कंबोडिया से भारत में 100 करोड़ का साइबर फ्रॉड, 23 लाख नंबरों की हुई जांच, 36,000 में से 5,300 सिम का कंबोडिया में गलत इस्तेमाल

ED ने खुलासा किया कि कंबोडिया से 36,000 भारतीय सिम कार्ड चलाए जा रहे थे। इनमें से 5,300 सिम कार्डों से भारत में 100 करोड़ रुपये से ज्यादा की साइबर ठगी हुई। जोधपुर पुलिस की शिकायत पर ED ने अजमेर, जोधपुर, नागपुर और लुधियाना में छापेमारी की है।

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Cambodians commit cyber fraud worth 100 crore in India 36,000 Indian SIM cards misused
सांकेतिक फोटो | Image: Grok

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बड़ी साइबर ठगी का खुलासा किया है। जांच में पता चला है कि 36,000 भारतीय सिम कार्ड कंबोडिया से चलाए जा रहे थे। इनमें से 5,300 सिम कार्ड भारत में 100 करोड़ रुपये से ज्यादा की साइबर ठगी में सीधे इस्तेमाल हुए।

यह बड़ा साइबर धोखाधड़ी का मामला तब सामने आया जब ED ने जोधपुर के साइबर पुलिस स्टेशन के डीसीपी (क्राइम) द्वारा कुछ प्वाइंट ऑफ सेल (POS) विक्रेताओं के खिलाफ सिम कार्ड के दुरुपयोग के संबंध में दर्ज की गई FIR के आधार पर जांच शुरू की।

कैसे हुई यह ठगी?

जोधपुर के साइबर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज हुई थी। उस शिकायत के आधार पर ED ने जांच शुरू की। पता चला कि मोबाइल दुकानों के कुछ विक्रेता (POS वेंडर) गलत तरीके से भारतीय मोबाइल नंबर सक्रिय कर रहे थे।

ये नंबर मलेशियाई लोगों को बेच दिए जाते थे। फिर वे लोग कंबोडिया से बैठकर इन सिम कार्डों से भारत के अलग-अलग राज्यों में WhatsApp कॉल करके लोगों को ठगते थे।

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सिम पोर्टिंग बना बहाना

ये जालसाज कम पढ़े-लिखे और सीधे-सादे लोगों को नया सिम या पोर्टिंग का बहाना बनाकर अपना शिकार बनाते थे। एक सिम के नाम पर वे अतिरिक्त सिम भी चुपके से सक्रिय कर देते थे और उन्हें मलेशियाई लोगों को कमिशन लेकर बेच देते थे।

मुख्य आरोपी कौन?

ED के अनुसार मुख्य आरोपी राहुल कुमार झा है। उसके साथ मोहम्मद शरीफ और संदीप भट्ट भी शामिल थे। इसके अलावा सिम विक्रेता प्रकाश भील, रामावतार राठी, हरिश मलाकर और हेमंत पंवार भी इस घोटाले में शामिल थे। ये लोग Airtel, Jio और Vi के POS ID का गलत इस्तेमाल कर सिम सक्रिय करते थे।

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ED ने क्या कार्रवाई की?

ED की जयपुर जोनल टीम ने राजस्थान के अजमेर (किशनगढ़), जोधपुर, महाराष्ट्र के नागपुर और पंजाब के लुधियाना में 7 जगहों पर छापेमारी की। छापेमारी में 30 बैंक खाते, कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और सामान जब्त किया गया और आरोपी लोगों की चल और अचल संपत्ति का पता चला। इस मामले में ED ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत यह कार्रवाई की है।

23 लाख नंबरों की जांच

ED ने अपने बयान में जानकारी देते हुए बताया कि 23 लाख नंबरों की जांच से पता चला कि कंबोडिया में लगभग 36,000 सिम कार्ड सक्रिय थे , जिनमें से लगभग 5,300 भारत भर में सैकड़ों करोड़ रुपये के साइबर धोखाधड़ी के मामलों को अंजाम देने में शामिल थे।

यह घोटाला दिखाता है कि साइबर अपराधी अब विदेशों से बैठकर भारतीयों को आसानी से ठग रहे हैं। ED की जांच अभी जारी है और आगे और खुलासे हो सकते हैं।

क्या सावधानी बरतें

सावधानी और जागरूकता से साइबर ठगी का शिकार होने से बचा जा सकता है। कभी भी अनजान नंबर से WhatsApp कॉल पर पैसे, OTP या कोई जानकारी न दें। शक हो तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें।

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Published By:
 Sagar Singh
पब्लिश्ड