पश्चिम एशिया तनाव और दुनिया में ध्रुवीकरण के बीच ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का सफल आयोजन भारत के लिए क्यों अहम? विदेश मंत्री जयशंकर ने समझाया

ब्रिक्स का सफल आयोजन पीएम मोदी और विदेश मंत्री एस जयशंकर के लिए एक बड़ी कूटनीतिक सफलता के तौर पर देखा जा रहा है। विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि ये शिखर सम्मेलन उस समय हुआ जहां दुनिया में इतने सारे तनाव विवाद है और युद्ध भी चल रहा है। इसके बावजूद हम समिट का आउटकम दस्तावेज यानी नई दिल्ली घोषणापत्र 2026 पर आम सहमति बनाने में सफल रहे। ब्रिक्स के आयोजन से पहले लोगों को लग रहा था कि खाड़ी युद्ध पर आम सममति नहीं बन पाएगी।

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ब्रिक्स की सफलता भारत के लिए क्यों अहम?
ब्रिक्स की सफलता भारत के लिए क्यों अहम? | Image: ANI

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 के सफल आयोजन से दुनिया भर में निश्चित रूप से भारत की साख बढ़ी हैं। ये आयोजन ऐसे समय में हुआ है, जब दुनिया में पश्चिम एशिया संकट के कारण भारी उथल पुथल मची है। ईरान अमेरिका युद्ध के कारण दुनिया दो धड़ों में बंटी नजर आ रहा है। ऐसे में भारत की धरती पर रूसी राष्ट्रपति पुतिन, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और पीएम मोदी का एक साथ एक मंच पर हाथ मिलाना दुनिया को कड़ा संदेश देता है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भारत की इस सफलता पर बड़ा बयान दिया है।

एक मंच पर PM मोदी-पुतिन-जिनपिंग की तिकड़ी

नई दिल्ली के भारत मंडपम पर 12 से 13 सितंबर 2026 के बीच दुनिया भर की नजरें टिकी थी। ब्रिक्स के आधारिक आगाज से पहले 11 सितंबर को रूसी राष्ट्रपति पुतिन और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीद द्विपक्षीय वार्ता भी हुई। चीनी राष्ट्रपति के भारत दौरे को लेकर संशय के बीच शी जिनपिंग ने 7 साल बाद भारत की धरती पर कदम रखा। फौरी तौर पर देखें को वर्तमान अस्थिर दुनिया में इन दो दिग्गजों का भारत आना ही अपने आप में बड़ी कूटनीतिक सफलता है।

पीएम मोदी और जयशंकर की कूटनीतिक सफलता

ब्रिक्स का सफल आयोजन पीएम मोदी और विदेश मंत्री एस जयशंकर के लिए एक बड़ी कूटनीतिक सफलता के तौर पर देखा जा रहा है। विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि ये शिखर सम्मेलन उस समय हुआ जहां दुनिया में इतने सारे तनाव विवाद है और युद्ध भी चल रहा है। इसके बावजूद हम समिट का आउटकम दस्तावेज यानी नई दिल्ली घोषणापत्र 2026 पर आम सहमति बनाने में सफल रहे। ब्रिक्स के आयोजन से पहले लोगों को लग रहा था कि खाड़ी युद्ध पर आम सममति नहीं बन पाएगी।

उन्होंने कहा कि भारत की कूटनीति पीएम मोदी के गाइडेंस से ये निकल आया कि हम उस विवाद के बावजूद सर्वसम्मति बना पाएं। अब हमारे आउटकम दस्तावेज में हर सदस्य ने ये मंजूरी दी कि वे चाहते हैं कि पश्चिम एशिया में नागरिक और नागरिक बुनियादी ढांचा उस पर आक्रमण ने हो। सुरक्षा और शांति का लॉन्ग टर्म समझ बने।

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ब्रिक्स के मंच से पहलगाम हमले की निंदा

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि बातचीत ज्यादातर अर्थव्यवस्था, विकास और तकनीक पर हुई। खासकर आतंकवाद पर मजबूत बयान आया। आतंकवाद को BRICS समिट के लिए आपराधिक मानते हैं और उन्होंने पिछले साल जो आतंकवादी घटना हुई उसकी निंदा की। सीमपार आतंकवाद की उन्होंने निंदा की। ये जो समिट था वो जोड़ने का प्रयास था और हम इस प्रयास में सफल रहे। बहुत लोगों को लगा कि हम विवाद के माहौल में हम ये समिट नहीं कर पाएंगे लेकिन हमने करके दिखाया और हम इसलिए कर पाए हैं कि पीएम मोदी का इसमें विजन और नेतृत्व था।

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Published By:
 Sujeet Kumar
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