Bihar: भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में परिजनों को झटका, फिलहाल सुप्रीम कोर्ट का CBI जांच से इनकार, कहा- हाईकोर्ट जाएं...

सुप्रीम कोर्ट ने बिहार के भोजपुर में हुए भरत भूषण तिवारी पुलिस एनकाउंटर की CBI जांच की मांग वाली PIL खारिज कर दी। न्यायमूर्ति सुंदरेश की पीठ ने याचिकाकर्ता को हाईकोर्ट जाने की सलाह दी।

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Supreme Court dismissed plea for a CBI probe into the Bharat Bhushan Tiwari encounter case in Bihar
भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में परिजनों को झटका | Image: Republic

Bihar News: सुप्रीम कोर्ट ने बिहार के भोजपुर जिले में 28 साल के युवक भरत भूषण तिवारी के पुलिस एनकाउंटर की CBI जांच की मांग वाली जनहित याचिका (PIL) को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है।

सुप्रीम कोर्ट में वकील विशाल तिवारी ने याचिका दाखिल कर भरत भूषण मामले में CBI जांच की मांग की थी। न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ ने याचिकाकर्ता के वकील को सलाह दी कि वे इस मामले में संबंधित हाईकोर्ट का रुख करें।

वकील विशाल तिवारी द्वारा दाखिल याचिका में पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज करने और पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज की अध्यक्षता में स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति गठित कर एक्स्ट्रा-ज्यूडिशियल किलिंग की जांच कराने की मांग की गई थी।

क्या था मामला?

भोजपुर जिले के बिलौती गांव के रहने वाले भरत भूषण तिवारी एक स्थानीय समाजिक कार्यकर्ता थे। वे स्थानीय भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही के खिलाफ सक्रिय रूप से आवाज उठाते थे। खासतौर पर जवानीया गांव में बाढ़ प्रभावित लोगों को सरकारी पुनर्वास न मिलने का मुद्दा उन्होंने जोर-शोर से उठाया था।

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निराशा में तिवारी ने फेसबुक पर कुछ वीडियो पोस्ट किए, जिनमें उन्होंने अवैध हथियार दिखाते हुए स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों को एनकाउंटर करने की धमकी दी थी। 17 जून को हुई मुठभेड़ में तिवारी गोली लगने से घायल हुए और इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। पुलिस का दावा है कि भरत तिवारी ने पुलिस टीम पर 8-10 राउंड फायरिंग की, लेकिन परिवार का कहना है कि भरत ने सरेंडर कर दिया और उसके बाद पुलिस ने उनकी हत्या की है।

पुलिस की ओर फेंकी पिस्तौल

मामले में सबसे बड़ा विवाद एक वीडियो को लेकर है। एनकाउंटर से ठीक पहले का यह वीडियो दिखाता है कि तिवारी खुली जगह पर खड़े होकर कैमरे से बात कर रहे थे और पुलिस की ओर पिस्तौल फेंक रहे थे। परिवार और स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस ने निहत्थे और समर्पण कर चुके व्यक्ति पर गोली चलाई।

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सरकार का एक्शन

इस घटना से बिहार में बड़ा राजनीतिक संकट खड़ा हो गया। जन आक्रोश और विपक्षी दलों के दबाव के बाद बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक सेवानिवृत्त हाईकोर्ट जज की अध्यक्षता में न्यायिक जांच का आदेश दिया। साथ ही चार पुलिस अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया, जिनमें स्थानीय थानाध्यक्ष भी शामिल हैं।

तिवारी के पिता काशीनाथ तिवारी ने न्याय की मांग करते हुए कहा, "पूरी दुनिया ने देखा कि मेरे बेटे को कैसे मारा गया। यहां कुछ भी छुपाने की बात नहीं है। जांच का आदेश दिया गया है, लेकिन नतीजा क्या होगा, किसी को पता नहीं।" सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब यह मामला हाईकोर्ट में जा सकता है। 

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Published By:
 Sagar Singh
पब्लिश्ड