BIG BREAKING: राजस्थान से बड़ी खबर, जयपुर सीरियल ब्लास्ट मामले में 4 आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा का ऐलान
सजा सुनाते हुए विशेष न्यायाधीश रमेश कुमार जोशी ने चार आतंकवादियों सरवर आजमी, सैफुरहमान, मोहम्मद सैफ और शाहबाज अहमद को दोषी करार दिया।
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Jaipur Bomb Blast: जयपुर बम धमाकों के दोषियों के मामले में कोर्ट ने सुनाया उम्रकैद की सजा का ऐलान। साल 2008 में जयपुर शहर में हुए वो दर्दनाक सीरियल बम धमाके, जिन्होंने न सिर्फ राजस्थान बल्कि पूरे देश को दहला दिया था, अब उनके दोषियों को सजा मिल गई है। जयपुर की विशेष अदालत ने चार आतंकियों को दोषी ठहराते हुए उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई। यह धमाके 13 मई 2008 को हुए थे, जब पूरे जयपुर में 8 जगहों पर एक साथ बम धमाके हुए थे, जिससे शहर में भय का माहौल बन गया था और देशभर में आक्रोश फैल गया था। इस हमले ने एक नई तरह की आतंकवादी गतिविधियों का खुलासा किया था।
सजा सुनाते हुए विशेष न्यायाधीश रमेश कुमार जोशी ने चार आतंकवादियों सरवर आजमी, सैफुरहमान, मोहम्मद सैफ और शाहबाज अहमद को दोषी करार दिया। इन चारों को भारतीय दंड संहिता (IPC) की कई गंभीर धाराओं और यूएपीए एक्ट के तहत दोषी माना गया, जिनमें धारा 120B (साजिश), 121-ए (देशद्रोह), 124-ए (राजद्रोह), 153-ए (समूहों के बीच वैमनस्य फैलाने) और 307 (हत्या का प्रयास) शामिल हैं।
सजा के बावजूद आतंकियों में नहीं दिखा पछतावा
वहीं इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि जब कोर्ट ने इन आतंकियों को सजा सुनाई, तब इनकी आंखों में न तो कोई पछतावा था और न ही कोई डर। सभी आरोपी मुस्कराते हुए कोर्ट से बाहर निकलते दिखाई दिए, जैसे उन्होंने कोई बड़ा अपराध नहीं किया हो। यह देखकर न सिर्फ पीड़ित परिवारों के दिल टूट गए, बल्कि अदालत में मौजूद लोगों को भी हैरान कर दिया।
हनुमान मंदिर के पास मिला था जिंदा बम
इस केस ने उस वक्त सनसनी मचाई थी, जब चांदपोल हनुमान मंदिर के पास एक जिंदा बम बरामद हुआ था, जो इन आतंकियों द्वारा छोड़ा गया था। जिंदा बम का मिलना खुद ही इस बात का सबूत था कि ये आतंकी कितने खतरनाक थे और उनकी साजिश कितनी बड़ी थी। इसके बाद अदालत ने इन आतंकवादियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए उन्हें मौत की सजा सुनाई थी, लेकिन हाई कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया था। अब सुप्रीम कोर्ट में इस सजा की अपील लंबित है, और पूरे मामले में न्याय का अंतिम फैसला अभी आना बाकी है। इस फैसले के साथ यह साबित हो गया है कि आतंकवादियों को देश की अदालतों से सख्त सजा मिलेगी, लेकिन इस मामले के अंतिम फैसले की राह अभी भी लंबी है। सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार की अपील पर जब तक फैसला नहीं आता, तब तक इन आतंकवादियों के भविष्य पर तलवार लटकती रहेगी।