संगम की रेती पर भव्य महाकुंभ के आयोजन के लिए प्रशासन तैयार

साल 2024 की विदाई करीब आने के बीच उत्तर प्रदेश का पूरा सरकारी तंत्र प्रयागराज में गंगा, यमुना और पौराणिक सरस्वती नदी के पवित्र संगम पर आगामी 13 जनवरी से शुरू होने वाले महाकुंभ की तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए जुटा है।

Follow : Google News Icon  
UP govt to invite all CMs for Prayagraj Maha Kumbh 2025
महाकुंभ की तैयारी | Image: X

साल 2024 की विदाई करीब आने के बीच उत्तर प्रदेश का पूरा सरकारी तंत्र प्रयागराज में गंगा, यमुना और पौराणिक सरस्वती नदी के पवित्र संगम पर आगामी 13 जनवरी से शुरू होने वाले महाकुंभ की तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए जुटा है। दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक महाकुंभ के लिये क्षेत्र को तमाम सुविधाओं से लैस करने के मकसद से श्रमिकों की पूरी फौज नदियों के प्रवाह को व्यवस्थित करने, सड़कों को चौड़ा करने और घाटों को समतल करने में जुटी है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को अपने रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' में इस मेगा आयोजन को 'एकता का महाकुंभ' बताया और लोगों से समाज से नफरत और विभाजन को खत्म करने के संकल्प के साथ इस भव्य धार्मिक समागम से लौटने का आग्रह किया। प्रधानमंत्री ने कहा, ''महाकुंभ का संदेश, एक हो पूरा देश।''

उन्होंने कहा कि महाकुंभ की विशेषता न केवल इसकी विशालता में है, बल्कि इसकी विविधता में भी है। महाकुंभ आगामी 13 जनवरी को 'पौष पूर्णिमा' से शुरू होगा और 45 दिनों के बाद 26 फरवरी को 'महा शिवरात्रि' पर सम्पन्न होगा। इस आयोजन में करोड़ों तीर्थयात्री संगम पर स्नान के लिये आते हैं। राज्य सरकार का अनुमान है कि इस बार 40 करोड़ श्रद्धालु 'आस्था की डुबकी' लगाएंगे और महाकुंभ को दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक समागम बनाएंगे।

इस बीच, इतने बड़े आयोजन की तैयारी में पूरा सरकारी अमला मुस्तैदी से जुटा है। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, महाकुंभ में श्रद्धालुओं के लिये एक लाख 60 हजार टेंट और डेढ़ लाख शौचालयों की स्थापना की गयी है और इनकी साफ-सफाई के लिए 15 हजार सफाई कर्मचारी तैनात किए जाएंगे। मेला क्षेत्र में पानी की सुविधा देने के लिये 1,250 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछायी गयी है। इसके अलावा 67 हजार एलईडी लाइट, दो हजार सोलर लाइट और तीन लाख पौधे लगाए जा रहे हैं।

Advertisement

सूत्रों के मुताबिक, नौ पक्के घाट, सात रिवरफ्रंट सड़कें और 12 किलोमीटर क्षेत्र में अस्थायी घाट निर्माणाधीन हैं। सात बस अड्डे भी बनाए जा रहे हैं। वहीं, क्षेत्र को सजाने के लिए 15 लाख वर्ग फुट से अधिक के भित्ति चित्र और ‘स्ट्रीट पेंटिंग’ बनाई गई हैं।

हालांकि, हर बड़ा आयोजन अपने साथ उतनी ही बड़ी चुनौतियां भी लेकर आता है। कटान की वजह से गंगा नदी अपने मूल मार्ग से दूर चली गई है और महाकुंभ के लिए उपलब्ध भूमि कम हो गई है। इसके अलावा, पांच साल के दौरान नदी के प्रवाह की जद में आ जाने से साल 2019 के कुंभ के लिए इस्तेमाल की गई 3200 हेक्टेयर जमीन कम हो गयी है।

Advertisement

मेला अधिकारी विजय किरण आनंद ने बताया, ''वर्ष 2019 और 2024 के बीच गंगा का जलस्तर काफी बढ़ गया है, जिससे कुंभ के लिए उपलब्ध भूमि कम हो गई है।'' सूत्रों के मुताबिक, अधिकारियों ने चुनौती स्वीकार करते हुए विभिन्न तरीके अपनाकर 3,200 हेक्टेयर भूमि को बहाल किया और यह सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त 800 हेक्टेयर भूमि जोड़ी है कि आयोजन का पैमाना हमेशा की तरह भव्य बना रहे। इस वक्त चार हजार हेक्टेयर भूमि पर अब महाकुंभ के आयोजन की जो तैयारी की जा रही है वह अपने आप में एक उपलब्धि है।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने आगामी 10 जनवरी तक तैयारियां पूरी हो जाने की सम्भावनाओं के बारे में पूछे जाने पर कहा, ''भले ही आप शादी के लिए छह महीने पहले से तैयारियां शुरू कर दें, लेकिन बारात आने तक काम जारी रहता है। यहां भी वही बात लागू होती है। मगर हम आश्वस्त हैं कि सब कुछ तय वक्त पर पूरा कर लिया जाएगा।''

महाकुंभ की तैयारी का काम अक्टूबर में शुरू हुआ था। सिंचाई विभाग के विशेषज्ञों ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान गुवाहाटी के परामर्श से तीर्थयात्रियों की आमद के लिए अतिरिक्त घाट बनाने के लिए नदियों के जलमार्गों को व्यवस्थित करने का काम शुरू किया था।

महाकुंभ का आयोजन केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं है बल्कि उत्तर प्रदेश सरकार के लिए यह प्रतिष्ठा का विषय भी है। इस साल की शुरुआत में अयोध्या में राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा की तरह ही महाकुंभ को भी भव्यतम बनाने की जोरदार तैयारियां की जा रही हैं। सरकार इस बार एक और बड़ा लक्ष्य लेकर चल रही है। साल 2019 में लगभग 24 करोड़ लोग कुंभ में शामिल हुए थे, वहीं इस बार 40 करोड़ श्रद्धालुओं के महाकुंभ में शामिल होने की सम्भावना है।

बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की आमद की सम्भावना के मद्देनजर चार हजार हेक्टेयर में फैले महाकुंभ मेला क्षेत्र को नदी के दोनों किनारों पर 25 सेक्टरों में विभाजित किया गया है। श्रद्धालुओं के सुचारू प्रवाह को सुनिश्चित करने के लिए 30 पंटून पुलों का निर्माण किया जा रहा है। वर्ष 2019 में ऐसे 22 पुल बनाये गये थे।

Published By :
Nidhi Mudgill
पब्लिश्ड