Iran Israel War: युद्ध से ठंडी पड़ी रसोई की आग, LPG की किल्लत ने बुझाए ढाबों के चूल्हे, दिल्ली-NCR की मंडियों में खरीददारों का इंतजार
LPG Crisis: गल्फ की जंग ने न केवल गैस की किल्लत पैदा की है, बल्कि इसने आम आदमी की थाली, किसानों की कमाई और छोटे व्यापारियों की रोजी-रोटी पर भी सीधा हमला किया है। अगर यह तनाव जल्द खत्म नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में आम आदमी की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
- भारत
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LPG Crisis Impact In Delhi-NCR: युद्ध कहीं भी हो, उसकी कीमत आम आदमी को ही चुकानी पड़ती है। ईरान और इजरायल के बीच छिड़ी जंग का असर अब सात समंदर पार भारत की थालियों में दिखने लगा है। खाड़ी देशों में तनाव के कारण देश में LPG की भारी किल्लत हो गई है, जिससे दिल्ली-NCR समेत कई इलाकों में हाहाकार मचा है।
होटल और ढाबों पर सन्नाटा
शहर के जो होटल और ढाबे रात-दिन गुलजार रहते थे, आज वहां सन्नाटा पसरने लगा है। गैस सिलेंडर न मिलने के कारण ढाबा मालिकों ने अपने चूल्हे आधे बुझा दिए हैं।
कई होटलों ने अपने मेन्यू कार्ड से आधे से ज्यादा आइटम हटा दिए हैं। अब केवल वही चीजें बन रही हैं जिनमें गैस की खपत कम हो।
इसके अलावा शादियों और पार्टियों का सीजन होने के बावजूद, लोग गैस की कमी के डर से अपने ऑर्डर कैंसिल कर रहे हैं। ढाबा मालिकों का कहना है कि सप्लाई न होने के कारण वे ग्राहकों को मना करने पर मजबूर हैं।
मंडियों में सप्लाई भरपूर, पर खरीदार नदारद
आमतौर पर दिल्ली की आजादपुर या ओखला मंडी में सुबह-सुबह तिल रखने की जगह नहीं होती थी, लेकिन आज वहां का नजारा बदला हुआ है। ऐसे में मंडियों में ट्रक भर-भर के सब्जियां तो आ रही हैं, लेकिन उन्हें खरीदने वाला कोई नहीं है। चूंकि होटल और ढाबों में खाना कम बन रहा है, इसलिए सब्जियों की मांग अचानक गिर गई है।
मांग न होने की वजह से सब्जियों के दाम जमीन पर आ गए हैं। हालत यह है कि सब्जियां मंडियों में रखे-रखे सड़ रही हैं और छोटे विक्रेता दाने-दाने को तरस रहे हैं।
किसान और व्यापारी दोहरी मार झेलने को मजबूर
खेतों में हाड़-तोड़ मेहनत करने वाले किसानों के लिए यह किसी बुरे सपने जैसा है। एक तरफ खाद और बीज की महंगाई, और दूसरी तरफ जब फसल तैयार हुई तो खरीदार ही नहीं मिले। मांग घटने से किसानों को अपनी फसल कौड़ियों के भाव बेचनी पड़ रही है, जिससे उनकी लागत भी नहीं निकल पा रही।
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यह स्थिति से पता चलता है कि आज की दुनिया में हम सब एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। गल्फ की जंग ने न केवल गैस की किल्लत पैदा की है, बल्कि इसने आम आदमी की थाली, किसानों की कमाई और छोटे व्यापारियों की रोजी-रोटी पर भी सीधा हमला किया है। अगर यह तनाव जल्द खत्म नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में आम आदमी की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
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