अपडेटेड 10 March 2025 at 20:04 IST

अप्रैल-जनवरी के दौरान केंद्रीय जीएसटी अधिकारियों ने 1.95 लाख करोड़ रुपये की कर चोरी पकड़ी

सरकार ने सोमवार को लोकसभा में बताया कि केंद्रीय माल एवं सेवा कर (जीएसटी) अधिकारियों ने चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जनवरी अवधि में 25,397 मामलों में 1.95 लाख करोड़ रुपये की कर चोरी का पता लगाया।

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GST Collection in October
GST | Image: Getty Images/iStock Photo

सरकार ने सोमवार को लोकसभा में बताया कि केंद्रीय माल एवं सेवा कर (जीएसटी) अधिकारियों ने चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जनवरी अवधि में 25,397 मामलों में 1.95 लाख करोड़ रुपये की कर चोरी का पता लगाया। सरकार द्वारा लोकसभा में साझा किये गए आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में केंद्र के अधिकारियों द्वारा पकड़ी गई जीएसटी चोरी के मामलों की कुल संख्या 86,711 है और कुल 6.79 लाख करोड़ रुपये से अधिक की जीएसटी चोरी का पता लगाया गया।

चालू वित्त वर्ष (जनवरी 2025 तक) में कर चोरी के कुल 25,397 मामले सामने आए, जिनमें कुल 1,94,938 करोड़ रुपये की कर चोरी किये जाने का पता चला। उक्त अवधि में, कर चोरी मामलों में 21,520 करोड़ रुपये स्वैच्छिक रूप से जमा किया गया।

चालू वित्त वर्ष में आईटीसी (इनपुट टैक्स क्रेडिट) धोखाधड़ी के कुल 13,018 मामले सामने आए, जिनमें 46,472 करोड़ रुपये की राशि शामिल है। वहीं, 2,211 करोड़ रुपये स्वैच्छिक रूप से जमा किये गए। जीएसटी जांच शाखा के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2023-24 में 2.30 लाख करोड़ रुपये के कर चोरी के 20,582 मामले सामने आए।

वर्ष 2022-23 में 1.32 लाख करोड़ रुपये, 2021-22 में 73,238 करोड़ रुपये और 2020-21 में 49,384 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी के मामले सामने आए थे। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा कि केंद्र सरकार और जीएसटीएन (माल एवं सेवा कर नेटवर्क) ने अनुपालन में सुधार और कर चोरी को रोकने के लिए विभिन्न कदम उठाए हैं, जिनमें खुफिया जानकारी उपलब्ध कराना, धोखाधड़ी वाले पंजीकरण और संदिग्ध ई-वे बिल गतिविधि का पता लगाना तथा जांच के लिए रिटर्न का चयन और विभिन्न जोखिम मापदंडों के आधार पर ऑडिट के लिए करदाताओं का चयन करना शामिल है।

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चौधरी ने कहा, ‘‘ये उपाय राजस्व की सुरक्षा और कर चोरी करने वालों को पकड़ने में सहायक हैं। 'प्रोजेक्ट अन्वेषण' (विश्लेषण, सत्यापन, विसंगतियों की सूची बनाना) जैसे कुछ उपाय भी किये गए हैं, जिसके तहत चेहरा पहचान प्रणाली, ई-वे बिल डेटा आदि जैसी नयी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया। इसका उद्देश्य फर्जी/धोखाधड़ी की प्रवृत्ति वाले जीएसटीआईएन (माल एवं सेवा कर पहचान संख्या) को शीघ्र चिह्नित करना और खुफिया रिपोर्ट तैयार करना है।’’

Published By : Nidhi Mudgill

पब्लिश्ड 10 March 2025 at 20:04 IST