'दुनिया में मची उथल-पुथल के बीच स्थिर भूमिका निभाएगा BRICS', विदेश मंत्रियों की बैठक में बोले जयशंकर, भारत मंडपम में वैश्विक नेताओं का जमावड़ा
BRICS Summit: यह चौथी बार है जब भारत ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है। भारत इसके पहले 2012, 2016 और 2021 में ब्रिक्स सम्मेलन की अध्यक्षता कर चुका है।
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BRICS foreign ministers meeting: अमेरिका-ईरान युद्ध और दुनियाभर में मची उथल-पुथल के बीच भारत की अध्यक्षता में 'ब्रिक्स' देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक आज (14 मई) नई दिल्ली में शुरू हो गई है। भारत मंडपम में आयोजित बैठक की अध्यक्षता विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने की। इस बैठक के लिए रूस, ईरान, दक्षिण अफ्रीका, इथियोपिया, यूएई के विदेश मंत्री भारत पहुंचे हैं। जयशंकर ने इन सभी का स्वागत किया।
चीन के विदेश मंत्री वांग यी भारत नहीं आ पाए हैं। क्योंकि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप फिलहाल चीन के दौरे पर हैं। ऐसे में इस बैठक में उनकी जगह भारत में चीन के राजदूत जू फेइहोंग (Xu Feihong) प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
जयशंकर ने क्या-क्या कहा?
बैठक में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि अध्यक्ष के तौर पर, मैं हर प्रतिनिधिमंडल को उनकी मौजूदगी के लिए और BRICS के दायरे में सहयोग को मजबूत करने के लिए उनके लगातार समर्पण के लिए धन्यवाद देता हूं। हम सभी द्विपक्षीय और बहुपक्षीय मुलाकातों के जरिए एक-दूसरे के साथ लगातार और करीबी संपर्क में रहते हैं। आज BRICS बैठक के लिए इकट्ठा होना एक खास मौका है। इससे हमें अपने विचार साझा करने का मौका मिलता है और हममें आपसी सहमति बनाने का उत्साह बढ़ता है। इस जटिल और अनिश्चित दुनिया में, इसका महत्व और भी ज्यादा बढ़ जाता है।
BRICS एक रचनात्मक और स्थिर भूमिका निभाएगा- जयशंकर
उन्होंने कहा कि हम ऐसे समय में मिल रहे हैं जब अंतरराष्ट्रीय संबंधों में काफी उथल-पुथल है। चल रहे संघर्ष, आर्थिक अनिश्चितताएं, और व्यापार, टेक्नोलॉजी व जलवायु से जुड़ी चुनौतियां वैश्विक परिदृश्य को आकार दे रही हैं। खास तौर पर उभरते बाजारों और विकासशील देशों से, यह उम्मीद बढ़ रही है कि BRICS एक रचनात्मक और स्थिर भूमिका निभाएगा। हमारी आज की चर्चाएं वैश्विक और क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर विचार करने और हमारे सहयोग को मजबूत करने के व्यावहारिक तरीकों पर सोचने का एक अवसर हैं।
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जयशंकर ने कहा कि विकास के मुद्दे केंद्र में बने हुए हैं। कई देशों को ऊर्जा, भोजन, उर्वरक और स्वास्थ्य सुरक्षा के साथ-साथ वित्त तक पहुंच के मामले में भी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। BRICS उन्हें इन चुनौतियों का अधिक प्रभावी ढंग से सामना करने में मदद कर सकता है। आर्थिक लचीलापन भी महत्वपूर्ण है। विश्वसनीय आपूर्ति श्रृंखलाएं और विविध बाजार इसके अनिवार्य घटक हैं। हमें दोनों पर ध्यान देना चाहिए। जलवायु परिवर्तन एक गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है।
विदेश मंत्री ने बताया कि अब तक, हमने सभी सदस्यों की सक्रिय भागीदारी के साथ 80 से ज्यादा BRICS बैठकें आयोजित की हैं। इन मुलाकातों ने सहयोग को मजबूत किया है और अलग-अलग क्षेत्रों में बातचीत को आगे बढ़ाया है। हम इस गति को और आगे बढ़ाने की उम्मीद करते हैं।
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बता दें कि यह चौथी बार है जब भारत ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है। भारत इसके पहले 2012, 2016 और 2021 में ब्रिक्स सम्मेलन की अध्यक्षता कर चुका है।