COVID-19: कोरोना ने फिर फैलाया फन, सिंगापुर में एक सप्ताह में नए केस 25000 के पार, थाईलैंड में बिगड़े हालात; भारत में कितना खतरा?

COVID-19: कोरोना एक बार फिर पैर पसारने लगा है, एशिया के कई देशों में लगातार कोविड -19 के मामले बढ़ रहे हैं, जिसने दुनिया भर में चिंता बढ़ा दी है। हांगकांग, थाईलैंड और सिंगापुर में तेजी से बढ़ते नए मामलों ने लोगों की चिंता बढ़ा ही है। सिंगापुर में पिछले एक सप्ताह में 25 हजार से ज्यादा नए केस आए हैं।

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COVID New cases
COVID New cases | Image: ANI (File)

COVID-19: कोरोना एक बार फिर पैर पसारने लगा है, एशिया के कई देशों में लगातार कोविड -19 के मामले बढ़ रहे हैं, जिसने दुनिया भर में चिंता बढ़ा दी है। हांगकांग, थाईलैंड और सिंगापुर में तेजी से बढ़ते नए मामलों ने लोगों की चिंता बढ़ा ही है। सिंगापुर में पिछले एक सप्ताह में 25 हजार से ज्यादा नए केस आए हैं। कोरोना का असर एशिया के कई देशों में देखने को मिल रहा है, जिससे भारत भी अछूता नहीं हैं। भारत में भी नए मामलों को लेकर विशेषज्ञ चिंता जता चुके हैं।

हांगकांग, सिंगापुर और थाईलैंड सहित विभिन्न एशियाई देशों में स्वास्थ्य अधिकारियों की तरफ से कोविड-19 की नई लहर को लेकर पहले ही अलर्ट जारी कर दिया गया है। भारत में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) ने सोमवार को आयोजित एक समीक्षा के दौरान कहा कि भारत में वर्तमान स्थिति नियंत्रण में है, 19 मई तक कोरोना के केवल 257 सक्रिय मामले सामने आए हैं।

भारत में स्थिति नियंत्रित लेकिन सावधानी की जरूरत

भारत में अभी स्थिति नियंत्रण में है और ज्यादा संख्या में नए केस नहीं आ रहे हैं लेकिन अगर लापरवाही बरती गई तो हालत बिगड़ भी सकते हैं। जरुरत है समय रहने आवश्यक उपायों को अपनाया जाए और इसे अभी रोका जाए। लोगों को जागरुक कर उन्हीं उपायों को अपनाने की जरूरत है जो कोरोना के समय अपनाए गए थे। जैसे- हाथों की सफाई, सैनेटाइजर का प्रयोग, जुकाम या बुखार होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क।

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ANI

क्या है कोविड 19 का JN.1 वैरिएंट?

कोरोना के नए केस JN.1वैरियंट के सामने आ रहे हैं। JN.1 वैरिएंट की पहचान पहली बार अगस्त 2023 में पहचान की गई थी। कोविड का ये नया वैरिएंट ओमिक्रॉन के BA.2.86 से विकसित हुआ है, जिसमें 30 म्यूटेशन हुए हैं। गले में खराश, बुखार, सूखी खांसी, मतली और उल्टी कुछ सामान्य लक्षण हैं जो JN.1 से संक्रमित रोगियों में आम तौर पर दिखाई देते हैं।

नवंबर 2023 से मार्च 2024 तक, JN.1 के ट्रांसमिशन में वृद्धि देखने को मिली है। पैक्सलोविड, वेक्लरी और लैगेवरियो सहित पहले से स्वीकृत एंटीवायरल, जेएन के खिलाफ प्रभावशीलता प्रदर्शित करते हैं। इस वैरिएंट को फैलने से रोकने के लिए, NIH इस बात पर जोर देता है कि जीनोमिक आकलन, अपशिष्ट जल निगरानी और डिजिटल ट्रैकिंग जैसे निगरानी प्रयास आवश्यक हैं। मुंबई में  JN.1 वैरिएंट के 53 नए मामले सामने आए हैं।

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Published By:
 Deepak Gupta
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