दिल्ली-NCR में प्रदूषण से त्राहिमाम, 5वीं तक स्कूल online, बच्चे-बुजुर्गों में 90% सांस की बीमारियां बढ़ीं; एक्सपर्ट्स ने दी चेतावनी

Delhi-NCR Air Pollution: दिल्ली में प्रदूषण से हालात बेकाबू हो गए हैं। प्रदूषण की वजह से OPD में आने वाले बच्चों और बुजुर्गों दोनों में स्वास्थ्य संबंधी बीमारियों के मामलों में लगभग 90 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। डॉक्टरों ने इसको लेकर चेतावनी दी है।

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Delhi NCR Pollution
Delhi NCR Pollution | Image: Freepik

Delhi-NCR Pollution: देश की राजधानी इस वक्त प्रदूषण और कोहरे के डबल अटैक का सामना कर रही है। दमघोंटू हवा ने आफत बढ़ाई हुई है। दिल्ली समेत पूरे NCR में प्रदूषण की वजह से इमरजेंसी जैसे हालात हैं। बेकाबू हालात के बीच ग्रैप 4 के तहत पाबंदियां लागू हैं। दिल्ली में पांचवीं तक के स्कूल पूरी तरह से बंद कर दिए गए। इस बीच अस्पताल में सांस की बीमारियों के मरीज भी तेजी से बढ़ रहे हैं, जिसमें ज्यादातर बच्चे और बुजुर्ग शामिल हैं।

हेल्थ एक्सपर्ट्स ने बताया है कि OPD में आने वाले बच्चों और बुजुर्गों दोनों में स्वास्थ्य संबंधी बीमारियों के मामलों में लगभग 90 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और इसका सीधा संबंध जहरीली हवा के लंबे समय तक संपर्क में रहने से है।

दिल्ली में बढ़ रहे सांस की बीमारियों के मरीज

एशियन हॉस्पिटल में श्वसन, गहन देखभाल और नींद चिकित्सा विभाग के निदेशक और प्रमुख डॉ. मानव मनचंदा का कहना है कि दिल्ली का प्रदूषण अब सिर्फ एक पर्यावरणीय समस्या नहीं रह गई है, यह एक साइलेंट पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी बन गई है। हर दिन, हम सांस लेने में समस्या, लगातार खांसी, अस्थमा के दौरे, एलर्जी, आंखों में जलन और यहां तक ​​कि हृदय संबंधी समस्याओं से पीड़ित मरीजों की संख्या में वृद्धि देख रहे हैं, जो सीधे तौर पर खराब वायु गुणवत्ता से जुड़ी हैं।

उनका कहना है कि PM2.5 जैसे महीन कण फेफड़ों में गहराई तक प्रवेश करते हैं और खून में पहुंच जाते हैं, जिससे सांस की बीमारियों, दिल के दौरे, स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।

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मेंटल हेल्थ पर भी पड़ रहा असर

डॉ. मानव मनचंदा ने कहा कि बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और पहले से किसी बीमारी का शिकार लोग इससे सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। प्रदूषित हवा के लंबे समय तक संपर्क में रहने से मेंटल हेल्थ पर भी असर पड़ सकता है। इससे थकान, चिंता और एकाग्रता में कमी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। मास्क पहनना और एयर प्यूरीफायर का उपयोग करना सीमित सुरक्षा प्रदान कर सकता है, लेकिन ये लॉन्ग टर्म समाधान नहीं हैं।

डॉक्टर का कहना है कि प्रदूषण से निपटने के लिए दिल्ली को तत्काल सामूहिक प्रयास, प्रदूषण नियंत्रण नीतियों का कड़ाई से कार्यान्वयन, स्वच्छ परिवहन, निर्माण कार्य से निकलने वाली धूल में कमी और जन जागरूकता की आवश्यकता है। स्वच्छ हवा कोई लग्जरी नहीं है, यह स्वस्थ जीवन के लिए एक मूलभूत आवश्यकता है।

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वहीं, सर गंगाराम अस्पताल के बाल रोग विभाग के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. धीरेन गुप्ता ने कहा कि बच्चों के 90% से ज्यादा केस सांस संबंधी बीमारियों के लिए सामने आ रहे हैं। हमें यह समझना होगा कि बच्चे, बड़ों अलग क्यों होते हैं। कई बच्चे गंभीर अस्थमा की वजह से आ रहे हैं और खासतौर पर वार्ड में, इस बार पिछले कुछ सालों की तुलना में मरीजों की संख्या बढ़ी है। नौबत ये आ गई है कि कुछ को ICU में भर्ती करना पड़ रहा है।

डॉक्टर ने दी ये सलाह

PSRI इंस्टीट्यूट ऑफ पल्मोनरी, क्रिटिकल केयर एंड स्लीप मेडिसिन के अध्यक्ष डॉ. जीसी खिलनानी ने कहा कि इस प्रदूषण से सबसे ज्यादा प्रभावित छोटे बच्चे और बुजुर्ग हैं। जितना संभव हो सके, सभी के लिए घर पर रहना बेहद जरूरी है। अस्थमा या हृदय रोग से पीड़ित लोगों या बुजुर्गों के लिए विशेष सलाह यह है कि वे धुंध छाए रहने पर सुबह-सुबह टहलने न निकलें। अगर वे टहलना ही चाहते हैं, तो उन्हें N95 या N99 मास्क का इस्तेमाल करना चाहिए। हर कोई एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल कर रहा है, लेकिन कुछ सावधानियां बरतनी जरूरी हैं। एयर प्यूरीफायर को हर समय चालू रखना, कमरे को बंद रखना और फिल्टर को समय-समय पर बदलना जरूरी है।

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Published By:
 Ruchi Mehra
पब्लिश्ड