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Updated February 12th, 2024 at 20:40 IST

वो 8 विधायक जिनके जरिए RJD का था सरकार गिराने का प्लान, NDA को लगी भनक और तेजस्वी का ऐसे हुआ 'खेला'

बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व NDA गठबंधन के पास बहुमत का आंकड़ा था। नंबर गेम के हिसाब से 128 विधायक एनडीए के थे।

Reported by: Dalchand Kumar
Nitish Kumar, Tejashwi Yadav
RJD का सरकार गिराने का प्लान हुआ फेल | Image:PTI
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'हम जो कहते हैं, वो करते हैं। खेल तो अब शुरू हुआ है।', ये 28 जनवरी 2024 को दिया राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव का बयान है। यानी ये वो दिन है, जब नीतीश कुमार ने एक ही दिन में दो बड़े फैसले किए। पहला फैसला महागठबंधन सरकार को गिराने का और दूसरे फैसला एनडीए में शामिल होकर नई सरकार बनाने का। उसी समय से तेजस्वी यादव ने ऐलान कर दिया कि वो खेला करके रहेंगे। हालांकि तेजस्वी की ये भविष्यवाणी सच नहीं हो पाई है, क्योंकि बिहार विधानसभा के फ्लोर पर नीतीश कुमार ने अपना बहुमत सिद्ध कर दिया है।

तेजस्वी यादव ने बिहार में 'खेला' करने का प्लान जरूर बनाया होगा, तभी तो उन्होंने खेल करनी की घोषणा की थी। हालांकि तेजस्वी और उनकी पार्टी राजद का नीतीश कुमार की सरकार को गिराने का पूरा प्लान फेल साबित हुआ है। वो कैसे, इसे जरा समझने की कोशिश करते हैं।

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तेजस्वी की 'रिजॉर्ट पॉलिटिक्स'

रिजॉर्ट पॉलिटिक्स खेलते हुए तेजस्वी यादव ने महागठबंधन के विधायकों को पहले की बिहार से बाहर हैदराबाद भेज दिया था। हालांकि 12 फरवरी को फ्लोर टेस्ट से ठीक पहले सभी विधायकों को वापस पटना बुला लिया गया था, वो भी हैवी सिक्योरिटी के बीच। उसके साथ ही बिहार में 'लुका-छिपी' का खेल शुरू हुआ। विपक्ष के पास विधायकों की संख्या बहुमत से महज 8 नंबर कम थी। महागठबंधन के पास कुल विधायक 114 थे, जबकि बिहार विधानसभा में बहुमत साबित करने के लिए 122 विधायक चाहिए होते हैं। ऐसे में जरूरत 8 विधायकों की थी।

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विपक्ष

राजद- 79 विधायक
कांग्रेस- 19 विधायक
लेफ्ट- 16 विधायक
कुल आंकड़ा : 114

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तेजस्वी का 'खेला' वाला बयान भी हर किसी के जहन में जिंदा था, तो आशंकाएं थीं कि राजद अपने पाले में NDA से कुछ विधायकों को तोड़कर ला सकती है। बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व NDA गठबंधन के पास बहुमत का आंकड़ा था। नंबर गेम के हिसाब से 128 विधायक एनडीए के थे।

सत्तापक्ष

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बीजेपी- 78 विधायक
जदयू- 45 विधायक
हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा- 4 विधायक
निर्दलीय विधायक: 1

कुल आंकड़ा : 128

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फ्लोर टेस्ट से पहले की रात

हालांकि एनडीए से कई विधायकों की टूटने की आशंकाएं उस समय बनने लगीं थी, जब सत्ताधारी पक्ष के कई विधायकों के फोन बंद हो गए। इससे बिहार के राजनीतिक हलकों में बहुमत परीक्षण से पहले की अंतिम रात को तेजी से परिस्थितियां बदल गईं। कथित तौर पर सत्तापक्ष के कई विधायक आउट ऑफ कॉन्टैक्ट हो चुके थे। यहां तक कि कई विधायकों के नंबर तक बंद आ रहे थे। ये जानकारियां सब सूत्रों के हवाले से आईं।

