अधिसूचित वन क्षेत्र की सुरक्षा के प्रति प्राधिकारी गंभीर नहीं- दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को कहा कि प्राधिकारी राष्ट्रीय राजधानी में अधिसूचित वन क्षेत्रों की सुरक्षा को लेकर गंभीर नहीं दिखते और उसने दिल्ली पुलिस को ऐसे क्षेत्रों पर निरंतर निगरानी रखने का निर्देश दिया।

  • Facebook Share Icon
  • Twitter Share Icon
  • WhatsApp Share Icon
 
Follow : Google News Icon
Delhi high court
दिल्ली हाईकोर्ट | Image: ANI

दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को कहा कि प्राधिकारी राष्ट्रीय राजधानी में अधिसूचित वन क्षेत्रों की सुरक्षा को लेकर गंभीर नहीं दिखते और उसने दिल्ली पुलिस को ऐसे क्षेत्रों पर निरंतर निगरानी रखने का निर्देश दिया। मुख्य न्यायाधीश डी के उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ ने कहा कि वन क्षेत्रों की चारदीवारी में पाई गई दरारों और अतिक्रमणों की सूचना दिल्ली पुलिस को एक सप्ताह के भीतर गहन सर्वेक्षण या निरीक्षण करने के बाद दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) को देनी चाहिए।

उच्च न्यायालय दिल्ली में खराब वायु गुणवत्ता को लेकर जनहित याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था, जिस पर उसने स्वतः संज्ञान लिया है और सहायता के लिए एक न्यायमित्र नियुक्त किया है। न्यायमित्र एवं वरिष्ठ अधिवक्ता कैलाश वासुदेव ने कहा कि वन क्षेत्रों में कई स्थानों पर चारदीवारी क्षतिग्रस्त हो गई है और उन पर अतिक्रमण किया गया है।

पीठ ने कहा, ‘‘आवेदन में उल्लिखित तथ्य हमें यह कहने के लिए बाध्य करते हैं कि प्राधिकारी, चाहे वह दिल्ली पुलिस हो, दिल्ली विकास प्राधिकरण हो या वन विभाग हो, अधिसूचित वन क्षेत्रों - अरावली जैव विविधता पार्क, संजय वन, दक्षिण-सेंट्रल रिज और वसंत कुंज के निकट नेल्सन मंडेला मार्ग पर शॉपिंग मॉल के पीछे के जंगलों - के संरक्षण के लिए गंभीर नहीं दिखते।’’

अदालत ने वन संरक्षक और रिज प्रबंधन बोर्ड को अगली सुनवायी तक अपनी रिपोर्ट दाखिल करने को कहा। अदालत ने कहा कि रिपोर्ट में वन क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए उठाए गए या भविष्य में उठाए जाने वाले कदमों का विवरण हो।डीडीए के वकील ने कहा कि चारदीवारी के टूटने की सूचना मिलने के बाद मरम्मत कार्य शुरू कर दिया गया है, जो जल्द ही पूरा हो जाएगा।

Advertisement

अदालत ने कहा कि चारदीवारी के जीर्णोद्धार के अलावा पुलिस को क्षेत्र पर निरंतर निगरानी रखने की आवश्यकता है। पीठ ने कहा कि पुलिस द्वारा किए जाने वाले निरीक्षण की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी भी की जानी चाहिए तथा इसकी रिपोर्ट डीडीए को भेजी जानी चाहिए, जो चारदीवारी की मरम्मत और जीर्णोद्धार तथा अतिक्रमण हटाने के लिए आवश्यक कार्रवाई करेगी। डीडीए को सुनवाई की अगली तारीख 14 मई तक अपनी स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने को कहा। 

Published By:
 Nidhi Mudgill
पब्लिश्ड