औरंगजेब की तारीफ पर देश में सियासी तूफान के बाद अबू आजमी का यू-टर्न, कहा- किसी को ठेस पहुंची तो मैं अपना बयान वापस लेता हूं
सपा के विधायक अबू आजमी ने औरंगजेब पर अपने रुख के बाद मचे हंगामे पर सफाई देते हुए कहा कि उनके बयान को तोड़-मरोड़ कर दिखाया गया है।
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महाराष्ट्र समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और विधायक अबू आजमी ने सोमवार, 3 मार्च को मुगल शासक औरंगजेब की तारीफ कर दी थी और उनको अच्छा शासक बताया था। इसके बाद महाराष्ट्र में सियासी पारा हाई हो गया था। उनके बयान की चौतरफा निंदा होने लगी। यहां तक की शिवसेना के सांसद ने उनके खिलाफ थाने में FIR भी दर्ज कराई। अब चौतरफा घिरने के बाद अपने बयान पर अबू आजमी ने सफाई दी है।
सपा के विधायक अबू आजमी ने औरंगजेब पर अपने रुख के बाद मचे हंगामे पर सफाई देते हुए X पर वीडियो पोस्ट किया है। वीडियो में सपा नेता कह रहे हैं, सदन से बाहर निकलन के बाद पत्रकारों ने मुझसे पूछा कि असम के सीएम ने राहुल गांधी की छवि को औरंगजेब की तरह पेश किया है, इस पर आप क्या कहेंगे। जब मैंने जवाब दिया तो मेरे शब्दों को तोड़-मरोड़ कर दिखाया गया है। औरंगज़ेब रहमतुल्लाह अलेह के बारे में मैंने वही कहा है जो इतिहासकरों और लेखकों ने कहा है।
मैं अपने शब्द, अपना स्टेटमेंट वापस लेता हूं-अबू आजमी
अबू आजमी ने वीडियो में आगे कहते नजर आ रहे हैं कि मैंने छत्रपति शिवाजी महाराज, संभाजी महाराज या अन्य किसी भी महापुरुषों के बारे में कोई अपमानजनक टिपण्णी नहीं की है। फिर भी अगर मेरी इस बात से कोई आहत हुआ है तो मैं अपने शब्द, अपना स्टेटमेंट वापस लेता हूं। इस बात को राजनितिक मुद्दा बनाया जा रहा है, और इसकी वजह से महाराष्ट्र विधानसभा के बजट सत्र को बंद करना मैं समझता हूं की यह महाराष्ट्र की जनता का नुकसान करना है। सदन जनता के लिए चलना चाहिए।
औरंगजेब को लेकर पहले सपा नेता ने क्या कहा था
अबू आजमी ने औरंगजेब को लेकर दिए अपने बयान में पहले कहा था, जब 1857 में मंगल पांडे ने अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह शुरू किया था, तब उनका साथ देने वाले बहादुर शाह जफर थे। अंग्रेजों को लगा कि अगर हिंदू और मुसलमान साथ आ गए तो हम भारत पर राज नहीं कर पाएंगे। औरंगजेब ने अगर मंदिर तोड़े तो कई मस्जिदे भी तोड़ी थी। इसमें हिंदू-मुस्लिम करने की कोई जरूरत नहीं है।
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अबू आजमी के इस बयान पर मचा हंगामा
अबू आजमी ने मुगल सम्राट औरंगजेब की तारीफ करते हुए उसे भारतीय इतिहास का बेहतरीन शासक बताया था। सपा नेता ने कहा था, 'राजा लोग अपनी संपत्ति के लिए संघर्ष किया करते थे धर्म के नाम पर नहीं। अगर धर्म के नाम के पर हिन्दू-मुस्लिम करते तो कितने हिन्दू मुस्लिम बन जाते? फिर कह रहा हूं कि औरंगजेब ने मंदिर भी तोड़े और मस्जिद भी तोड़े। अगर हिन्दू औरंगजेब के खिलाफ होते तो 34 फीसदी हिन्दू उनके साथ नहीं होते। जब औरंगजेब भारत में थे तब भारत सोने की चिड़िया था।
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