म्यांमार में भूकंप से फिर दहशत, तेज झटकों ने लोगों को डराया; 30 किलोमीटर की गहराई पर रहा केंद्र
नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के अनुसार, गुरुवार दोपहर को म्यांमार में 3.4 तीव्रता का भूकंप आया। भूकंप 30 किलोमीटर की गहराई पर आया।
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Myanmar earthquake: म्यांमार को भूकंप के झटकों ने फिर डरा दिया है। कुछ हफ्ते पहले भयानक भूकंप ने म्यांमार को तबाह कर दिया था। हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने म्यांमार में आए दो शक्तिशाली भूकंपों के पीड़ितों पर एक नए आंकड़े में कहा कि 3700 से अधिक लोगों की जान चली गई है और लगभग 5,100 लोग घायल हुए। इतनी बड़ी घटना के बाद म्यांमार में फिर प्राकृतिक आपदा ने लोगों को डराया है।
नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के अनुसार, गुरुवार दोपहर को म्यांमार में 3.4 तीव्रता का भूकंप आया। NCS ने कहा कि भूकंप भारतीय मानक समय (IST) के अनुसार 13:37 बजे 30 किलोमीटर की गहराई पर आया। माना जाता है कि इस तरह के उथले भूकंप गहरे भूकंपों की तुलना में ज्यादा खतरनाक होते हैं क्योंकि पृथ्वी की सतह के नजदीक आने पर ज्यादा एनर्जी निकलती है। इससे जमीन का कंपन ज्यादा होता है और इमारतों को अधिक नुकसान होता है। गहरे भूकंप सतह पर आने पर ऊर्जा खो देते हैं। फिलहाल इस भूकंप से अभी म्यांमार में किसी तरह के बड़े नुकसान की जानकारी नहीं है।
28 मार्च को आए भूकंप ने म्यांमार को संकट में डाला
28 मार्च 2025 को आए म्यांमार में 7.7 तीव्रता की तीव्रता का विशालकाय भूकंप आया। भूकंप का केंद्र मंडाले के पास सागाइंग क्षेत्र में था, जिससे मंडाले, नायपीडॉ, सागाइंग, शान, बागो, मगवे और कायिन क्षेत्रों में भारी नुकसान हुआ। म्यांमार में कई जगह धरती फट गई। इमारतें तहस-नहस हो गईं। मलबे के ढेर तस्वीरों में दिखाई दिए। इससे हजारों लोग बेघर हो गए।
भूकंपीय क्षेत्र वाला देश माना जाता है म्यांमार
म्यांमार को भूकंपीय क्षेत्र वाला देश माना जाता है। यूरेशियन और इंडो-ऑस्ट्रेलियाई प्लेटों के बीच टकराव के कारण म्यांमार एक ऐसा क्षेत्र है, जहां भूकंपीय खतरा बहुत ज्यादा है। भूकंप विज्ञान केंद्र की ओर से सारांशित भूकंप मापदंडों के अनुसार, 1990 से 2019 तक हर साल म्यांमार और उसके आसपास के इलाकों में 3.0 से अधिक या उसके बराबर तीव्रता वाली लगभग 140 घटनाएं हुईं। इस तरह ये स्पष्ट है कि म्यांमार मध्यम और बड़ी तीव्रता वाले भूकंपों के खतरों के प्रति संवेदनशील है, जिसमें इसकी लंबी तटरेखा पर सुनामी के खतरे भी शामिल हैं।