रेत पर होगा 144 साल बाद अगला महाकुंभ, सूख जाएगी गंगा-यमुना! सोनम वांगचुक ने PM मोदी को खत लिख ऐसा क्यों कहा?

सोनम वांगचुक ने कहा कि हिमालय के ग्लेशियर बहुत तेजी से खिसक रहे हैं। कुछ दशकों में गंगा, ब्रह्मपुत्र और सिंधु जैसी पवित्र नदियां मौसमी नदी बन सकती हैं।

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Climate activist Sonam Wangchuk letter to pm modi
रेत पर होगा 144 बाद अगला महाकुंभ- सोनम वांगचुक | Image: X/Wangchuk66

Sonam Wangchuk : हिमालय में ग्लेशियरों के संरक्षण पर काम कर रहे जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने प्रधानमंत्री नेरंद्र मोदी को एक पत्र लिखा है। इस खत में उन्होंने चिंता जताई है कि अगर हिमालय में ग्लेशियरों का पिघलना और वनों की कटाई ऐसी ही जारी रही, तो कुछ दशकों में गंगा और यमुना जैसी पवित्र नदियां मौसमी नदियां बन सकती हैं। सोनम वांगचुक ने यहां तक कहा कि 144 साल बाद अगला महाकुंभ नदी के रेतीले अवशेषों पर मनाना पड़ सकता है।

सोनम वांगचुक ने अपनी अमेरिका की यात्रा से लौटने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यह पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने कहा है कि भारत को इस मुद्दे को सुलझाने की दिशा में आगे आना चाहिए। हिमालय में स्थिति की गंभीरता की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए वांगचुक ने कहा कि यदि इन ग्लेशियरों को बहाल करने के लिए कदम नहीं उठाए गए, जो हमारी बारहमासी नदियों का स्रोत हैं, तो 144 सालों के बाद अगला महाकुंभ संभवत: रेत पर आयोजित करना होगा, क्योंकि नदियां सूख सकती हैं।

'रेत पर होगा अगला महाकुंभ'

दिल्ली में पत्रकारों से बात करते हुए सोनम वांगचुक ने कहा कि हिमालय के ग्लेशियर बहुत तेजी से खिसक रहे हैं। अगर वनों की कटाई वर्तमान दरों पर जारी रहती है, तो कुछ दशकों में गंगा, ब्रह्मपुत्र और सिंधु जैसी पवित्र नदियां मौसमी नदी बन सकती हैं। इसका मतलब यह भी हो सकता है कि अगला महाकुंभ पवित्र नदी के रेतीले अवशेषों पर ही हो सकता है।

ग्लेशियरों के लिए आयोग गठन की मांग

उन्होंने कहा कि हिमालय में हिमनदों के पिघलने को धीमा करने के लिए सब कुछ करने की गंभीर आवश्यकता है। वांगचुक ने पीएम मोदी को लिखे खत में अपील की है कि आपके नेतृत्व में भारत को हिमालय में सबसे अधिक ग्लेशियरों वाले देश के रूप में स्वीकार किया जाए और सरकार ग्लेशियरों के संरक्षण के लिए तत्परता से काम करे। इसकी शुरुआत हिमालय के ग्लेशियरों के लिए एक आयोग की स्थापना से हो सकती है। 

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अमेरिका गए थे बर्फ का टुकड़ा

ग्लेशियरों के संरक्षण पर काम कर रहे वांगचुक, खारदुंगला के एक ग्लेशियर से बर्फ का एक टुकड़ा (7 किलोग्राम का ब्लॉक) लेकर लद्दाख से दिल्ली और फिर अमेरिका गए थे। खारदुंग ला दर्रा लद्दाख के लेह जिले में स्थिति हिमालय का एक पहाड़ी दर्रा है। बर्फ को इन्सुलेशन के लिए लद्दाख की प्रतिष्ठित पश्मीना ऊन में लपेटे गए एक कंटेनर में रखा गया था। 

बर्फ को दिल्ली स्थित संयुक्त राष्ट्र कार्यालय ले जाया गया। इसके बाद वह अमेरिका के लिए रवाना हुए, जहां से यह हार्वर्ड केनेडी स्कूल, एमआईटी, बोस्टन और न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय तक ले जाई गई। उसके बाद 21 फरवरी को न्यूयॉर्क में हडसन नदी और ईस्ट रिवर के संगम पर इसे विसर्जित किया गया। यह विश्व ग्लेशियर दिवस से एक महीने पहले हुआ है जो 21 मार्च को मनाया जाएगा। संयुक्त राष्ट्र (UN) ने 2025 को ग्लेशियरों के संरक्षण का अंतरराष्ट्रीय वर्ष घोषित किया है।

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Published By:
 Sagar Singh
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