Bihar: राज्यसभा जाने से पहले आज से समृद्ध यात्रा पर निकलेंगे CM नीतीश, तीसरे चरण के तहत 5 दिनों तक 10 जिलों का करेंगे दौरा; देंगे करोड़ों की सौगात
बिहार में सियासी गहमागहमी के और राज्यसभा चुनाव की तैयारियों के बीच सीएम नीतीश कुमार एक बार से यात्रा पर निकलने वाले हैं। आज से उनकी समृद्धि यात्रा का तीसरा चरण शुरू होगा। जानें किन-किन जिलों का करेंगे दौरा
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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक बार फिर से प्रदेश में विकास की जमीनी हकीकत को परखने के लिए राज्यव्यापी यात्रा पर निकलने जा रहे हैं। आज, 10 मार्च से उनकी समृद्धि यात्रा का तीसरा चरण शुरू होगा। 5 दिनों तक चलने वाले इस यात्रा के तहत सीएम नीतीश सीमांचल और कोसी क्षेत्र के कुल 10 जिलों का तूफानी दौरा करेंगे। राज्यसभा जाने से पहले यह उनका बड़ा कार्यक्रम हैे, जिसके तहत वो एक बार फिर जनता से रूबरू होंगे।
बिहार में सियासी गहमागहमी के और राज्यसभा चुनाव की तैयारियों के बीच सीएम नीतीश कुमार ने विकास कार्यों की समीक्षा और जनता से सीधे संवाद के लिए एक बार फिर मैदान में उतरने का फैसला किया है। मंगलवार, 10 मार्च से वो अपनी समृद्ध यात्रा के तीसरे चरण की शुरुआत करेंगे। सुपौल जिले के निर्मली से इस यात्रा की शुरुआत होगी।
सुपौल से होगी यात्रा की शुरुआत
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार यात्रा के पहले दिन सुपौल और मधेपुरा जिले में विकास कार्यों का जायजा लेंगे। अपन दौरे के दौरान वो 569.36 करोड़ रुपये की 213 विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी करेंगे। इनमें सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई और अन्य क्षेत्रों से जुड़ी योजनाएं शामिल हैं। सीएम जीविका दीदी संग संवाद भी करेंगे। कार्यक्रम को लेकर प्रशासन ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं।
यात्रा का जिलावार कार्यक्रम
- 10 मार्च: सुपौल और मधेपुरा
- 11 मार्च: अररिया और किशनगंज
- 12 मार्च: पूर्णिया और कटिहार
- 13 मार्च: सहरसा और खगड़िया
- 14 मार्च: बेगूसराय और शेखपुरा (यात्रा का समापन, पटना वापसी)
बता दें कि समृद्धि यात्रा की शुरुआत 16 जनवरी 2026 को पश्चिम चंपारण से हुई थी, लेकिन बजट सत्र के कारण इसे बीच में स्थगित करना पड़ा था। अब तीसरे चरण में यह यात्रा कोसी-सीमांचल के पिछड़े इलाकों पर केंद्रित है। यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब नीतीश कुमार राज्यसभा जाने वाले हैं। लेकिन बिहार में विकास की गति को बनाए रखने और योजनाओं की निगरानी के प्रति उनकी प्रतिबद्धता साफ दिख रही है। सीएम नीतीश ने सबसे पहले साल 2005 में न्याय यात्रा से इस परंपरा की शुरुआत की थी।