वक्फ एक्ट पर सुप्रीम सुनवाई के बीच BJP सांसद भड़के, बोले- 'विपक्ष नहीं चाहता मुस्लिम महिलाएं और पिछड़े मुसलमान पढ़-लिख सकें'

सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ एक्ट पर अगली सुनवाई के लिए तारीख तय कर दी है और सरकार से 7 दिनों के भीतर जवाब मांगा गया है।

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BJP MP Dinesh Sharma
BJP सांसद दिनेश शर्मा/ सुप्रीम कोर्ट | Image: ANI

Supreme Court Waqf Bill controversy: वक्फ एक्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में जारी सुनवाई के बीच BJP सांसद दिनेश शर्मा का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने मामले में अगली सुनवाई के लिए तारीख तय कर दी है और सरकार से 7 दिनों के भीतर जवाब मांगा गया है। (Waqf Bill controversy) दिनेश शर्मा ने कहा कि बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर के संविधान में न्यायपालिका की शक्ति स्पष्ट है और यह बिल न्यायिक समीक्षा के दायरे में पूरी तरह से आता है।

बता दें सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में अगली सुनवाई 5 मई को दोपहर 2 बजे होनी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कानून के खिलाफ दायर 70 से ज्यादा याचिकाओं की जगह सिर्फ 5 याचिकाएं ही दायर की जाएं। (Waqf Bill controversy) उन्हीं पर सुनवाई होगी। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने केंद्र का जवाब आने तक वक्फ घोषित संपत्ति पर यथास्थिति बनाए रखने को कहा। तब तक सरकार को तीन निर्देश मानने होंगे।

सरकार से 7 दिनों के भीतर जवाब मांगा है- दिनेश शर्मा

दिनेश शर्मा ने कहा- सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने सुनवाई के लिए एक और तारीख दी है और सरकार से 7 दिनों के भीतर जवाब मांगा है। (Waqf Bill controversy)  इसके बाद उन्होंने जोर देकर कहा कि ‘यह बिल खास तौर पर पिछड़े मुसलमानों और मुस्लिम महिलाओं के लिए बदलाव की राह खोल सकता है, लेकिन विपक्ष इसे रोकने की कोशिश कर रहा है क्योंकि वह नहीं चाहता कि ये वर्ग शिक्षित हों और आगे बढ़ें।’

दायर याचिका में 3 बड़ी बातें

  • कानून संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 25 (धार्मिक स्वतंत्रता), 26 (Waqf Bill controversy) (धार्मिक मामलों के प्रबंधन की स्वतंत्रता), 29 (अल्पसंख्यक अधिकार), और 300A (संपत्ति का अधिकार) का उल्लंघन करता है।
  • वक्फ बोर्ड में गैर-मुसलमानों को शामिल करना और डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर को वक्फ संपत्ति का फैसला करने का अधिकार देना सरकारी हस्तक्षेप को बढ़ाता है।
  • यह कानून मुस्लिम समुदाय (Waqf Bill controversy) के साथ भेदभाव करता है, क्योंकि अन्य धार्मिक ट्रस्टों पर समान प्रतिबंध नहीं हैं।

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Published By:
 Nidhi Mudgill
पब्लिश्ड