न चर्चा, न बहस... विपक्ष के हंगामे के बीच लोकसभा में पास हुआ जन्म-मृत्यु पंजीकरण बिल 2026, कार्यवाही सोमवार तक स्थगित
जन्म और मृत्यु पंजीकरण संशोधन विधेयक संसद में ध्वनिमत से पारित हो गया। बिल पारित होने के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष के हंगामे पर सख्त ऐतराज जताया और जिम्मेदारी से काम करने की नसीहत दी।
- भारत
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Parliament Monsoon Session: लोकसभा में शुक्रवार (31 जुलाई) को गतिरोध जारी रहा। विपक्ष के भारी हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही नहीं चल पाई। विपक्ष के हंगामे और नारेबाजी के बीच 'जन्म और मृत्यु पंजीकरण संशोधन विधेयक (संशोधन) 2026' को बिना किसी चर्चा के सीधे पारित कर दिया गया। वहीं, लोकसभा की कार्यवाही सोमवार (3 अगस्त) तक के लिए स्थगित हो गई है।
विपक्ष के रवैये पर भड़के किरेन रिजिजू
गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने सदन में इस विधेयक को पेश किया, जिसे विपक्ष के जोरदार हंगामे के बीच ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। बिल पास होते ही संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्षी दलों के रवैये पर सख्त नाराजगी जताई।
किरेन रिजिजू ने कड़े शब्दों में विपक्ष को नसीहत देते हुए कहा कि जनता ने अपने प्रतिनिधियों को क्षेत्रीय समस्याओं और मुद्दों पर चर्चा के लिए संसद भेजा है, न कि बिना वजह शोर-शराबा करने के लिए। उन्होंने भविष्य में ऐसा आचरण न दोहराने की चेतावनी दी।
संसदीय कार्य मंत्री ने विपक्ष के दोहरे रवैये को उजागर करते हुए कहा कि विपक्षी नेता सदन के अंदर तो बहस और चर्चा में भाग नहीं लेते, लेकिन बाहर जाकर मीडिया में झूठा दावा करते हैं कि सरकार बिना चर्चा के बिल पास करा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार हर मुद्दे पर बात करने का पूरा मौका देती है। रिजिजू ने अपील की कि आगामी सत्रों में जब भी महत्वपूर्ण विधेयक लाए जाएं, विपक्ष हंगामा करने के बजाय रचनात्मक सहयोग करें।
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जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र के बदल जाएंगे नियम
देश में जन्म और मृत्यु के रजिस्ट्रेशन की पूरी प्रणाली को आधुनिक और पारदर्शी बनाने के लिए ये बिल लाया गया ह। सरकार का मकसद फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल को पूरी तरह रोकना और रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से सुरक्षित करना है।
इस नए अधिनियम के प्रभावी होने के बाद जन्म प्रमाण पत्र (Birth Certificate) ही कई बड़ी सरकारी सुविधाओं, सेवाओं और आधिकारिक प्रक्रियाओं के लिए मुख्य प्रमाण माना जाएगा। देश भर के जन्म और मृत्यु संबंधी आंकड़ों को एक ही नेशनल डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ दिया जाएगा। इससे पूरे देश का डेटा एक जगह ऑनलाइन उपलब्ध रहेगा।