अपडेटेड 27 January 2026 at 20:12 IST
Chanakya Niti: दुश्मन आपसे तेज-बलवान है और कर रहा खूब परेशान? तो उससे छुटकारा पाने के लिए चाणक्य की ये नीति होगी कारगर
Chanakya Niti: चाणक्य नीति के एक श्लोक से दुश्मन से निपटने का सही तरीका पता चलता है। चाणक्य ने खुद से ज्यादा ताकतवर दुश्मन, दुर्जन और बराबरी वाले दुश्मन को अलग-अलग तरीके से हैंडल करने की टिप्स दी है। जानें दुश्मन से कैसे छुटकारा पाएं?
- भारत
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Chanakya Niti: चाणक्य नीति के इस श्लोक से जानें दुश्मन से निपटने का सही तरीका। बलवान, दुर्जन या बराबरी के शत्रु से कैसे पाएं छुटकारा? व्यावहारिक सलाह। हमारे जीवन में कई बार कुछ ऐसे लोग होते हैं जो ना चाहते भी हमारे दुश्मन बन जाते हैं और मौका आने पर हमें बार बार परेशान करने की कोशिश करते हैं। चाहे ऑफिस में बॉस हो, पड़ोस में कोई झगड़ालू इंसान या फिर दोस्त ही कई बार हमारा दुश्मन बन बैठता है।
आचार्य चाणक्य ने अपनी नीति में दुश्मनों से निपटने का व्यावहारिक और बुद्धिमान तरीका बताया है। चाणक्य नीति का एक प्रसिद्ध श्लोक आज भी काफी फेमस है, जो बताता है कि दुश्मन की ताकत और स्वभाव के अनुसार रणनीति बदलनी चाहिए।
दुश्मन से निपटने के लिए चाणक्य नीति
" अनुलोमेन बलिनं प्रतिलोमेन दुर्जनम्।
आत्मतुल्यबलं शत्रुं विनयेन बलेन वा।।"
इस श्लोक मतलब है, बलवान (ताकतवर) दुश्मन से अनुलोम (सहयोग या अनुकूल) व्यवहार करें।
दुर्जन (चालबाज, छोटे-मोटे) दुश्मन से प्रतिलोम (उल्टा, कठोर) व्यवहार करें।
जो दुश्मन आपकी बराबरी का हो, उसे पहले विनम्रता (शांति) से, न माने तो बल से हराएं।
बलवान दुश्मन से सीधा टकराव न करें
अगर दुश्मन आपसे ज्यादा ताकतवर है जैसे कोई प्रभावशाली व्यक्ति, बड़ा अधिकारी या आर्थिक रूप से मजबूत, तो सीधा मुकाबला करना नुकसानदेह हो सकता है। चाणक्य कहते हैं कि ऐसे में उसके साथ बहते पानी की तरह चलें। उसकी बात मानने का दिखावा करें, उसकी कमजोरियां ढूंढें और चुपचाप अपनी स्थिति मजबूत करें। समय आने पर रणनीति से काम लें।
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छोटे-मोटे चालबाजों पर समय बर्बाद न करें
दुर्जन यानी ईर्ष्यालु, पीठ पीछे बात करने वाले या छोटे-मोटे चालाक लोग। इनसे सीधे बहस करना बेकार है। चाणक्य सलाह देते हैं कि इनकी चालाकी से भी ज्यादा चालाकी दिखाएं। उनकी हरकतों को अनदेखा करें, उनकी बातों पर ध्यान न दें और अपनी ऊर्जा इन पर बर्बाद न करें। अक्सर इग्नोर करने से ही ऐसे लोग खुद पीछे हट जाते हैं।
जरूरत पड़े तो बल का प्रयोग करें
जब दुश्मन आपकी बराबरी का हो, न ज्यादा मजबूत, न कमजोर, तो पहले विनम्रता से बात करें। समझाने, समझौते या बातचीत से समस्या सुलझाने की कोशिश करें। अगर वह नहीं मानता, तो फिर जरूरी कदम उठाएं। चाणक्य कहते हैं कि शांति पहला ऑप्शन होना चाहिए, क्योंकि युद्ध या टकराव आखिरी रास्ता है।
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दश्मन का समझदारी से सामना करें
चाणक्य नीति से दुश्मन की कमजोरियां जानें और अपनी ताकत बढ़ाएं। अपनी योजनाएं गुप्त रखें, किसी को न बताएं। शांत रहें, गुस्से में कोई फैसला न लें। जरूरत पड़ने पर कानूनी, सामाजिक या परिवार की मदद लें और सबसे जरूरी अपनी ऊर्जा और समय दुश्मन पर बर्बाद न करें। अपने विकास और मेहनत पर फोकस करें।
यह श्लोक हमें सिखाता है कि हर दुश्मन अलग होता है, इसलिए रणनीति भी अलग होनी चाहिए। अनुलोम, प्रतिलोम और विनय-बल इन तीनों में से सही तरीका चुनकर जीवन में आगे बढ़ा जा सकता है। आज के समय में ऑफिस पॉलिटिक्स, रिश्तों या सामाजिक मुद्दों में भी यह नीति बहुत काम आती है।
Published By : Sujeet Kumar
पब्लिश्ड 27 January 2026 at 20:12 IST