अपडेटेड 15 January 2026 at 23:40 IST

Bihar: दही-चूड़ा भोज के बहाने बिहार में बही सियासी बयार, तेज प्रताप और चिराग पासवान ने सजाया मंच तो दिखे कई नए समीकरण

बिहार में विधानसभा चुनाव के बाद पहली बार आयोजित हुए दही-चूड़ा भोज में राजनीति का अलग ही रंग देखने को मिला।

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Dahi Chura Politics
Dahi Chura Politics | Image: Republic

Dahi Chura Politics: बिहार में दही-चूड़ा भोज महज परंपरा नहीं, बल्कि राजनीतिक संदेशों का मंच बन चुका है। विधानसभा चुनाव के बाद पहली बार आयोजित हुए इस भोज में राज्य की राजनीति का अलग ही रंग देखने को मिला। यहां सत्ता और विपक्ष दोनों खेमे में राजनीतिक हलचल दिखी।

इस बार बिहार की दही चूड़ा पॉलिटिक्स की पूरी लाइमलाइट लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप ने लूट ली। भले ही लालू यादव ने इस बार दही चूड़ा का भोज नहीं दिया, लेकिन तेज प्रताप का आयोजन चर्चित रहा। बड़े बेटे के आयोजन में लालू यादव की मौजूदगी संतुलन साधने की कोशिश के रूप में देखी गई। वहीं राबड़ी देवी की गैरमौजूदगी चर्चा का विषय रही।

तेज प्रताप के भोज में तेजस्वी-राबड़ी गैरहाजिर तो…

तेज प्रताप यादव के बुलावे पर तेजस्वी यादव के नहीं आने की संभावना तो पहले ही थी, लेकिन राबड़ी देवी की गैरहाजिरी ने कई सवालिया निशान लगा दिए। वहीं दूसरी तरफ भोज में राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, डिप्टी सीएम विजय सिन्हा समेत बिहार सरकार के कई मंत्री शामिल हुए। 

तेज प्रताप ने पलट दी बाजी

परिवार से अलग होने के बाद लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप ने अपनी नई पार्टी जनशक्ति जनता दल बनाई। इसके बाद विधानसभा चुनाव में तेज प्रताप की पार्टी को हार का मुंह ताकना पड़ा, जबकि लालू की पार्टी RJD को भी करारी हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद लालू परिवार में कलह और बढ़ गई। बेटे रोहिणी आचार्य घर की लड़ाई सड़क तक ले आई। लेकिन अब 9 महीने बाद जब तेज प्रताप के दही-चूड़ा भोज में लालू यादव की मौजूदगी से बड़े बेटे का हौसला बढ़ता दिखा। जब उनसे पूछा गया कि क्या JJD का RJD में विलय होगा? दो उन्होंने दो टूक जवाब देते हुए कहा कि 'JJD ही उनके पिता की असली पार्टी है। तेजस्वी यादव को ही RJD का JJD में विलय कर लेना चाहिए।'

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विजय सिन्हा के न्यौते पर जुटी बीजेपी-जेडीयू

इसके अलावा डिप्टी सीएम विजय सिन्हा के आवास पर भी दही-चूड़ा भोज रखा गया था जिसमें सीएम नीतीश कुमार के साथ-साथ बीजेपी और जेडीयू के तमाम बड़े नेताओं ने शिरकत की। इसे एनडीए के शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा गया। हालांकि तेज प्रताप की मौजूदगी चर्चा में रही। जेडीयू विधायक और पूर्व मंत्री रत्नेश सदा के यहां भी आयोजित भोज में सीएम नीतीश की मौजूदगी ने संकेत दिया कि पार्टी संगठन और नेतृत्व के बीच संवाद मजबूत है। इस दौरान जेडीयू और एनडीए से जुड़े कई नेता और कार्यकर्ता भी भोज में शामिल हुए। 

भाजपा दफ्तर में हुए भोज और भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नवीन के प्रस्तावित आयोजन को लेकर अनुमान में इसे पहले ही सुपरहिट बताया जा रहा है।

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चिराग के भोज में जुटीं राजनीतिक हस्तियां

लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान के दही चूड़ा भोज में भी एनडीए नेताओं और कार्यकर्ताओं की अच्छी खासी भीड़ दिखी। इस भोज को एनडीए में बढ़ती आपसी तालमेल के तौर पर देखा जा रहा है।

कांग्रेस के भोज से नदारद रहे सभी 6 विधायक

वहीं पटना में कांग्रेस मुख्यालय सदाकत आश्रम में भी दही चूड़ा भोज का आयोजन हुआ। इसमें पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम और अन्य प्रदेश पदाधिकारी तो मौजूद रहे, लेकिन पार्टी के विधायक नदारद रहे। सूबे में कांग्रेस के छह विधायकों में से एक भी भोज में शामिल होने नहीं पहुंचा। कांग्रेस विधायकों के किनारा करने से कयासों का बाजार गर्म हो गया। जेडीयू ने इसे पार्टी की आंतरिक कलह का नतीजा बताते हुए तंज कसा। 

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Published By : Ankur Shrivastava

पब्लिश्ड 15 January 2026 at 23:40 IST