अपडेटेड 25 February 2026 at 08:35 IST
'यह प्रोसेस बिहार में शुरू किया गया था, बिना किसी अपील के...', चुनाव आयोग और राज्यों के बीच महामंथन के बाद SIR पर बोले CEC ज्ञानेश कुमार
ECI और राज्य चुनाव कमिश्नरों की नेशनल राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस में SIR पर बोलते हुए, चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार ने कहा कि इसका उद्देश्य हर योग्य मतदाता का नाम वोटर लिस्ट में शामिल करना और अयोग्य मतदाताओं के नाम हटाना है।
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केंद्रीय चुनाव आयोग (ECI) और राज्य चुनाव आयुक्तों की राष्ट्रीय राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस संपन्न हो गई। यह सम्मेलन 27 साल के लंबे इंतजार के बाद भारत मंडपम में आयोजित किया गया था। सम्मेलन के समापन पर नेशनल डिक्लेरेशन 2026 को सर्वसम्मति से अपनाया गया। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की अध्यक्षता में आयोजित इस एक दिवसीय बैठक में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी भी उपस्थित रहे। सम्मलेन में CEC ज्ञानेश कुमार ने मतदाता सूची के सघन पुनरीक्षण (SIR ) को लेकर बड़ी बात कही।
ECI और राज्य चुनाव कमिश्नरों की नेशनल राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस में SIR पर बोलते हुए, चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार ने कहा, "यह प्रोसेस बिहार में शुरू किया गया था। बिना किसी अपील के पूरी तरह से पूरा हुआ। अभी 12 राज्यों में चल रहा है, जिनमें से 11 राज्यों के वोटर रोल पब्लिश हो चुके हैं। उन्होंने यह भी बताया कि आने वाले समय में इसे चरणबद्ध तरीके से पूरे देश में लागू किया जाएगा। चुनाव आयोग ने फिर दोहराया कि SIR का उद्देश्य हर योग्य मतदाता का नाम वोटर लिस्ट में शामिल करना और अयोग्य मतदाताओं के नाम हटाना है।"
SIR पर CEC ज्ञानेश कुमार ने कही बड़ी बात
CEC ज्ञानेश कुमार ने आगे कहा, "यह हॉल मिलकर, हम सभी को मिलकर, हमारे BLAs, AEROs, EROs, DOs और CEOs की मेहनत की सराहना करता है, जिसमें सभी नेशनल और स्टेट पॉलिटिकल पार्टियां, उनके एजेंट, बूथ लेवल एजेंट, डिस्ट्रिक्ट लेवल रिप्रेजेंटेटिव, स्टेट लेवल रिप्रेजेंटेटिव और नेशनल लेवल शामिल हैं... हमने अपने बुलावे पर सभी नेशनल और स्टेट पॉलिटिकल पार्टियों से मिलना शुरू किया। EROs ने सब-डिविजनल लेवल, यानी चुनाव क्षेत्र लेवल पर करीब 4,000 मीटिंग कीं, जिसमें 28,000 पॉलिटिकल पार्टी रिप्रेजेंटेटिव ने हिस्सा लिया। "
शुद्ध मतदाता सूची को लोकतंत्र की नींव-ज्ञानेश कुमार
नेशनल डिक्लेरेशन 2026 में शुद्ध मतदाता सूची को लोकतंत्र की नींव बताते हुए चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता, दक्षता और संस्थागत समन्वय पर जोर दिया गया है। घोषणापत्र में पंचायत एवं नगर निकाय चुनावों से संबंधित कानूनों को विधानसभा एवं संसदीय चुनावों से बेहतर तालमेल में लाने की दिशा में सहमति जताई गई है।यह सम्मेलन मतदाता सूचियों की शुद्धता, चुनावी प्रक्रिया की मजबूती और लोकतंत्र को और सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सम्मेलन 27 साल के लंबे अंतराल के बाद आयोजित किया गया। पिछला बार ऐसा सम्मेलन वर्ष 1999 में आयोजित हुआ था।
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Published By : Rupam Kumari
पब्लिश्ड 25 February 2026 at 08:35 IST