अपडेटेड 7 March 2026 at 15:32 IST

'मानवीय आधार पर जहाज को शरण देना सही...', ईरानी जहाज आइरिस डेना को लेकर विदेश मंत्री ने दी जानकारी, अमेरिकी हमले में 87 लोगों की गई थी जान

रायसीना डायलॉग 2026 में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने ईरानी जहाज 'आइरिस डेना' (IRIS Dena) पर अमेरिकी पनडुब्बी के टॉरपीडो हमले के मामले में भारत का रुख साफ किया।

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After Iranian Ship Sunk By America, S Jaishankar Explains "Reality Of Indian Ocean"
'मानवीय आधार पर जहाज को शरण देना सही लेकिन...', ईरानी जहाज को लेकर विदेश मंत्री ने रखा भारत का पक्ष | Image: X

रायसीना डायलॉग 2026 में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने ईरानी जहाज 'आइरिस डेना' (IRIS Dena) पर अमेरिकी पनडुब्बी के टॉरपीडो हमले के मामले को लेकर विदेश मंत्री जयशंकर ने जानकारी दी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि (UNCLOS) और अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करता है, लेकिन मानवीय आधार पर ईरान के IRIS Lavan जहाज को शरण देना सही फैसला है। उन्होंने आइरिस डेना पर जानकारी देते हुए कहा कि  वो जहाज 'गलत समय पर गलत जगह' फंस गया था। जयशंकर ने हिंद महासागर की जटिल भू-राजनीति को रेखांकित करते हुए भारत की जिम्मेदारी निभाने की आवश्यकता पर बल दिया।

डायलॉग के दौरान उन्होंने बताया, "ईरान से संदेश आया था कि उनका एक जहाज, जो उस समय भारत की सीमाओं के सबसे करीब था, बंदरगाह में प्रवेश की अनुमति मांग रहा था। जहाज में तकनीकी खराबी थी। एक मार्च को भारत ने इजाजत दी और कुछ दिनों बाद जहाज कोच्चि बंदरगाह पर डॉक हो गया। इस पर कई युवा कैडेट सवार थे।"

विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने कहा, "हिंद महासागर क्षेत्र एक इकोसिस्टम है। हिंद महासागर, दुनिया के दूसरे हिस्सों के मुकाबले कहीं ज़्यादा, रिकवरी और पुनर्निर्माण प्रक्रिया में है। अलग-अलग देश ऐसा कर रहे हैं, लेकिन पूरा क्षेत्र, ट्रेड पैटर्न की बहाली, कनेक्टिविटी। हिंद महासागर के इस पूरे पुनर्निर्माण प्रक्रिया को पहचानने की जरूरत है। इसमें बहुत मेहनत लगती है। पिछले दशक में, इंडियन डिप्लोमेसी ने इस प्रक्रिया में बहुत निवेश किया है।"

भारत अपनी तरक्की खुद तय करेगा

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जयशंकर ने कहा, "अगर हमें हिंद महासागर की एक तरह की भावना या पहचान बनानी है, तो उसे संसाधन, काम, प्रतिबद्धता, प्रैक्टिकल प्रोजेक्ट्स से सपोर्ट करना होगा। आप हिंद महासागर को कैसे बनाते हैं, इसके अलग-अलग पहलू हैं। हिंद महासागर ही एकमात्र ऐसा महासागर क्यों है जिसका नाम किसी देश के नाम पर रखा गया है। हम इसके ठीक बीच में हैं। हमारी ग्रोथ से, हिंद महासागर के दूसरे देशों को फायदा होगा। जो हमारे साथ काम करेंगे उन्हें ज़्यादा फायदे मिलेंगे। भारत की तरक्की इंडिया से तय होगी। यह हमारी ताकत से तय होगी, दूसरों की गलतियों से नहीं।"

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Published By : Ankur Shrivastava

पब्लिश्ड 7 March 2026 at 15:00 IST