BREAKING: CBSE के चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता पर गिरी गाज, री-इवैल्यूएशन विवाद के बाद सरकार का बड़ा एक्शन

CBSE 'ऑन-स्क्रीन मार्किंग' विवाद को लेकर सरकार ने बड़ा एक्शन लिया है। CBSE के चेयरमैन और सचिव का तबादला कर दिया गया है। (OSM) सेवाओं की खरीद की जांच के लिए एक जांच समिति का गठन भी किया गया।

  • Facebook Share Icon
  • Twitter Share Icon
  • WhatsApp Share Icon
 
Follow : Google News Icon
CBSE Chairman, Secretary Transferred Amid OSM Row
CBSE Chairman, Secretary Transferred Amid OSM Row | Image: X

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) में 'ऑन-स्क्रीन मार्किंग' (OSM) टेंडर प्रक्रिया को लेकर उपजा विवाद अब एक बड़े प्रशासनिक भूचाल में बदल चुका है. पिछले कुछ समय से इस मामले में हो रही बोर्ड की किरकिरी को देखते हुए मोदी सरकार ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। मामले की गंभीरता और पारदर्शिता पर उठते सवालों के बीच सरकार ने तत्काल प्रभाव से एक अभूतपूर्व कार्रवाई की है।

शीर्ष नेतृत्व पर गिरी गाज

इस विवाद के चलते सीबीएसई के चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव (सेक्रेटरी) हिमांशु गुप्ता दोनों को उनके पदों से तुरंत हटा दिया गया है। शिक्षा जगत के इन दो सबसे बड़े अधिकारियों का अचानक तबादला किया जाना बेहद चौंकाने वाला फैसला माना जा रहा है, जिसने पूरे प्रशासनिक महकमे में हलचल मचा दी है।

उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन

सरकार ने केवल अधिकारियों को हटाकर ही इतिश्री नहीं की है, बल्कि इस पूरे खरीद घोटाले की तह तक जाने के लिए एक उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया है। इस एक सदस्यीय समिति की अध्यक्षता क्षमता निर्माण आयोग (Capacity Building Commission) की अध्यक्ष सुश्री एस. राधा चौहान करेंगी।

अध्यक्ष को यह छूट होगी कि वे जरूरत के अनुसार अन्य विभागों के अधिकारियों से मदद ले सकें. समिति को सचिवालयी सहायता भी क्षमता निर्माण आयोग द्वारा ही दी जाएगी। यह कमेटी टेंडर और अलॉटमेंट की सभी खामियों को खंगालेगी और एक महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) को सौंपेगी।

Advertisement

क्या है पूरा विवाद?

यह पूरा मामला सीबीएसई बोर्ड परीक्षाओं की उत्तर पुस्तिकाओं को डिजिटल तरीके से जांचने वाली 'ऑन-स्क्रीन मार्किंग' (OSM) सेवाओं के टेंडर से जुड़ा है। 
दरअसल, इस बार OSM का ठेका हैदराबाद की एक निजी कंपनी 'कोएंप्ट' को दिया गया था।  आरोप है कि इस पूरी खरीद प्रक्रिया और अलॉटमेंट में पारदर्शिता के नियमों को ताक पर रखा गया और भारी गड़बड़ियां की गईं।

लगातार उठते सवालों और विवादों के बाद आखिरकार सरकार को हस्तक्षेप करना पड़ा।  इस सख्त कार्रवाई से सरकार ने साफ संदेश दे दिया है कि देश की सबसे बड़ी परीक्षा संस्था में किसी भी स्तर पर लापरवाही या भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

Advertisement

छात्रों को हुई भारी परेशानी 

बोर्ड ने आधिकारिक तौर पर पुनर्मूल्यांकन (Re-evaluation) और कॉपियों के वेरिफिकेशन के लिए ऑनलाइन पोर्टल तो खोल दिया है, लेकिन शुरुआत से ही यह भारी तकनीकी दिक्कतों और ग्लिच का शिकार है। यह पोर्टल 1 जून को शुरू होना था, जिससे छात्र पूरे दिन परेशान रहे। सीबीएसई ने इस पर कोई त्वरित जवाब नहीं दिया। समय सीमा नजदीक होने के बावजूद, हजारों छात्र फीस भुगतान और फॉर्म सबमिशन के लिए घंटों स्क्रीन के सामने बैठने को मजबूर हैं।

ये भी पढ़ें - CBSE 12वीं क्लास के नतीजों के बाद स्टूडेंट्स परेशान, ऑनलाइन री-इवैल्युएशन पोर्टल में तकनीकी खराबी, OSM के खिलाफ कोर्ट पहुंची NSUI

Published By:
 Aarya Pandey
पब्लिश्ड