2 घंटे से दिल्ली मेट्रो में फंसे हैं यात्री, प्लेटफॉर्म पर भी भारी भीड़; कालकाजी मंदिर और बॉटनिकल गार्डन के बीच क्यों आई ये दिक्कत?
आज सुबह दिल्ली मेट्रो की मैजेंटा लाइन जनकपुरी पश्चिम - बॉटनिकल गार्डन पर सफर करने वाले यात्रियों के लिए दिन की शुरुआत काफी तनावपूर्ण रही।
- भारत
- 2 min read

कालिंदी कुंज और बॉटनिकल गार्डन मेट्रो स्टेशनों के बीच तकनीकी खराबी, विशेष रूप से सिग्नलिंग समस्या के कारण ट्रेनों की आवाजाही पर बुरा असर पड़ा।दिल्ली मेट्रो की मैजेंटा लाइन पर आज यात्रियों को उस समय भारी मुसीबत का सामना करना पड़ा, जब सिग्नल में आई तकनीकी खराबी के कारण कालिंदी कुंज और आसपास के स्टेशनों के बीच ट्रेन सेवाएं पूरी तरह ठप हो गईं। सुबह के व्यस्त समय में हुए इस व्यवधान ने हजारों यात्रियों को परेशानी में डाल दिया।
स्टेशनों पर अफरा-तफरी
कालिंदी कुंज और ओखला बर्ड सेंचुरी जैसे स्टेशनों पर यात्रियों की भारी भीड़ जमा हो गई। लोग लगभग दो घंटे से अधिक समय तक प्लेटफार्मों और रुकी हुई ट्रेनों के अंदर फंसे रहे। वहीं कई यात्रियों ने बताया कि मेट्रो की देरी के कारण टिकट की समय सीमा समाप्त हो गई, जिसके बावजूद DMRC यात्रियों से 10 रुपये का अतिरिक्त शुल्क वसूल रहा है।कई यूजर्स ने शिकायत की कि वे एक घंटे से अधिक समय तक बिना किसी जानकारी के ट्रेन के अंदर बंद रहे। यात्रियों ने आरोप लगाया कि स्टेशन पर रियल-टाइम घोषणाएं नहीं की जा रही थीं, जिससे भ्रम की स्थिति बनी रही।
ऑफिस और कॉलेज जाने वाले हुए परेशान
इस देरी का सीधा असर लोगों के काम और पढ़ाई पर पड़ा। कॉलेज जाने वाले छात्र अपनी क्लास छूटने को लेकर परेशान दिखे। वहीं ऑफिस जाने वालों की जरूरी मिटिंग्स मिस हो गई। एक यात्री ने दुखी होकर बताया कि मेट्रो की देरी की वजह से उसकी आगे की शटल ट्रेन भी छूट गई।
सुरक्षा और सिस्टम पर उठे सवाल
यात्रियों ने न केवल देरी बल्कि सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई है। कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि क्या सिग्नल में इस तरह की बार-बार होने वाली खराबी से ट्रेन संचालन में कोई बड़ा खतरा पैदा हो सकता है। लोगों ने DMRC की सर्विस को दयनीय बताते हुए बेहतर संकट प्रबंधन की मांग की है। अभी फिलहाल दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन ने आधिकारिक तौर पर सिग्नलिंग की समस्या को स्वीकार किया है। मेट्रो प्रबंधन का कहना है कि इंजीनियरों की टीम खराबी को ठीक करने में जुटी है। हालांकि, ताजा रिपोर्ट मिलने तक सेवाएं पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाई थीं।