कफ सिरप मामले में एक्शन की तैयारी में केंद्र, इमरजेंसी बैठक के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव बोलीं- रद्द करो लाइसेंस

Cough Syrup Death Case: केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने राज्यों से अपील की है कि वे जन जागरूकता अभियान चलाकर आम जनता को बच्चों में खांसी के सामान्य लक्षणों और इलाज के प्रति जागरूक करें। इससे यह होगा कि बिना जरूरत दवाओं के देने की आदत को रोका जा सकेगा।

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Cough Syrup Death Case
केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिल श्रीवास्तव | Image: Ministry of Health/X/Canva

Cough Syrup Death Case: मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में कोल्ड्रिफ कप सिरप पीने से अब तक 16 बच्चों की मौत हो चुकी है। बच्चों की मौत पर प्रदेश के सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा था कि जांच रिपोर्ट आने पर मध्य प्रदेश में इस सिरप की बिक्री को पूर्णता प्रतिबंधित कर दिया गया है। प्रदेश में अभियान के तौर पर छापामारी कर कोल्ड्रिफ सिरप को जब्त किया जा रहा है।

वहीं, कफ सिरप पीने से बच्चों की हुई मौत पर केंद्र सरकार एक्शन में दिख रही है। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिल श्रीवास्तव ने आज सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के अधिकारियों साथ एक हाई लेवल मीटिंग/इमरजेंसी मीटिंग (वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए) की। इस दौरान उन्होंने इस मामले में सख्त कार्रवाई की भी बात कही है।

गुणवत्ता मानकों का करें पालन नहीं तो लाइसेंस होंगे रद्द - केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव

मिली जानकारी के अनुसार, बैठक के दौरान केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिल श्रीवास्तव ने आदेश दिए कि सभी दवा निर्माता कंपनियां संशोधित Schedule M के तहत तय गुणवत्ता मानकों का सख्ती से पालन करें। अगर वे ऐसा नहीं करती हैं तो उनके लाइसेंस रद्द किए जाएंगे।  


जागरूकता अभियान चलाने की अपील

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि बच्चों में खांसी अधिकतर मामूली होती है और अपने आप ठीक भी हो जाती है। इसलिए कफ सिरप का इस्तेमाल ध्यान से सोच-समझकर करें। उन्होंने राज्यों से अपील की है कि वे जन जागरूकता अभियान चलाकर आम जनता को बच्चों में खांसी के सामान्य लक्षणों और इलाज के प्रति जागरूक करें। इससे यह होगा कि बिना जरूरत दवाओं के देने की आदत को रोका जा सकेगा।  

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बैठक में राज्यों से कफ सिरप का तर्कसंगत उपयोग सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया, विशेष रूप से बच्चों के बीच, क्योंकि अधिकांश खांसी स्वतः ठीक हो जाती है और इसके लिए औषधीय उपचार की आवश्यकता नहीं होती है। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सलाह दी गई कि वे बढ़ी हुई निगरानी सुनिश्चित करें, सभी स्वास्थ्य सुविधाओं द्वारा समय पर रिपोर्टिंग करें, आईडीएसपी-आईएचआईपी के सामुदायिक रिपोर्टिंग टूल का व्यापक प्रसार करें, और शीघ्र रिपोर्टिंग और संयुक्त कार्रवाई के लिए अंतर-राज्यीय समन्वय को मजबूत करें।
 

जांच में पाई गई थी 48.6% डाइएथिलीन ग्लाइकॉल की मात्रा

बता दें कि मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा की घटना के बाद आई लैब रिपोर्ट में प्रयोगशाला में एक खतरनाक पदार्थ की उच्च सांद्रता दिखाई दी थी। तमिलनाडु के औषधि नियंत्रक, द्वारा कोल्ड्रिफ सिरप को “नॉट ऑफ स्टैण्डर्ड क्वालिटी(एनएसक्यू)” घोषित किया गया है। शासकीय औषधि विश्लेषक, औषधि परीक्षण प्रयोगशाला, चेन्नई के परीक्षण अनुसार इस सिरप में डाइएथिलीन ग्लाइकॉल की मात्रा पाई गई 48.6% पाई गई थी, जो एक जहरीला तत्व है और स्वास्थ्य के लिए गंभीर रूप से हानिकारक है। 

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Published By:
 Amit Dubey
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