विदेश से चल रहा था उगाही का बड़ा नेटवर्क, उद्यमियों को बनाते थे निशाना; दिल्ली पुलिस ने 3 आरोपियों को दबोचा

देश में संगठित अपराध का तरीका तेजी से बदल रहा है। आपराधिक गिरोह अब व्हाट्सऐप, VoIP कॉल्स और फर्जी अंतरराष्ट्रीय नंबरों के जरिए कारोबारियों को निशाना बना रहे हैं। इन गिरोहों के मास्टरमाइंड ज्यादातर विदेश में बैठकर रंगदारी का नेटवर्क चला रहे हैं।

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विदेश से चल रहे रंगदारी नेटवर्क का पर्दाफाश, 3 गिरफ्तार
विदेश से चल रहे रंगदारी नेटवर्क का पर्दाफाश, 3 गिरफ्तार | Image: X\Freepik

देश में संगठित अपराध और रंगदारी का तरीका अब पूरी तरह बदल चुका है। पहले जहां अपराधी खुद जाकर या सीधा फोन करके कारोबारियों को धमकाते थे, वहीं अब इसके लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है। आपराधिक गिरोह अब व्हाट्सऐप, इंटरनेट कॉल्स और नकली अंतरराष्ट्रीय नंबरों के जरिए कारोबारियों को निशाना बना रहे हैं। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि इन गिरोहों की डोर विदेश में बैठे मास्टरमाइंड्स के हाथों में है।

10 करोड़ रुपये की रंगदारी का ताजा मामला

हाल ही में रक्षा क्षेत्र की प्रमुख कंपनी 'विजयन त्रिशूल डिफेंस सॉल्यूशंस' के प्रबंध निदेशक साहिल लूथरा से 10 करोड़ की रंगदारी मांगने की घटना सामने आई। साहिल लूथरा को व्हाट्सऐप संदेशों और अंतरराष्ट्रीय नंबरों से डराया-धमकाया गया था।इस मामले में कार्रवाई करते हुए दिल्ली पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। चौंकाने वाली बात यह है कि पकड़े गए लोगों में पंजाब पुलिस का एक पूर्व अधिकारी भी शामिल है, जिसने धमकी में इस्तेमाल किए गए फोन और सिम कार्ड का इंतजाम किया था।

देश-विदेश तक फैले आपराधिक नेटवर्क के तार

यह कोई अकेली घटना नहीं है, बल्कि देश में एक खतरनाक पैटर्न बन चुका है। हाल ही में गुरुग्राम में एक व्यापारी के घर पर हुई गोलीबारी के तार भी विदेश में बैठे गैंगस्टरों से जुड़े मिले हैं। अमेरिका में कानूनी एजेंसियों ने पंजाब पुलिस के एक मौजूदा अधिकारी पर संगठित उगाही नेटवर्क की मदद करने का आरोप लगाया है, जिसका मामला अदालत में है।

धमकियां एन्क्रिप्टेड ऐप्स और फर्जी विदेशी नंबरों से दी जाती

डिजिटल रंगदारी के मामलों की जांच करना बहुत मुश्किल हो गया है। धमकियां एन्क्रिप्टेड ऐप्स और फर्जी विदेशी नंबरों से दी जाती हैं, जिससे लोकेशन ट्रेस करना कठिन होता है। अपराधी, फर्जी सिम, बैंक खाते और मास्टरमाइंड अलग-अलग राज्यों और देशों में फैले होते हैं।

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निशाने पर क्यों हैं बड़े कारोबारी?

सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार डिफेंस , रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे बड़े क्षेत्रों में काम करने वाले कारोबारी अपराधियों के आसान निशाने पर होते हैं। सार्वजनिक तौर पर पहचान होने के कारण इन्हें आसानी से ढूंढा जा सकता है। अपराधियों का मकसद सिर्फ पैसे ऐंठना नहीं, बल्कि खौफ फैलाकर अपना दबदबा बनाना भी होता है।

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Published By:
 Aarya Pandey
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