Bihar: सम्राट चौधरी को मिला सबसे बड़ा ताज... तो पूर्व डिप्टी CM विजय सिन्हा का क्या होगा सियासी भविष्य? केंद्र में खुलेगा ऑप्शन या फिर...

बिहार में नई सरकार के गठन के बाद सियासी गलियारों में सबसे बड़ा सवाल पूर्व उप मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा के सियासी भविष्य को लेकर उठ रहा है। विजय सिन्हा के लिए क्या केंद्र में खुलेगा ऑप्शन?

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Vijay sinha
पूर्व डिप्टी CM विजय सिन्हा का क्या होगा सियासी भविष्य? | Image: Facebook

बिहार में नई सरकार का गठन हो गया है। करीब 20 साल बाद प्रदेश में सत्ता परिवर्तन हुआ है। बिहार की इतिहास में ये पहली बार है जब BJP का कोई नेता बिहार के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर विराजमान हुआ है। सम्राट चौधरी बिहार के 24वें मुख्यमंत्री बन गए हैं। मगर नई सरकार के गठन के बाद सियासी गलियारों में सबसे बड़ा सवाल पूर्व उप मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा की सियासी भविष्य को लेकर उठने लगी हैं।

विजय सिन्हा की पहचान BJP के कद्दावर नेता के रूप में होती है। नीतीश कुमार के कार्यकाल में दो बार उप मुख्यमंत्री पद संभालने वाले सिन्हा का नाम मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदारों में शामिल था, लेकिन अंत में यह पद सम्राट चौधरी को मिल गया। सम्राट चौधरी भी पिछली सरकारों में डिप्टी सीएम थे, लेकिन इस बार उन्हें मुख्यमंत्री बनाया गया। इसके साथ ही विजय कुमार सिन्हा को डिप्टी सीएम पद से हटा दिया गया। फिलहाल उन्हें नई कैबिनेट में भी जगह नहीं मिली है, ऐसे में सवाल उठ रहा है कि सम्राट चौधरी का प्रमोशन कर सीएम बनाया गया, मगर विजय सिन्हा का क्या डिमोशन हो जाएगा?

विजय कुमार सिन्हा ने पहले दी दिए थे संकेत

मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा से दो दिन पहले ही विजय कुमार सिन्हा ने अपने विधानसभा क्षेत्र लखीसराय में पत्रकारों से बातचीत के दौरान साफ कर दिया था कि वे मुख्यमंत्री पद की दौड़ में नहीं हैं। उन्होंने कहा था, 'मैं सीएम पद की रेस में नहीं, सेवा करने की रेस में हूं और इसी में बने रहना चाहता हूं।' राजनीतिक विश्लेषक इस बयान को सिन्हा के गहरे समझबूझ का संकेत मान रहे हैं। उन्हें पहले से ही अंदाजा था कि पार्टी इस बार सम्राट चौधरी को तरजीह देगी।

सम्राट के सीएम बनने से बड़ा नुकसान

बीजेपी के इस फैसले से सबसे ज्यादा नुकसान विजय कुमार सिन्हा को हुआ है, जो वर्षों से पार्टी संगठन में जमीन पर काम करते रहे हैं। अब बीजेपी के सामने चुनौती है कि सिन्हा जैसे अनुभवी और समर्पित नेता को कैसे संतुष्ट किया जाए। क्योंकि विजय कुमार सिन्हा बीजेपी के दिग्गज नेताओं में शुमार हैं। उन्होंने विधायक, मंत्री और बिहार विधानसभा स्पीकर तक की जिम्मेदारी निभाई है। नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली NDA सरकार में वे दो बार उप मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं।

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पार्टी के लिए विजय सिन्हा का बड़ा त्याग

RSS की पाठशाला से निकले विजय सिन्हा ने अपनी राजनीतिक शुरुआत बीजेपी से ही की थी और अब तक वो BJP में है। वहीं, सम्राट चौधरी ने राजनीतिक करियर की शुरुआत RJD से की थी फिर वो JDU में शामिल हो गए। जदयू से मोह भंग होने के बाद सम्राट बीजेपी में आ गए और पार्टी ने उन्हें जल्द ही बड़ा तोहफा भी दे दिया। उनके मुख्यमंत्री बनने को पार्टी में 'सरप्राइज' माना जा रहा है।

विजय सिन्हा का सियासी भविष्य का क्या होगा?

अब सवाल यह है कि क्या विजय कुमार सिन्हा को सम्राट चौधरी के मंत्रिमंडल में मंत्री पद दिया जाएगा या फिर पूर्व डिप्टी सीएम तारकेश्वर प्रसाद और रेणु देवी की तरह उन्हें कैबिनेट से बाहर रखा जाएगा? यह फैसला न सिर्फ सिन्हा की भविष्य की भूमिका तय करेगा, बल्कि बीजेपी के अंदरूनी संतुलन को भी प्रभावित करेगा। बिहार की सियासी गलियारों में इस 'डिमोशन' पर चर्चा तेज है।

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बता दें 2021 में NDA की सरकार बनी तो बीजेपी ने सुशील मोदी की डिप्टीसीएम पद से छुट्टी कर उनकी जगह पर तारकेश्वर प्रसाद और रेणु देवी को डिप्टीसीएम बनाया था। फिर सुशील मोदी को बीजेपी ने राज्यसभा भेज दिया था। वहीं, नीतीश कुमार 2024 में RJD का साथ छोड़कर जब दोबारा बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बनाई तो तारकेश्वर प्रसाद और रेणु देवी को डिप्टीसीएम नहीं बनाया गया और न ही उन्हें कैबिनेट में जगह दी गई। ऐसे में अब देखना होगा कि विजय सिन्हा पर BJP क्या फैसला लेती है।
 

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Published By :
Rupam Kumari
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