Bihar Politics: नीतीश के बेटे के राजनीति में आने की अटकलें तेज
बिहार के राजनीतिक हलकों में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत के राजनीति में आने की अटकलें सोमवार को छाई रहीं।
- भारत
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बिहार के राजनीतिक हलकों में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत के राजनीति में आने की अटकलें सोमवार को छाई रहीं।
कुछ मीडिया संस्थानों में आयी खबरों में दावा किया गया कि निशांत अगले माह किसी समय अपने पिता की पार्टी जनता दल (यूनाइटेड) में शामिल हो सकते हैं।
जब मुख्यमंत्री के सबसे करीबी वरिष्ठ मंत्री श्रवण कुमार से इन अटकलों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘मुझे नहीं पता कि इन खबरों में कितनी सच्चाई है, लेकिन अगर निशांत राजनीति में आते हैं तो यह स्वागत योग्य कदम होगा।’’
मंत्री ने यह भी बताया कि जद(यू) अध्यक्ष के बेटे ने हाल ही में पटना के बाहरी इलाके बख्तियारपुर में एक प्रभावशाली भाषण दिया था।
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जद(यू) के वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘‘अपने संबोधन के दौरान निशांत ने न केवल अपनी झिझक पर काबू पाने की क्षमता प्रदर्शित की, बल्कि उन्होंने प्रदेश को लेकर अपनी असाधारण समझ का भी प्रदर्शन किया जो उनकी पीढ़ी के लोगों में बहुत कम देखने को मिलती है। अगर वे सार्वजनिक क्षेत्र में उतरते हैं तो यह सभी के लिए अच्छा होगा।’’
हालांकि, उन्होंने कहा, ‘‘मुख्यमंत्री के किसी भी पारिवारिक सदस्य का पार्टी में शानदार स्वागत होगा, बशर्ते कि वे इसके लिए सहमत हों। लेकिन हमारे नेता सिद्धांतवादी हैं और वंशवाद को नापसंद करते हैं। वे हमेशा अपने गुरु दिवंगत कर्पूरी ठाकुर का उदाहरण देते हैं जो अपने जीवनकाल में अपनी किसी भी संतान को राजनीति में नहीं लाये। अगर नीतीश जी अपना मन बदल लेते हैं तो यह बहुत अच्छा होगा। बिहार और जद(यू) को निशांत जैसे युवा, गतिशील नेताओं की जरूरत है।’’
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जद(यू) कार्यालय में पार्टी पदाधिकारी भी इस संभावना से खुश दिखे, हालांकि वे सामने आकर ऐसा कहने से कतराते दिखे।
नीतीश कुमार की इकलौती संतान निशांत सार्वजनिक तौर पर कम सक्रिय रहते हैं। ऐसे में उनके बारे में लोग ज्यादा नहीं जानते।
निशांत के राजनीति में आने की अटकलें ऐसे समय पर लगाई जा रही हैं, जब राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता तेजस्वी यादव और जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर जैसे उनके आलोचक आरोप लगाते रहते हैं कि स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं और अधिक उम्र हो जाने के कारण कुमार सुचारू रूप से सरकार चलाने में कथित तौर पर ‘‘सक्षम’’ नहीं हैं।