अपडेटेड 26 February 2026 at 14:55 IST

AI Summit Shirtless Protest: IYC के महासचिव निगम भंडारी को नहीं मिली राहत, अग्रिम जमानत पर कोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित

पटियाला हाउस कोर्ट ने इंडियन यूथ कांग्रेस के जनरल सेक्रेटरी निगम भंडारी की एंटीसिपेटरी बेल पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। कोर्ट कल फैसला सुनाएगा।

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Bharat Mandapam Protest India AI Summit 2026
AI Summit Shirtless Protest | Image: IYC

दिल्ली में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान कांग्रेस के यूथ कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए शर्टलेस प्रदर्शन मामले पर पटियाला हाउस कोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने मामले में इंडियन यूथ कांग्रेस (IYC) के जनरल सेक्रेटरी निगम भंडारी को फिलहाल जमानत नहीं दी है। पटियाला हाउस कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है।

पटियाला हाउस कोर्ट ने इंडियन यूथ कांग्रेस के जनरल सेक्रेटरी निगम भंडारी की एंटीसिपेटरी बेल पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। कोर्ट कल फैसला सुनाएगा। उन्होंने AI समिट विरोध मामले के सिलसिले में एंटीसिपेटरी बेल याचिका दायर की है।

IYC महासचिव निगम भंडारी को नहीं मिली जमानत

निगम भंडारी ने पटियाला हाउस कोर्ट में गिरफ्तारी की आशंका और सहयोग करने की बात कहते हुए अग्रिम जमानत की मांग की। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि प्रदर्शन के कारण देश की छवि दुनिया के सामने खराब हुई साथ ही सुरक्षा व्यवस्था भी बाधित हुई। जानबुझकर  अव्यवस्था फैलाने की कोशिश की गई। कोर्ट ने सभी दलील सुनने के बाद फैसला कल तक के लिए सुरक्षित रखा है।

क्या है पूरा मामला?

बता दें कि यह मामला 20 फरवरी 2026 को प्रगति मैदान के भारत मंडपम में आयोजित इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान इंडियन यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए 'शर्टलेस' विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है। प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के खिलाफ नारे लगाए और प्रधानमंत्री के खिलाफ नारेबाजी की, जिससे वहां हंगामा हो गया था।

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पुलिस रिमांड पर कई आरोपी

दिल्ली पुलिस ने इस घटना को सार्वजनिक व्यवस्था पर हमला और साजिश करार देते हुए कई IYC नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ मामला दर्ज किया है। अब तक कई गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, जिनमें IYC के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब भी शामिल हैं। कोर्ट ने कुछ आरोपियों को पुलिस रिमांड पर भेजा है और कुछ की जमानत याचिकाएं खारिज की हैं, जिसमें कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि अभिव्यक्ति की आजादी असीमित नहीं है और प्रदर्शन से सार्वजनिक व्यवस्था तथा देश की अंतरराष्ट्रीय छवि को नुकसान पहुंचा।

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Published By : Rupam Kumari

पब्लिश्ड 26 February 2026 at 12:58 IST