Delhi pollution: दिल्ली-NCR में बेकाबू प्रदूषण पर कब लगेगी लगाम? बेहद खराब श्रेणी में पहुंचा AQI, खुली हवा में सांस लेना हुआ दुभर
दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण से राहत मिलती नजर नहीं आ रही है। AQI बेहद खराब श्रेणी में पहुंच चुका है, जिससे लोगों को सांस लेने में दिक्कत हो रही है। जानें अपने इलाके का ताजा AQI
- भारत
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राजधानी दिल्ली के लोगों को जहरीली हवा से कोई राहत मिलती नजर आ रही है। ग्रैप-3 की पाबंदियां हटाने के बाद हालात बिगड़ते ही जा रहे हैं। हवा की गुणवत्ता में कोई सुधार होता नहीं दिख रहा है। शहर के कई इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक(AQI) सुबह-सुबह 'बेहद खराब' श्रेणी में दर्ज हुआ है। कई इलाकों में वायु प्रदूषण को कम करने के लिए पानी के छिड़काव किए जा रहे हैं, मगर इसका कुछ असर दिक नहीं रहा है।
दिल्ली और इसके आसपास के इलाकों मेंऔसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) ‘बहुत खराब’ श्रेणी में बना हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि हवा की धीमी रफ्तार के असर के कारण प्रदूषण में कमी नहीं आ रही है। मौसम विभाग के अनुसार अगले दो-तीन दिनों थोड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
शहर का AQI 'बहुत खराब' श्रेणी में हुआ दर्ज
शनिवार को भी अक्षरधाम मंदिर के आसपास का इलाका स्मॉग की परत से ढका हुआ है। CPCB के मुताबिक इलाके का AQI 350 है जिसे 'बहुत खराब' श्रेणी में रखा गया है। इंडिया गेट और कर्तव्य पथ के आसपास का इलाके भी हालात ऐसे ही हैं। CPCB के मुताबिक इलाके का AQI 346 है जो 'बहुत खराब' श्रेणी में रखा गया है।
धुंध की परत ने बढ़ाई परेशानी
गाजीपुर इलाके में स्मॉग की परत छाई हुई है। CPCB के मुताबिक इलाके के आस-पास AQI 358 है, जिसे 'बहुत खराब' श्रेणी में रखा गया है। आनंद विहार इलाके में धुंध की परत छाई हुई है। इलाके में AQI 358 है, जिसे 'बहुत खराब' श्रेणी में रखा गया है।
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पाबंदियों के बावजूद राहत नहीं
बता दें कि 11 नवंबर को दिल्ली का AQI 400 के पार चला गया था, जिसके बाद CAQM ने तुरंत GRAP-3 लागू कर दिया था। इन पाबंदियों के बावजूद पिछले दो सप्ताह में प्रदूषण पर कोई खास असर नहीं पड़ा और शहर का AQI ज्यादातर 350-400 के बीच ही बना रहा।
बीते बुधवार को GRAP-3 की पाबंदियां हटा दी थीं। इसमें निर्माण-ध्वस्तीकरण कार्य, गैर-जरूरी सामान की ढुलाई पर लगी रोक और BS-3 पेट्रोल व BS-4 डीजल वाहनों पर प्रतिबंध शामिल थे। हालांकि पाबंदियां हटते ही प्रदूषण स्तर फिर तेजी से बढ़ गया और आम नागरिक एक बार फिर जहरीली हवा की मार झेलने को मजबूर हैं।