अपडेटेड 26 February 2026 at 23:40 IST

JNU Protest: जेएनयू के छात्रों ने फिर काटा बवाल, पुलिस पर फेंके जूते, डंडे और दांतों से भी काटा, 50 से ज्यादा हिरासत में

JNU Protest: JNU एक बार फिर बवाल से चर्चा का केंद्र बन गया है। यहां पुलिस के सख्त मना करने के बावजूद करीब 500 उग्र छात्रों की भीड़ ने बैरिकेड्स तोड़े और पुलिस पर सीधा हमला कर दिया।

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JNU Protest: दिल्ली का जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय यानी JNU एक बार फिर बवाल से चर्चा का केंद्र बन गया है। यहां 26 फरवरी को जेएनयू छात्रसंघ (JNUSU) द्वारा एक 'लॉन्ग मार्च' के दौरान यूनिवर्सिटी कैंपस के गेट पर जबरदस्त बवाल हुआ। दरअसल, छात्र UGC के नए नियमों को लागू करने और कुलपति को बर्खास्त करने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे।

इसी बीच छात्रों की भीड़ पुलिस के बैरिकेड्स तोड़कर बाहर निकलने की कोशिश करने लगे। इसके बाद पुलिस ने जब रोकने की कोशिश की तो प्रदर्शनकारियों ने न केवल पत्थर और जूते फेंके, बल्कि पुलिसकर्मियों के साथ हाथापाई की और उन्हें दांतों से भी काटा, जिसमें कई पुलिस अधिकारी घायल हो गए हैं।

कैंपस के गेट पर घंटों चला ड्रामा

छात्रों के मार्च को रोकने के लिए दिल्ली पुलिस, RAF और CRPF की भारी तैनाती की गई थी। पुलिस ने नॉर्थ गेट पर कई लेयर वाली बैरिकेडिंग की थी। जब छात्रों ने आगे बढ़ने की कोशिश की, तो पुलिस के साथ उनकी झड़प हो गई। छात्रों का कहना है कि पुलिस ने उन पर लाठीचार्ज किया और बदसलूकी की।

वहीं, पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, छात्रों ने डंडे और बैनर से हमला किया। इस हंगामे के बाद पुलिस ने 50 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर बसों में डाल दिया। हिरासत में लिए गए छात्रों को छुड़ाने के लिए कुछ प्रोफेसरों ने पुलिस अधिकारियों से मुलाकात की, लेकिन पुलिस का कहना है कि छात्र अपनी पहचान नहीं बता रहे हैं, इसलिए उन्हें फिलहाल नहीं छोड़ा जा सकता।

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कई पुलिस अधिकारी घायल

इस हिंसक झड़प में किशनगढ़ के एसएचओ राजकुमार, सरोजनी नगर के एसएचओ अतुल त्यागी और वसंत कुंज के एसीपी वेद प्रकाश समेत कई पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। दिल्ली पुलिस के अनुसार, JNU छात्रसंघ ने शिक्षा मंत्रालय तक ‘लॉन्ग मार्च’ का आह्वान किया था। लेकिन, छात्रों को पहले ही समझा दिया गया था कि कैंपस के बाहर मार्च की अनुमति नहीं है, और उन्हें परिसर तक सीमित रहने को कहा गया था। लेकिन उन्होंने कानून का उल्लंघन किया।

बातचीत और अनुरोधों के बावजूद 400 से 500 छात्र इकट्ठा हुए और मार्च निकाला। लगभग 3:20 मिनट पर छात्र मुख्य गेट से बाहर निकलकर मार्च करने लगे। इस दौरान उन्होंने बैरिकेड्स तोड़े दिए, जिससे माहौल हिंसक हो गया। पुलिस ने यह भी बताया कि कुछ छात्रों ने जूते, बैनर और डंडे फेंके। यहां तक कि कुछ छात्रों ने पुलिसकर्मियों को दांत भी काटा। इस हिंसा में कई पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। 

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कोर्ट के आदेश और अनुशासन का हवाला

JNU प्रशासन ने इस पूरे विवाद पर अपना रुख साफ करते हुए कहा है कि छात्र जिन यूजीसी नियमों को लागू करने की मांग कर रहे हैं, उन पर माननीय सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल रोक (स्टे) लगा रखी है। प्रशासन का तर्क है कि ऐसे में नियमों को लागू करना अदालत की अवमानना होगी। कुलपति और रजिस्ट्रार के पास इन नीतिगत नियमों को बदलने का अधिकार नहीं है। 

प्रशासन ने यह भी आरोप लगाया कि छात्र संघ हिंसा और तोड़फोड़ के असली मुद्दे से ध्यान भटकाने के लिए यूजीसी नियमों का सहारा ले रहे है। विश्वविद्यालय ने महिला ओबीसी कुलपति पर लगाए जा रहे आरोपों को प्रशासन ने दुर्भाग्यपूर्ण और आधारहीन बताया है।

जेएनयू के मेन गेट पर तनाव की स्थिति

फिलहाल जेएनयू के मेन गेट पर भारी तनाव बना हुआ है और अतिरिक्त सुरक्षा बलों को तैनात कर दिया गया है। छात्र अभी भी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं, जबकि प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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Published By : Sagar Singh

पब्लिश्ड 26 February 2026 at 23:40 IST