Domestic Violence: देहरादून में विवाहिता को किया टॉर्चर, 10 महीने कमरे में रखा कैद; जुड़वां बच्चों से भी किया अलग, शिकायत में चौंकाने वाले खुलासे

देहरादून में एक विवाहिता को 10 महीने तक कमरे में कैद रखा गया। उसके बच्चों से अलग किया और उससे दहेज लाने की मांग की जाती थी। इतना ही नहीं महिला के साथ मारपीट भी की जाती थी। मामला तब और बढ़ गया जब पीड़िता तो पता चला कि उसके पति का पहले तलाक हो चुका है। जानें क्या है पूरा मामला? पढ़ें पूरी खबर।

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Dehradun Domestic Violence: देहरादून के सेलाकुई में महिला के साथ हुए अमानवीय व्यवहार करने का मामला सामने आया है। पीड़िता के परिवार का आरोप है कि ससुराल वालों ने उसे लगभग 10 महीने तक एक कमरे और जुड़े शौचालय में बंद रखकर यातनाएं दीं। पीड़िता की मां ने बताया कि बेटी को पर्याप्त खाना तक नहीं दिया जाता था। कई बार सिर्फ कच्चे चावल, नमक, प्याज और हरी मिर्च देकर भूखा रखा जाता था। लगातार मारपीट की जाती थी और उसके जुड़वां बच्चों को भी उससे छीन लिया गया।

पीड़िता ने खुद पुलिस को बताया कि शादी के कुछ समय बाद से ही प्रताड़ना शुरू हो गई थी। ससुराल वाले लगातार दबाव डालते थे कि बच्चा पैदा नहीं कर रही हो। कहा जाता था कि अगर बच्चे नहीं हुए तो राहुल दूसरी शादी कर लेगा। जुड़वां बच्चों के जन्म के बाद भी स्थिति नहीं सुधरी। अस्पताल से घर लाते ही बच्चों को मां से अलग कर दिया गया। फोन छीन लिया गया और परिवार से मिलने भी नहीं दिया गया।उसने आरोप लगाया कि घर की कोई भी चीज झाड़ू, वाइपर, सरिया, बाल्टी या जूते-चप्पल - मारने के लिए इस्तेमाल की जाती थी। उसके शरीर पर अब भी चोटों के निशान हैं। पीड़िता ने कहा- 'मुझे लगता था कि मैं इसी कमरे में मर जाऊंगी।'

पति का पहले भी 2025 में हो चुका है तलाक

मामले में सबसे बड़ा खुलासा यह है कि पीड़िता के पति राहुल खंडूड़ी की पहले भी शादी हो चुकी थी। परिवार का आरोप है कि इस जानकारी को जानबूझकर छिपाया गया। राहुल की पहली पत्नी के पिता ने संपर्क कर बताया कि उनकी बेटी भी इसी तरह की प्रताड़ना झेल चुकी थी और 2025 में तलाक हो गया था।

दहेज की मांग नहीं होती थी बंद  

देहरादून के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेन्द्र डोभाल ने कहा कि मामले में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। मेडिकल रिपोर्ट, घटनास्थल और सभी पक्षों के बयान के आधार पर गहन जांच चल रही है। जांच पूरी होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। ये मामला घरेलू हिंसा से आगे जाकर महिला की गरिमा और मानवाधिकारों के उल्लंघन का गंभीर उदाहरण है। परिजनों ने ये भी आरोप लगाया कि, जुड़वां बच्चों के जन्म के बाद भी दहेज की मांग बंद नहीं हुई। परिवार का दावा है कि बच्चों के लिए सोने की चेन लाने का दबाव बनाया जाता था और मांग पूरी न होने पर प्रताड़ना और बढ़ जाती थी। 

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Published By:
 Nidhi Mudgill
पब्लिश्ड