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वैसे बीजेपी और जदयू ने भी विश्वास मत से पहले अपने विधायकों को बिहार के अंदर ही दो अलग-अलग होटलों में रखा। हालांकि वहां से निकलने के बाद रविवार को कुछ विधायकों से संपर्क ना होने की खबरें तैरने लगी थीं। इससे राजनीतिक गलियारे में चर्चा होने लगीं कि NDA में सेंधमारी हो गई है। सत्ताधारी खेमे से जिन विधायकों के गायब होने और फोन बंद आने की खबरें थीं, उनमें पहले जदयू के 9 विधायक और बीजेपी के 6 विधायक बताए गए। फिर आंकड़ा बदला और खबरें आईं कि NDA के करीब 8 विधायक संपर्क से बाहर हैं। इन खबरों पर मुहर ऐसे भी लगने लगी थी कि जदयू की विधायक दल की बैठक में ही 4 विधायक नहीं पहुंचे थे।

जब NDA विधायकों ने बढ़ाई नीतीश की धड़कन

बैठक में ना आने वाले विधायकों में बीमा भारती, सुदर्शन, दिलीप राय और रिंकू सिंह थे। सूत्रों ने बताया कि बीमा भारती, सुदर्शन और दिलीप राय के मोबाइल फोन भी बंद थे। इसके अलावा NDA से दो और नाम डॉ संजीव, सुदर्शन कुमार के भी थे। बीजेपी के विधायकों में मिश्रीलाल यादव, भागीरथी देवी और रश्मि वर्मा के गायब होने की सूचना थीं। इसी बीच NDA का हिस्सा जीतन राम मांझी भी संपर्क से बाहर बताए जाने लगे।

राजद की तरफ से NDA विधायकों को तोड़े जाने की आशंकाओं के बीच इधर तेजस्वी यादव ने राजनीतिक सहारा लेते हुए महागठबंधन के नेताओं को अपने आवास पर 'हाउस अरेस्ट' की तरह रख लिया।

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फिर NDA को लगी भनक तो...

अगले दिन नीतीश कुमार को बहुमत साबित करना था, तो रात के अंधेरे में होते 'लुका-छुपी' के खेल को NDA खेमा भांप गया। NDA ने भी अपना काम शुरू कर दिया और इसी बीच खबरें आने लगीं कि राजद के विधायक चेतन आनंद नीतीश कुमार से मिलने के लिए पहुंच गए हैं। फ्लोर टेस्ट से पहली की रात गुजर जाने के बाद सुबह 11 बजे तक कई विधायकों के गायब होने, संपर्क से बाहर होने की चर्चाएं और खबरें चलती रहीं। हालांकि जब विधानसभा के फ्लोर पर बहुमत साबित करने का समय आता तो परिस्थितियां एकदम से नीतीश कुमार और NDA के कंट्रोल में थीं।

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नीतीश कुमार को पहली जीत अवध विहारी चौधरी को विधानसभा स्पीकर पद से हटाते ही मिल गई। स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव जब सदन में लाया गया तो वोटिंग के दौरान 125 विधायकों ने उसका समर्थन किया था, जबकि 112 वोट विरोध में पड़े थे। यहीं से साफ हो गया कि अब नीतीश कुमार फ्लोर टेस्ट में भी पास हो जाएंगे।

बिहार विधानसभा में नीतीश की जीत

कुछ समय बाद बहुमत परीक्षण की घड़ी भी आ गई थी। फ्लोर टेस्ट के दौरान विपक्ष ने वॉकआउट कर दिया था, तो इसलिए नीतीश सरकार के विश्वास प्रस्ताव के विरोध में शून्य वोट ही पड़े। सबसे अहम बहुमत साबित करने का आंकड़ा था, जो 129 पहुंचा था। 129 विधायकों ने नीतीश सरकार के विश्वास प्रस्ताव के पक्ष में वोट किया था और इस तरह से नीतीश कुमार की सरकार ने बहुमत परीक्षण जीत लिया।

अब जरा 129 के आंकड़े को भी समझ लीजिए। सत्ता पक्ष के पास 128 विधायक थे, जिनमें से महेश्वर हजारी सदन चला रहे थे और जदयू विधायक दिलीप राय फ्लोर टेस्ट में शामिल नहीं हुए। इस तरह से सत्ता पक्ष का आंकड़ा घटकर 126 हो गया था। हालांकि राजद से तीन विधायक चेतन आनंद, नीलम देवी और प्रह्लाद यादव ने पाला बदल लिया था, जो नीतीश कुमार के साथ आ गए थे। इस तरह से सदन के अंदर नीतीश कुमार को 129 विधायकों का समर्थन मिला। फिलहाल बिहार में नीतीश कुमार की सरकार ने बहुमत परीक्षण जीत लिया है और सरकार अब चलती रहेगी।

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Published February 12th, 2024 at 19:38 IST

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