडलाइन के अलावा कोई बदलाव नहीं किया गया है)

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 Kajal .
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