पटना के पारस अस्पताल में भारी बवाल; 15 वर्षीय बच्चे की मौत के बाद परिजनों का हंगामा, सड़क जाम और तोड़फोड़; कौन जिम्मेदार?
Patna Paras Hospital: पटना के पारस अस्पताल में 15 वर्षीय बच्चे की मौत के बाद हिंसक प्रदर्शन हुए। गुस्साए परिजनों और स्थानीय लोगों ने अस्पताल परिसर में तोड़फोड़ की और पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की भी की।
- भारत
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Patna Paras Hospital: बिहार की राजधानी पटना से बड़ी खबर सामने आई है। पटना के राजा बाजार स्थित पारस हॉस्पिटल के बाहर जमकर हंगामा हुआ है। इस बीच गुस्साए परिजनों और स्थानीय लोगों ने अस्पताल परिसर में तोड़फोड़ की और पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की भी की।
दरअसल, सोमवार को एक 15 वर्षीय युवक विशाल की मौत के बाद परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा, जिसके बाद अस्पताल में परिजनों ने तोड़फोड़ की और सड़क पर शव रखकर प्रदर्शन किया।
मृत युवक के परिजनों का कहना है कि अस्पताल की लापरवाही की वजह से युवक की जान गई। इस बीच परिजनों ने अस्पताल के शीशे, गमले और गाड़ियों को भी नुकसान पहुंचाया। बताया जा रहा है कि घटना के बाद अस्पताल के बाहर हालात तनावपूर्ण हो गया है।
परिजनों ने इलाज में लापरवाही का लगाया आरोप
जानकारी के अनुसार बच्चे का इलाज अस्पताल में चल रहा था और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। मौत की खबर मिलते ही परिजनों का गुसा फुट गया और गुस्साए परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। देखते ही देखते अस्पताल के बाहर हंगामा बढ़ गया और भीड़ ने आस्पताल में तोड़फोड़ कर दी। परिजनों का आरोप है कि युवक को वेंटिलेटर पर रखकर लगातार पैसे वसूले जा रहे थे।
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पैसे वसूलने और किडनी लगाने का आरोप लगाया
परिवार ने अस्पताल के खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि अनावश्यक रूप से वेंटिलेटर पर रखा गया ताकि मेडिकल बिल बढ़ाए जा सकें और उसकी हालत में कोई खास सुधार न होने के बावजूद उनसे लगभग 5 लाख रुपये वसूले गए। परिवार ने आरोप लगाया है कि इलाज के दौरान लड़के की किडनी निकाल ली गई होगी। हालांकि इस दावे की अभी तक आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं हुई है।
मौके पर पहुंची पुलिस, जांच जारी है
इस घटना के बाद पुलिस ने मामले के सभी पहलुओं की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि वे मेडिकल रिकॉर्ड, उपचार प्रक्रिया, बिलिंग विवरण और अंग निकालने के गंभीर आरोप की जांच करेंगे। हालांकि, अभी तक अस्पताल ने आरोपों के संबंध में कोई बयान जारी नहीं किया है।
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इस मामले ने निजी स्वास्थ्य सेवा में जवाबदेही, मरीजों के अधिकारों और आपातकालीन उपचार में पारदर्शिता को लेकर व्यापक चिंताएं खड़ी कर दी हैं।