VIRAL: आप अपने पार्टनर से बात करते हैं तो... वुमेंस कोच में क्या करती हैं महिलाएं? रोज सफर करने वाली लेडी ने खोल दिया चिट्ठा

दिल्ली मेट्रो के वुमेन्स कोच में सिविक सेंस की कमी को लेकर एक महिला ने पोस्ट किया है, पोस्ट में महिला ने अपील की है कि, यात्रियों से बेहतर व्यवहार करने की जरूरत है।

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Delhi Metro Woman Coach Civic Sense
दिल्ली मेट्रो के वुमेन्स कोच में सिविक सेंस की कमी | Image: @OfficialDMRC

Delhi Metro Woman Coach Civic Sense: दिल्ली मेट्रो की भीड़ का बारे में तो सभी को पता ही है, लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल एक पोस्ट ने दिल्ली मेट्रो के वुमेन्स कोच में सिविक सेंस को लेकर नई बहस छेड़ दी है। भारत में सार्वजनिक जगहों पर अक्सर सिविक सेंस को लेकर सवाल उठाए जाते हैं, क्योंकि लोग अपनी धून में इतने मस्त हो जाते हैं कि उन्हें आस-पास के लोगों के बारे में ध्यान ही नहीं रहता है कि, उनकी वजह से किसी को परेशानी हो रही है, फिर चाहे मेट्रो में तेज आवाज में रिल्स देखना हो या किसी के भी मुंह पर छींक मार देना या फिर जबरदस्ती दो लोगों के बीच में बैठने की मांग रख देना, जबकि वहां बैठने के लिए जगह नहीं है तभी भी जबरदस्ती करके दो लोगों के बीच में बैठ जाते हैं।

लेकिन वुमेन्स कोच का जिक्र किया गया तो पता चलता है कि लड़कियों को भी साधारण सी बेसिक चीजों के बारे में समझ बढ़ाने की जरूरत है। जानते हैं क्या पोस्ट है और क्यों वुमेन्स कोच में सिविक सेंस की कमी देखी जा रही है।

बिना मास्क के छींकना, धक्का देना...

एक पोस्ट में महिला ने वुमेन्स कोच में सिविक सेंस की कमी को लेकर अपना एक्सपीरियंस शेयर किया। महिला ने अपनी पोस्ट में लिखा कि कैसे कुछ यात्री बिना मास्क पहने छींकते हैं, धक्का देते हैं और फोन पर जोर से निजी बातें करते हैं।

वायरल पोस्ट के महिला ने क्या लिखा?

  • महिला ने लिखा है कि, वह ज्यादातर लेडिज कोच में सफर करती है। जब वह बीमार होती है तो मास्क पहनती है, लेकिन कुछ महिला यात्री इस बात की परवाह नहीं करते हैं। वो किसी की तरफ भी मुंह करके छींक देती हैं। उन्हें हैंकी या फिर टिशू पेपर रखना चाहिए।
  • महिला धक्का देने को लेकर भी चिंतित नजर आई और कहती है कि अगर आप लेट हैं तो यह आपकी गलती है। महिला ने यह भी लिखा है कि कुछ यात्री फोन पर जोर से बात करते हैं और पूरी कोच को अपनी निजी बातचीत सुनाते हैं। 
  • इसके अलावा, महिला ने रील्स स्क्रॉल करने और वीडियो देखने के लिए ईयरफोन का इस्तेमाल न करने की समस्या भी उठाई है।
  • महिला ने दिव्यांग व्यक्तियों को सीट देने की भी बात कही है और लिखा है कि कुछ महिलाएं तब तक नहीं उठती जब तक उनसे कहा न जाए।

यह वायरल पोस्ट एक महत्वपूर्ण सामाजिक मुद्दा उठाती है, जो हमारे दैनिक जीवन में सिविक सेंस की कमी को दर्शाता है। यह मुद्दा न सिर्फ दिल्ली मेट्रो में बल्कि सार्वजनिक स्थानों पर भी सिविक सेंस की कमी देखी जाती है।

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रोजाना जीवन में सिविक सेंस जरूरी

वायरल पोस्ट ने दिल्ली मेट्रो के वुमेन्स कोच में सिविक सेंस की कमी को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। इस पोस्ट ने लोगों को अपने व्यवहार पर फिर से सोचने पर प्रेरित किया है। हमें अपने दैनिक जीवन में सिविक सेंस का पालन करने की जरूरत है, ताकि हम सभी के लिए एक सुरक्षित और आरामदायक वातावरण बना सकें।

दिल्ली मेट्रो के वुमेन्स कोच में सिविक सेंस का पालन करना चाहिए। हमें अपने आसपास के लोगों को भी जागरूक करने की आवश्यकता है, ताकि हम सभी मिलकर एक बेहतर समाज बना सकें। 

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Published By:
 Sujeet Kumar
पब्लिश्ड