SIR के खिलाफ AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने खटखटाया सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा, एसआईआर प्रक्रिया को दी अदालत में चुनौती

असदुद्दीन ओवैसी ने SIR प्रक्रिया को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। ओवैसी की ओर से पेश वकील ने चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच के समक्ष याचिका का जिक्र किया।

  • Facebook Share Icon
  • Twitter Share Icon
  • WhatsApp Share Icon
 
Follow : Google News Icon
Asaduddin Owaisi
Asaduddin Owaisi | Image: X- ANI

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक और कानूनी लड़ाई तेज हो गई है। बुधवार को AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इस प्रक्रिया को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। उन्होंने चुनाव आयोग द्वारा अपनाए गए SIR के तरीके को अदालत में चुनौती दी है। ओवैसी से पहले वकील प्रशांत भूषण ने भी सुप्रीम कोर्ट में SIR प्रक्रिया को लेकर याचिका दाखिल की है।

ओवैसी की ओर से पेश वकील ने चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच के समक्ष याचिका का जिक्र किया। कोर्ट ने वकील से उन लंबित याचिकाओं की सूची मांगी है, जो उनकी याचिका से मिलती-जुलती हैं। सूची देखने के बाद ही अदालत तय करेगी कि ओवैसी की याचिका को कब सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए या नहीं। ओवैसी के वकील निजाम पाशा ने कोर्ट से अनुरोध किया कि अन्य याचिकाओं के साथ उनकी याचिका भी सुनी जाए।

SIR का मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट

वकील प्रशांत भूषण ने भी दिल्ली में चल रहे SIR प्रक्रिया से जुड़ा मामला सुप्रीम कोर्ट में रखा। उन्होंने कहा कि दिल्ली में फॉर्म-6 में घोषणा पत्र भरवाया जा रहा है, जिसमें व्यक्ति को यह बताना होता है कि उसने कभी वोट नहीं दिया। प्रशांत भूषण का तर्क है कि जो मतदाता किसी अन्य स्थान से शिफ्ट होकर आए हैं, उन्हें फॉर्म-8 भरने का अवसर मिलना चाहिए।

प्रशांत भूषण की याचिका पर 30 अक्टूबर को सुनवाई

मतदाता सूची में सुधार की अंतिम तारीख 30 अक्टूबर है और सुप्रीम कोर्ट ने भी इसी दिन वकील प्रशांत भूषण की याचिका पर सुनवाई की तारीख तय की है। उन्होंने मांग की कि उनकी याचिका को पहले सुना जाए। इससे पहले, लोकसभा में विपक्ष के नेता (LoP) राहुल गांधी, राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और विपक्ष के अन्य नेताओं ने भी सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। उन्होंने प्रक्रिया में गड़बड़ी का आरोप लगाया और वोटर डेटाबेस व हटाए गए नामों की स्वतंत्र ऑडिट की मांग की।

Advertisement

विपक्ष ने भी जताई है SIR पर आपत्ति

विपक्ष की याचिका में वोटर डेटाबेस और हटाए गए नामों की स्वतंत्र ऑडिट के साथ-साथ एक कमेटी बनाने की मांग की गई है। इस कमेटी की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज करें और यह कमेटी रिविजन प्रक्रिया के लागू होने और वोटर लिस्ट व इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVMs) को नियंत्रित करने वाले तकनीकी सिस्टम की जांच करे।

याचिकाकर्ताओं ने पहले मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) द्वारा अन्य चुनाव आयुक्तों की जानकारी या सहमति के बिना चुनाव आयोग की सामूहिक शक्तियों का इस्तेमाल करने पर सवाल उठाए थे। उन्होंने देशव्यापी SIR करने के फैसले से जुड़े रिकॉर्ड, जैसे फाइलें, मीटिंग के मिनट्स, नोटिंग और आपत्तियां मांगी हैं। राहुल गांधी की याचिका में तर्क दिया गया है कि चुनाव आयोग को एक बहु-सदस्यीय संवैधानिक निकाय के रूप में काम करना चाहिए।  

Advertisement

राहुल गांधी ने क्या कहा था?

राहुल ने कहा था, वोटर लिस्ट से जुड़े फैसले संविधान के अनुच्छेद 324 और 'मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023' के अनुरूप होने चाहिए। याचिका में ECINET प्लेटफॉर्म पर ऑनलाइन फॉर्म 6 में बदलाव को लेकर भी चिंता जताई गई है। इस बदलाव में आवेदकों या उनके रिश्तेदारों के पिछले SIR वोटर लिस्ट में होने के बारे में घोषणा शामिल करने की बात कही गई है।

यह भी पढ़ें: CJP को कोर्ट से झटका, आशुतोष रांका-सौरव दास 5 दिन की न्यायिक कस्टडी में
 

Published By:
 Rupam Kumari
पब्लिश्ड