Tej Pratap Yadav: तेज प्रताप की बढ़ीं मुश्किलें, 'हत्या की कोशिश' का केस दर्ज; अगर आरोप हुए साबित तो जेल में कट सकते हैं 10 साल!
'बिहार बंद' के दौरान हुए बवाल के मामले में तेज प्रताप यादव को बेऊर जेल भेज दिया गया है। उन पर BNS की धारा 109 यानी 'हत्या के प्रयास' का गंभीर केस दर्ज हुआ है। ऐसे में अगर उन पर लगा आरोप अदालत में साबित हो जाता है, तो उन्हें 10 साल तक की सजा हो सकती है।
- भारत
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Tej Pratap Yadav: लालू यादव के बड़े बेटे और जनशक्ति जनता दल (JJD) के प्रमुख तेज प्रताप यादव की मुश्किलें लगातार बढ़ती नजर आ रही हैं। पटना पुलिस ने उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की कई गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया है। इस एफआईआर में सबसे गंभीर धारा 109 जोड़ी गई है, जो हत्या की कोशिश से जुड़ा है। अगर अदालत में यह आरोप साबित हो जाता है तो उन्हें 10 साल तक के जेल की हवा खानी पड़ सकती है। साथ ही जुर्माना भी भरना पड़ सकता है।
जानकारी के मुताबिक, पटना पुलिस ने तेज प्रताप यादव को शनिवार (25 जुलाई) शाम सिटी सेंटर मॉल से हिरासत में लिया था। समर्थकों की भारी भीड़ और सुरक्षा कारणों के कारण पुलिस उन्हें दीघा, दानापुर और नौबतपुर जैसे अलग-अलग थानों में घूमाती रही। इसके बाद देर रात कड़ी सुरक्षा के बीच उन्हें कोर्ट के सामने पेश किया गया, जहां से उन्हें सीधे बेऊर जेल भेज दिया गया।
‘हत्या के प्रयास’ के आरोप में फंसे तेज प्रताप?
अधिवक्ता जगन्नाथ सिंह के अनुसार, तेज प्रताप यादव की गिरफ्तारी 25 तारीख को और एफआईआर 26 तारीख को दर्ज की गई थी। उनका आरोप है कि नौबतपुर थाने में दो एसपी मौजूद थे, इसके बावजूद उन्होंने FIR की कॉपी नहीं सौंपी गई। अदालत में रिहाई की मांग हुई, लेकिन जज ने रिमांड दे दिया। अब आज यानी सोमवार को अदालत में बेल पिटीशन फाइल की जाएगी।
10 साल के लिए जाना पड़ सकता है जेल?
कानूनी जानकारों का मानना है कि तेज प्रताप यादव को फिलहाल जमानत मिलने की संभावना है। लेकिन अगर उन पर लगा 'हत्या के प्रयास' का आरोप अदालत में सिद्ध हो जाता है, तो उन्हें लंबे समय तक जेल की सजा काटनी पड़ सकती है। BNS की धारा 109 के तहत हत्या की कोशिश में दोषी को 10 साल की जेल और जुर्माने की सजा हो सकती है। इसके अलावा अगर हमले में पीड़ित को गंभीर चोट साबित होने की स्थिति में उम्र कैद की सजा सुनाई जा सकती है।
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NEET प्रदर्शन में सड़कों पर उतरे थे
गौरतलब है कि NEET पेपर लीक और प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुई पुलिसिया कार्रवाई के विरोध में ‘बिहार बंद’ बुलाया गया था। इसमें तेज प्रताप यादव सड़कों पर उतरे थे। वे गांधी मैदान के गेट नंबर-10 के पास स्थित प्रतिमा पर चढ़कर प्रदर्शनकारियों की अगुवाई करते दिखे। तेज प्रताप ने कोतवाली और गांधी मैदान थाना क्षेत्रों में आयोजित छात्र संगठनों के विरोध प्रदर्शनों में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प देखने को मिली। उग्र भीड़ ने पथराव किया, जिसमें गांधी मैदान के थानाध्यक्ष अखिलेश मिश्रा और टीओपी प्रभारी प्रमोद कुमार समेत कई पुलिसकर्मी घायल हो गए।
इस पूरे घटनाक्रम और हिंसा के बाद पुलिस ने तेज प्रताप यादव के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। पुलिस ने इस दौरान उन्हें हिरासत में लिया था। हालांकि, बाद में उन्हें छोड़ दिया गया।
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बेऊर जेल भेजे गए JJD प्रमुख
इसके बाद शाम को तेज प्रताप यादव पटना के सिटी सेंटर मॉल में मौजूद थे। वहां पटना पुलिस की एक टीम भारी पुलिस बल के साथ पहुंची और उन्हें गिरफ्तार कर अपने साथ ले गई। शनिवार देर रात ही तेज प्रताप की ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के सामने पेशी हुई, जहां से उनको 14 दिन की न्यायिक हिरासत में बेऊर जेल भेज दिया गया। उन पर पटना में प्रदर्शनकारियों को उकसाने, भड़काने का आरोप है।
गिरफ्तारी के बाद क्या बोले तेज प्रताप?
गिरफ्तारी के बाद तेज प्रताप की पहली प्रतिक्रिया सामने आई, जिसमें उन्होंने कहा कि हम छात्रों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं। जरूरत पड़ी तो मैं छात्रों के अधिकारों के लिए अपनी जान देने को भी तैयार हूं।