Pune: 'सुरक्षाकर्मी को काटा, केयरटेकर की पिटाई कर हाथ पैर बांधे', रेस्क्यू सेंटर से ऐसे भागी 13 बांग्लादेशी लड़कियां; CCTV आया सामने
पुणे के हडपसर इलाके में 'रेस्क्यू फाउंडेशन' में एक चौंकाने वाली घटना हुई है। इस सेंटर से 13 बांग्लादेशी लड़कियां फरार हो गईं। अब पूरी घटना का CCTV सामने आया है, जिसके बाद सुरक्षा पर सवाल उठने लगे हैं।
- भारत
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पुणे के हडपसर इलाके में मोहम्मदवाड़ी रोड स्थित 'रेस्क्यू फाउंडेशन' में एक चौंकाने वाली घटना हुई है। इस रेस्क्यू सेंटर से 13 बांग्लादेशी लड़कियां फरार हो गईं। फरार होने से पहले इन लड़कियों ने महिला केयरटेकर को बंधक बनाया और सुरक्षा गार्ड पर हमला कर दिया। पूरी घटना वहां लगे CCTV कैमरों में कैद हो गई है। अब इसका फुटेज सामने आया है, जिसमें साफ देखा जा सकता है कि लड़कियों ने रेस्क्यू सेंटर से भागने के लिए क्या-क्या किया।
मिली जानकारी के अनुसार, रविवार की रात यह घटना है। एक बांग्लादेशी लड़की ने दवा लेने का बहाना बनाकर केयरटेकर लक्ष्मी कांबले से दरवाजा खुलवाया। जैसे ही दरवाजा खुला, चार अन्य लड़कियों ने मिलकर कांबले पर हमला कर उन्हें मेडिकल रूम में बंद कर दिया। उनके हाथ पैर कपड़े से बांध दिया और मुंह भी कपड़ा लगा दिया। परिसर में सफाई के समय सुरक्षा गार्ड का मुख्य द्वार गलती से खुला रह गया। लड़कियों ने इसका फायदा उठाया।
सुरक्षा गार्ड को काटा दांत
सुरक्षा गार्ड ने लड़कियों को रोकने की पूरी कोशिश की। मगर उनकी संख्या ज्यादा थी और सभी 13 लड़कियों ने मिलकर गार्ड को धक्का दिया, फिर उसके हाथ में दांत से काट लिया और वहां से फरार हो गई। घटना की सूचना मिलते ही संस्था प्रबंधन ने कालेपडळ पुलिस को सूचित किया। पुलिस ने सैयदनगर और हडपसर क्षेत्र में सर्च ऑपरेशन चलाया।
13 में 2 को पुलिस ने पकड़ा
घटना के बाद तुरंत आसपास तलाश शुरू की गई, जिसमें लड़कियां पकड़ी गई लेकिन 11 अभी भी लापता हैं। दोनों लड़कियों को हिरासत में लेकर पुलिस पूछताछ कर रही है। हैरानी की बात यह है कि कालेपडळ पुलिस ने इस मामले में सिर्फ जनरल डायरी (जीडी) दर्ज की है, अभी तक कोई आधिकारिक FIR दर्ज होने की खबर नहीं है।
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रेस्क्यू फाउंडेशन की सुरक्षा पर उठे सवाल
बता दें कि 'रेस्क्यू फाउंडेशन' मानव तस्करी के शिकार महिलाओं और लड़कियों के पुनर्वास के लिए काम करती है। संस्था के अनुसार, 16 मार्च 2024 से पुलिस द्वारा दी गई सुरक्षा वापस ले ली गई थी। इसके बाद जिला प्रशासन और पुलिस आयुक्त को बार-बार लिखित अनुरोध किए गए, लेकिन सुरक्षा बहाल नहीं की गई। वर्तमान में संस्था क्षमता से ज्यादा महिलाओं से भरी हुई है। फरार लड़कियां बांग्लादेश की नागरिक हैं और उनके प्रत्यर्पण (डिपोर्टेशन) की प्रक्रिया में 1 से 2 साल का समय लगता है। लंबे इंतजार के कारण इन लड़कियों में मानसिक तनाव बढ़ गया था, जिसके चलते उन्होंने यह कदम उठाया। इस घटना ने महिला संरक्षण गृहों की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।